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History of India
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में 'दीवान-ए-मुश्खराज' (Diwan-i-Muskhraj) और 'दीवान-ए-कोही' (Diwan-i-Kohi) विभागों की स्थापना क्रमशः किन सुल्तानों द्वारा की गई थी और उनका मुख्य उद्देश्य क्या था?
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Detailed Explanation
दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक इतिहास में अलाउद्दीन खिलजी ने राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार को समाप्त करने और बकाये करों की वसूली के लिए 'दीवान-ए-मुश्खराज' (बकाया कर विभाग) की स्थापना की थी। इसके विपरीत, मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कृषि सुधारों और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के उद्देश्य से एक पृथक कृषि विभाग 'दीवान-ए-कोही' की स्थापना की थी। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बेस मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' (Enfield Rifle) को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी आक्रोश पैदा किया।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश का विरोध करते हुए अपने अंग्रेजी अधिकारियों पर आक्रमण कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई।
3. चर्बी वाले कारतूसों की घटना के बाद मेरठ छावनी के सैनिकों ने 10 मई 1857 को विद्रोह का बिगुल बजाया, जहाँ उन्होंने एनफील्ड राइफल्स के प्रयोग से पूर्णतः इंकार करते हुए यूरोपीय अधिकारियों को बंधक बना लिया और दिल्ली की ओर कूच किया।
4. मंगल पांडे द्वारा विद्रोह की शुरुआत करने के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सैनिकों के आक्रोश को शांत करने के लिए सेना से एनफील्ड राइफल्स को पूरी तरह वापस ले लिया था और पुरानी ब्राउन बेस बंदूकों को बहाल कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य अभियानों तथा कला एवं स्थापत्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल में उत्तर भारत की राजनीतिक एकता स्थापित होने के साथ-साथ कन्नौज को उसकी नई राजधानी बनाया गया था, जहाँ चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में आयोजित 'महामोक्ष परिषद' के दौरान सभी धर्मों और संप्रदायों के विद्वानों को आमंत्रित किया गया था।
2. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम ने चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को निर्णायक रूप से पराजित किया था और वातापी (बादामी) पर अधिकार करने के बाद 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी, जबकि इसी वंश के राजसिंह (नरसिंहवर्मन द्वितीय) ने महाबलीपुरम के प्रसिद्ध 'शोर मंदिर' (Shore Temple) का निर्माण करवाया था।
3. बादामी के चालुक्य राजवंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय की नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन पर विजय का विस्तृत और प्रामाणिक विवरण हमें महाकवि रविचर्ति द्वारा रचित 'एहोल प्रशस्ति' (शिलालेख) से प्राप्त होता है।
4. चोल साम्राज्य की स्थानीय स्वशासन प्रणाली और ग्रामीण प्रशासन के संबंध में हमें प्रसिद्ध 'उत्तरामेरूर अभिलेख' से विस्तृत जानकारी मिलती है, जिसके अनुसार ग्राम सभाओं (सभा या महासभा) के सदस्यों के चयन के लिए एक जटिल 'कुरावोलाई' (लॉटरी या पर्ची पद्धति) का उपयोग किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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तुगलक काल में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांस्कृतिक समन्वय का सबसे बड़ा उदाहरण क्या था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुए संघर्ष और उनके दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था, जिन्हें ब्रिटिश सेनापति कॉलिन कैंपबेल और थॉमस रीने द्वारा पराजित किया गया था।
2. बरेली में रोहेलखंड के भूतपूर्व नवाब के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह की कमान संभाली थी, किंतु अंततः ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने इस विद्रोह का क्रूरता से दमन कर दिया।
3. इलाहाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, और इस महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील ने अत्यधिक दमनकारी नीतियां अपनाई थीं।
4. फैजाबाद के विद्रोही नेता मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों ने युद्ध के मैदान में ही मार गिराया था, जबकि खान बहादुर खान और लियाकत अली को ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार करके बाद में फांसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक स्वरूप के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों के निम्नलिखित मतों/कथनों पर विचार कीजिए:
1. सर जॉन सीले (Sir John Seeley) ने वर्ष 1857 के विद्रोह को 'पूरी तरह से देशभक्तिहीन और स्वार्थी सिपाही विद्रोह' करार दिया था, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्वतंत्रता प्राप्त करना नहीं था।
2. डॉ. ई. डब्लू.आर. रीस (E.W.R. Rees) के अनुसार यह विद्रोह 'धर्मांधों का ईसाइयों के विरुद्ध एक धर्मयुद्ध' (A war of fanaticism against Christians) था।
3. वी.डी. सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध कृति में इस घटना को 'प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' के रूप में चित्रित किया, जबकि अशोक मेहता ने इसे 'राष्ट्रीय विद्रोह' की संज्ञा दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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