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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की अर्थव्यवस्था, व्यापार और उसकी विशिष्ट शिल्प तकनीकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस सभ्यता के लोग धातु कर्म (Metallurgy) में अत्यंत कुशल थे और उन्होंने तांबे तथा टिन को मिलाकर काँसे (Bronze) के निर्माण की तकनीक विकसित कर ली थी, जिसके प्रमाण न केवल नर्तकी की कांस्य मूर्ति बल्कि बड़े पैमाने पर बनाए गए अस्त्र-शस्त्रों और कृषि उपकरणों से भी मिलते हैं।
  2. 2. लोथल और चान्हूदो जैसे स्थलों से मनके (Beads) बनाने के कारखानों के अवशेष मिले हैं, जहाँ अकीक (Carnelian), जैस्पर, शंख और पन्ना जैसे कीमती पत्थरों से आभूषण तैयार किए जाते थे, जो मेसोपोटामिया के साथ होने वाले विदेशी व्यापार का एक प्रमुख हिस्सा थे।
  3. 3. सिंधु घाटी सभ्यता के मोहरों पर जहाजों और नौकाओं का अंकन इस बात का प्रमाण है कि इस सभ्यता के व्यापारियों का समुद्री व्यापार नेटवर्क काफी विकसित था, और लोथल का 'गोदीवाड़ा' (Dockyard) इस विदेशी व्यापार के संचालन का मुख्य नौवहन केंद्र था।
  4. 4. इस सभ्यता के लोग बाट और माप की एक उन्नत एवं मानकीकृत प्रणाली से परिचित थे, जिसमें द्विआधारी (Binary) और दशमलव (Decimal) दोनों प्रणालियों का मिश्रण तथा वजन के लिए सामान्यतः चर्ट (Chert) पत्थर से बने घनाकार (Cubical) बाटों का प्रयोग किया जाता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग काँसे के निर्माण और उपयोग से परिचित थे (जैसे नर्तकी की मूर्ति), किंतु उन्होंने अपने कृषि उपकरणों और रक्षात्मक हथियारों के लिए बड़े पैमाने पर लोहे या भारी मात्रा में कांस्य उपकरणों का प्रयोग नहीं किया था क्योंकि वे लोहे की तकनीक से पूर्णतः अपरिचित थे, और कांस्य मुख्य रूप से बहुमूल्य कलाकृतियों या विशिष्ट वस्तुओं तक सीमित था। इसके विपरीत, कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं; लोथल और चान्हूदो मनके बनाने के प्रसिद्ध केंद्र थे, लोथल में एक विशाल गोदीवाड़ा (Dockyard) मिला है जो समुद्री व्यापार का प्रतीक है, और यहाँ मानकीकृत चर्ट पत्थरों से बने घनाकार बाटों का उपयोग होता था। सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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