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History of India
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस तथा आजाद हिंद फौज के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उषा मेहता ने गुप्त रूप से 'कांग्रेस रेडियो' (Congress Radio) का संचालन किया था, जिसके माध्यम से भूमिगत नेताओं के संदेश और ब्रिटिश दमन की खबरें प्रसारित की जाती थीं।
- 2. सुभाष चंद्र बोस ने 1943 में सिंगापुर में 'अस्थायी आजाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की थी, जिसे जापान, जर्मनी और इटली सहित कुल नौ देशों की सरकारों ने आधिकारिक मान्यता दी थी।
- 3. आजाद हिंद फौज के सैनिकों ने मार्च 1944 में भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश कर मणिपुर के मोइरांग क्षेत्र में पहली बार स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।
- 4. भारत छोड़ो आंदोलन के तुरंत बाद वायसराय लॉर्ड वेवेल ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए शिमला सम्मेलन (1945) बुलाया था, जिसमें सुभाष चंद्र बोस को भी आजाद हिंद फौज के प्रतिनिधि के रूप में आमंत्रित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उषा मेहता ने बंबई से गुप्त 'कांग्रेस रेडियो' का संचालन किया था। सुभाष चंद्र बोस ने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'आर्जु हुकूमत-ए-आजाद हिंद' की स्थापना की थी जिसे 9 धुरी राष्ट्रों व उनके समर्थकों से मान्यता मिली। INA के सैनिकों ने मार्च 1944 में मोइरांग (मणिपुर) में तिरंगा फहराया था। कथन 4 असत्य है क्योंकि शिमला सम्मेलन (1945) में कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में मौलाना आजाद ने भाग लिया था, उसमें सुभाष चंद्र बोस को आमंत्रित नहीं किया गया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की अर्थव्यवस्था, व्यापार और नगर योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस सभ्यता की लिपि 'भावचित्रात्मक' (Pictographic) थी, जो आमतौर पर दाईं से बाईं ओर (Boustrophedon शैली में पहली पंक्ति दाईं से बाईं और दूसरी बाईं से दाईं) लिखी जाती थी, और इसमें सर्वाधिक संख्या में यू-आकार (U-shaped) तथा मछली के चिह्न पाए गए हैं।
2. लोथल और चान्हूड़ो दोनों ही स्थल सिंधु सभ्यता के प्रमुख औद्योगिक केंद्र थे, जहाँ मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factories) मिले हैं, किंतु चान्हूड़ो एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ से किसी भी प्रकार के दुर्ग (Citadel) का अवशेष प्राप्त नहीं हुआ है।
3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'पशुपतिनाथ' (प्रोटो-शिव) की मुहर पर कुल चार पशुओं - बाघ, हाथी, गेंडा और भैंसा का अंकन मिलता है, तथा इस मुहर के आसन के नीचे दो हिरण भी बैठे हुए चित्रित किए गए हैं।
4. सिंधु सभ्यता के लोग विदेशी व्यापार के माध्यम से मेसोपोटामिया, ओमान (मगन) और बहरीन (दिलमुन) के साथ संपर्क में थे, जिसकी पुष्टि मेसोपोटामिया के अभिलेखों में प्रयुक्त 'मेलूहा' (Meluhha) शब्द से होती है, जिसे इतिहासकारों ने सिंधु क्षेत्र के लिए ही संदर्भित माना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बहमनी सुल्तानों ने अपने प्रशासन में किस भाषा को राजभाषा (Official Language) बनाया था?
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मुगलकालीन प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुगल सम्राट अकबर द्वारा लागू की गई 'मनसबदारी व्यवस्था' आंशिक रूप से मंगोलों की दशमलव प्रणाली पर आधारित थी, जिसमें प्रत्येक मनसबदार को 'जात' (व्यक्तिगत पद और वेतन) तथा 'सवार' (घुड़सवार सैनिकों की संख्या) के पद प्रदान किए जाते थे, किंतु जहाँगीर के शासनकाल में 'दु-अस्पा सिह-अस्पा' प्रणाली जोड़कर सवार पद की संख्या को बिना जात बढ़ाए और अधिक लचीला बना दिया गया था।
2. शाहजहाँ के शासनकाल में भू-राजस्व निर्धारण के लिए अपनाई गई 'नस्क' या 'कंकूट' पद्धति के अलावा 'जपती' प्रणाली को दक्कन के प्रांतों में भी सख्ती से लागू किया गया, और मुर्शिद कुली खान ने दक्कन का दीवान बनते ही यहाँ तोडरमल की बंदोबस्त व्यवस्था को पूर्ण रूप से स्थापित कर दिया था।
3. औरंगजेब के शासनकाल में जागीर संकट (Jagirdari Crisis) अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच गया था, क्योंकि उपलब्ध खालसा भूमि और जागीर के रूप में वितरित की जाने वाली भूमि (पैबाकी) के बीच का संतुलन बिगड़ गया था, जिससे अमीरों के बीच जागीर प्राप्त करने के लिए तीव्र संघर्ष उत्पन्न हो गया था।
4. मुगल साम्राज्य के केंद्रीय वित्त विभाग का प्रमुख 'मीर बख्शी' होता था, जो सैनिकों के वेतन वितरण, घोड़ों को दागने (दाग हुलिया) और साम्राज्य की खुफिया व डाक व्यवस्था का प्रत्यक्ष रूप से संचालन करता था, जबकि दीवान का मुख्य कार्य केवल धार्मिक मामलों और दान-पुण्य की देखरेख करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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तुगलक कालीन सेना में "अमीर-ए-सादा" कौन होते थे?
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गुप्त साम्राज्य और मौर्योत्तर काल की प्रशासनिक संरचना तथा आर्थिक प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों द्वारा शुरू की गई भूमि-अनुदान (Land Grants) की प्रथा को गुप्त काल में व्यापक विस्तार मिला, जिसके तहत धार्मिक और प्रशासनिक अधिकारियों को कर-मुक्त भूमि दी जाती थी, और इससे सामंतवाद (Feudalism) के बीज पड़े।
2. गुप्त काल में तांबे के सिक्कों की तुलना में सोने के सिक्के (दीनार) अत्यधिक मात्रा में जारी किए गए, किंतु कुषाण काल की तुलना में गुप्त स्वर्ण सिक्कों में सोने की शुद्धता (खरापन) न्यूनतम थी, जो इस काल की गिरती हुई अर्थव्यवस्था को दर्शाता है।
3. गुप्तकालीन प्रशासन में प्रांतों को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिसके प्रशासनिक प्रमुख को 'उपरिक' कहा जाता था, जबकि जिला प्रशासन को 'विषय' कहा जाता था और इसके प्रमुख अधिकारी को 'विषयपति' कहा जाता था।
4. गुप्तोत्तर काल या मौर्योत्तर काल में व्यापारी गतिविधियों के पतन के साथ-साथ प्रसिद्ध रेशम बुनकर श्रेणी (Guild) का उल्लेख मंदसौर अभिलेख में मिलता है, जो यह दर्शाता है कि व्यवसायी और शिल्पकार अपनी मूल जाति और पैतृक व्यवसाय को छोड़कर कृषि कार्य अपनाने लगे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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