BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
20 views

मराठा साम्राज्य के प्रशासन, राजस्व व्यवस्था तथा शिवाजी के सैन्य संगठन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. शिवाजी के केंद्रीय प्रशासन में 'अष्टप्रधान' नामक मंत्रिपरिषद् थी, जिसमें प्रत्येक मंत्री राजा के अधीन सीधे कार्य करता था और इनमें से 'पंडितराव' धार्मिक मामलों, दान और शिष्टाचार का प्रमुख अधिकारी होने के साथ-साथ सेना का सर्वोच्च सेनापति भी होता था।
  2. 2. शिवाजी ने मलिक अंबर की राजस्व व्यवस्था के आधार पर अपनी भू-राजस्व प्रणाली को पुनर्गठित किया, जिसके तहत भूमि की पैमाइश कराकर कुल उपज का शुरुआती हिस्सा निर्धारित किया गया तथा बाद में अन्न के रूप में कर लेने की प्रथा को समाप्त कर पूरी तरह से नकद भुगतान अनिवार्य कर दिया गया।
  3. 3. चौथ और सरदेशमुखी मराठा साम्राज्य की आय के प्रमुख अतिरिक्त स्रोत थे; 'चौथ' पड़ोसी मुगल क्षेत्रों या स्वराज से बाहर के राज्यों से सुरक्षा के बदले वसूला जाने वाला कर था जो कुल राजस्व का 25 प्रतिशत होता था, जबकि 'सरदेशमुखी' शिवाजी द्वारा अपने पैतृक अधिकारों के दावे के रूप में वसूला जाने वाला अतिरिक्त 10 प्रतिशत कर था।
  4. 4. शिवाजी की सैन्य व्यवस्था में नियमित सैनिकों (पागा) और अस्थायी घुड़सवारों (बरगीर) के साथ-साथ पैदल सेना में 'मावले' सैनिकों को विशेष महत्व दिया गया, जो पश्चिमी घाट की कठिन पहाड़ियों और दुर्ग युद्ध कला (गोरिल्ला युद्ध) में अत्यधिक कुशल थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 'अष्टप्रधान' में 'पंडितराव' धार्मिक मामलों, दान और धार्मिक शुचिता का कार्य देखता था, किंतु सेना का सर्वोच्च सेनापति पंडितराव नहीं बल्कि 'सर-ए-नौबत' (सेनापति) होता था। कथन 2 असत्य है क्योंकि शिवाजी ने अन्न के रूप में कर लेने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त नहीं किया था, बल्कि किसानों को यह छूट थी कि वे नकद या अनाज दोनों रूपों में लगान चुका सकते थे। कथन 3 और 4 बिल्कुल सत्य हैं; चौथ (25%) और सरदेशमुखी (10%) मराठा साम्राज्य की आय के प्रमुख बाह्य स्रोत थे और मावले सैनिक शिवाजी की गोरिल्ला युद्धनीति के आधार स्तंभ थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही सैनिकों द्वारा मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने और इस संघर्ष में उनकी भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 11 मई 1857 को मेरठ से पहुँचे विद्रोही सिपाहियों ने लाल किले में प्रवेश कर वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, इस विद्रोह का औपचारिक और सर्वोच्च प्रतीक तथा 'शहिंशाह-ए-हिंदुस्तान' स्वीकार कर लिया था। 2. यद्यपि बहादुर शाह जफर ने इस पद को स्वीकार करने में प्रारंभिक हिचकिचाहट दिखाई थी, किंतु सम्राट के रूप में उन्होंने विद्रोही सैनिकों के वित्त पोषण, प्रशासनिक समन्वय और युद्ध की दीर्घकालिक सैन्य रणनीतियों का अत्यंत दृढ़ता से कुशल नेतृत्व किया था। 3. दिल्ली में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सैन्य कमांडर जॉन निकलसन के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने कड़ा संघर्ष किया, और सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के पश्चात बहादुर शाह जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया गया था। 4. अंग्रेजों द्वारा हुमायूं के मकबरे के पास ही बहादुर शाह जफर के दो बेटों (मिर्जा मुगल और मिर्जा खिजर सुल्तान) तथा पोते की निर्ममतापूर्वक हत्या कर उनके सिर काटकर सम्राट के सामने प्रेषित किए गए थे, और बाद में जफर को देश से निर्वासित कर रंगून भेज दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक ढांचा, विशेषकर सैन्य और राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य में घोड़ों को दागने की प्रथा ('दाग') और सैनिकों के हुलिया का पंजीकरण कराने की शुरुआत की थी, ताकि भ्रष्टाचार को रोका जा सके और बाजार नियंत्रण के लिए उसने 'उत्पादित वस्तुओं और अनाजों के मूल्य' को विनियमित करने हेतु 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' जैसे नवीन विभागों का गठन किया था। 