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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित ब्रह्म समाज ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पैतृक पुरोहितवाद का जोरदार खंडन किया, तथा वेदों की अचूकता और सर्वोच्चता को बिना किसी शर्त के स्वीकार किया था।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और पाखंड खंडिनी पताका फहराते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद, श्राद्ध और जन्म आधारित जाति व्यवस्था की कड़े शब्दों में आलोचना की।
- 3. वर्ष 1875 में न्यूयॉर्क में स्थापित 'थियोसोफिकल सोसाइटी' के विचारों को भारत में अत्यधिक लोकप्रियता दिलाने का श्रेय एनी बेसेंट को जाता है, जिन्होंने अडयार (मद्रास) को इसका अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय बनाया और प्राचीन हिंदू दर्शन तथा पुनर्जन्म के सिद्धांतों का समर्थन किया।
- 4. यंग बंगाल आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हेनरी एलियन विवियन डेरोज़ियो ने अपने शिष्यों में पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के प्रति अंधभक्ति को बढ़ावा दिया और ब्रिटिश राज की नीतियों की खुलकर प्रशंसा करते हुए किसी भी प्रकार की सामाजिक आलोचना से परहेज किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज ने वेदों की अचूकता या infallibility को स्वीकार नहीं किया था; इसके विपरीत, उन्होंने तर्क दिया कि कोई भी धार्मिक ग्रंथ या वेद स्वतःप्रमाणित नहीं हैं और मानवीय विवेक को सर्वोपरि माना जाना चाहिए। कथन 2 सही है क्योंकि स्वामी दयानंद सरस्वती ने 'वेदों की ओर लौटो' का आह्वान करते हुए वेदों को ज्ञान का स्रोत माना तथा मूर्तिपूजा, अवतारवाद एवं जन्म आधारित जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया। कथन 3 सही है, थियोसोफिकल सोसाइटी के विचारों को भारत में एनी बेसेंट ने लोकप्रिय बनाया और अडयार को इसका मुख्यालय बनाया। कथन 4 गलत है क्योंकि हेनरी विवियन डेरोज़ियो और उनके 'यंग बंगाल' आंदोलन के अनुयायियों ने रूढ़िवादी हिंदू मान्यताओं, परंपराओं और अंधविश्वासों की अत्यंत तीखी आलोचना की थी, न कि ब्रिटिश नीतियों की प्रशंसा या सामाजिक आलोचना से परहेज। इस संदर्भ में विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), गोलमेज सम्मेलनों और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हिंसात्मक गतिविधियों में लिप्त कैदियों को छोड़कर सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और समुद्र तट के समीप बिना कर के नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी।
2. प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, किंतु द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, जहाँ सांप्रदायिक निर्णय (Communal Award) और पृथक् निर्वाचन के मुद्दे पर उत्पन्न तीव्र मतभेदों के कारण सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
3. डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया था और उन्होंने दलितों के लिए पृथक् निर्वाचन मंडल की मांग पर बल दिया, जिसका गांधी जी ने पूरव में तीव्र विरोध किया और परिणामस्वरूप यरवदा जेल में 'पुणे पैक्ट' पर हस्ताक्षर किए गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, और इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जिस दिन बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन पूरे बंगाल में 'शोकादिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव जुलूस निकाले और रवींद्रनाथ टैगोर के आह्वान पर एक-दूसरे की कलाई पर 'राखी बांधी' जो आपसी भाईचारे का प्रतीक बन गई।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (National Council of Education) की स्थापना 1906 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा को अंग्रेजों के नियंत्रण से मुक्त कर राष्ट्रीय मार्ग पर आगे बढ़ाना था।
4. इस आंदोलन के दौरान उग्रवादी नेताओं के दबाव के कारण कांग्रेस के मंच से पहली बार असहयोग और ब्रिटिश वस्तुओं के पूर्ण बहिष्कार का विस्तार पूरे भारत में करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया था, जिससे नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच कभी मतभेद उत्पन्न नहीं हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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"मुंतखब-उल-लुबाब" के लेखक कौन हैं जिन्होंने औरंगजेब की नीतियों का गुप्त रूप से विवरण लिखा?
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बिहार में 1857 के महान विद्रोह के दौरान वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के सैन्य नेतृत्व, रणनीतिक अभियानों तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाबू कुंवर सिंह ने दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के साथ मिलकर 25 जुलाई 1857 को आरा पर अधिकार कर लिया था, और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अपने अभियानों के दौरान उन्होंने अंग्रेजों को पराजित करते हुए उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और बलिया तक के क्षेत्रों में सफल सैन्य गतिविधियाँ संचालित की थीं।
2. ब्रिटिश सेनापति मेजर विंसेंट आयर के नेतृत्व में आरा को पुनः अंग्रेजों के अधीन करने के पश्चात कुंवर सिंह ने अपनी रणनीति बदलते हुए मध्य भारत और अवध की ओर प्रस्थान किया, तथा नाना साहब की सेना के साथ मिलकर लखनऊ और कानपुर के क्षेत्रों में अंग्रेजों के विरुद्ध निर्णायक लड़ाइयाँ लड़ीं।
3. बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु (26 अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों (रोहतास के जंगलों) से ब्रिटिश सेना के विरुद्ध लंबे समय तक गुरिल्ला (छापामार) युद्ध का सफल संचालन जारी रखा था, और एक समानांतर सरकार स्थापित कर अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था।
4. अमर सिंह को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर अंततः कलकत्ता की जेल में सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था, जिससे बिहार में 1857 का यह सशस्त्र प्रतिरोध पूरी तरह समाप्त हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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