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि विकास के लिए 'दीवान-ए-कोहकी' (कृषि विभाग) नामक एक पृथक् विभाग की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना और किसानों को तकाबी (सांकेतिक ऋण) प्रदान करना था, किंतु प्रशासनिक अदूरदर्शिता के कारण यह योजना विफल हो गई। 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नकद वेतन देने की परंपरा को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया और इसके स्थान पर वंशानुगत 'इक्ता' प्रणाली तथा जागीरदारी व्यवस्था को पुनर्जीवित किया, साथ ही उसने सिंचाई के लिए बड़ी संख्या में नहरों का निर्माण करवाकर 'हक-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) नामक कर लगाया। 4. इल्तुतमिश द्वारा स्थापित 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीस गुलाम सरदारों का दल) को सुदृढ़ करने का कार्य बलबन ने किया था, जिसने बाद में राजत्व के सिद्धांत (नयाब-ए-खुदाई और जिल्ल-ए-इलाही) को लागू कर संपूर्ण सल्तनत में इस चालीसा दल के राजनीतिक प्रभाव को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अरूणा आसफ अली ने बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था, और बाद में उषा मेहता ने भूमिगत रहकर 'कांग्रेस रेडियो' का संचालन किया था। 2. सुभाष चंद्र बोस ने 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना के पश्चात ब्रिटिश नज़रबंदी से बचकर जर्मनी की यात्रा की थी, जहाँ उन्होंने बर्लिन रेडियो से भारतीय स्वतंत्रता के पक्ष में प्रसारण किया और 'इंडियन लीग' की स्थापना की थी। 3. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा आज़ाद हिंद फौज का पुनर्गठन करने के पश्चात, सुभाष चंद्र बोस ने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में ही 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की औपचारिक घोषणा की थी, जिसे धुरी राष्ट्रों द्वारा मान्यता दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → रूसी यात्री "अथानासियस निकितिन" ने किस बहमनी शासक के समय भारत की यात्रा की थी? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के संचालन तथा बाद में ब्रिटिश सेना द्वारा इन केंद्रों के दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदउल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'फैजाबाद का ढंका' भी कहा जाता है, और ब्रिटिश जनरल कैंपबेल ने भारी संघर्ष के बाद इस क्षेत्र में विद्रोह का दमन किया था। 2. रोहिलखंड की राजधानी बरेली में खान बहादुर खान ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व संभाला था, जहाँ उन्होंने स्वयं को नवाब घोषित कर प्रशासनिक व्यवस्था चलाई थी, किंतु अंततः ब्रिटिश सेना ने कमिश्नर कैंपबेल और ट्रीवेलियन के सहयोग से बरेली पर पुनः अधिकार कर लिया। 3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जिन्होंने स्थानीय नागरिकों और सैनिकों का संगठन कर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी थी, किंतु जनरल नील ने अत्यंत क्रूरता के साथ इलाहाबाद में इस विद्रोह को कुचल दिया था। 4. बरेली में विद्रोह के दमन के पश्चात खान बहादुर खान को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई, जबकि मौलवी लियाकत अली अंग्रेजों की पकड़ से बचकर नेपाल भागने में सफल रहे और वहीं उनकी मृत्यु हो गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.