BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
5 views

सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण (1932-34) और गांधी-इरविन समझौते के बाद की राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गांधी-इरविन समझौते के तहत कांग्रेस ने केवल सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित किया था, न कि इसे पूर्णतः समाप्त किया था, और जब सरकार ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया तथा दमनकारी अध्यादेश जारी रखे, तो गांधीजी के भारत लौटते ही जनवरी 1932 में आंदोलन का दूसरा चरण पुनः आरंभ कर दिया गया था।
  2. 2. वर्ष 1932 के दूसरे सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार ने अत्यधिक दमनकारी रुख अपनाते हुए कांग्रेस को एक गैर-कानूनी संगठन घोषित कर दिया था, इसके सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था और इस बार आंदोलन में जनता की भागीदारी पहले चरण की तुलना में नगण्य रही थी।
  3. 3. लंडन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन की विफलता के बाद जब महात्मा गांधी ने भारत आकर आंदोलन फिर से शुरू किया, तब ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) की घोषणा की, जिसके विरोध में गांधीजी ने पुणे की यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू किया था।
  4. 4. सांप्रदायिक पंचाट के विरोध में हुए अनशन के परिणामस्वरूप महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसे 'पूना पैक्ट' कहा जाता है, जिसके तहत दलितों के लिए पृथक निर्वाचिका की मांग को स्वीकार कर लिया गया और प्रांतीय विधानसभाओं में उनकी सीटें बढ़ा दी गईं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि गांधी-इरविन समझौते के तहत सविनय अवज्ञा आंदोलन को केवल स्थगित किया गया था और कराची अधिवेशन में इसका अनुमोदन हुआ था, किंतु वायसराय विलिंगडन के दमनकारी रवैये के कारण जनवरी 1932 में यह पुनः शुरू हो गया। कथन 2 गलत है क्योंकि दूसरे चरण के आंदोलन में भी जनता ने भारी संख्या में भाग लिया था, विशेषकर महिलाओं, व्यापारियों और किसानों की भागीदारी उल्लेखनीय थी। कथन 3 सही है; द्वितीय गोलमेज सम्मेलन की असफलता और भारत लौटने पर आंदोलन के पुनरुद्धार के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने सांप्रदायिक पंचाट की घोषणा की जिसके विरोध में गांधीजी ने यरवदा जेल में अनशन किया। कथन 4 गलत है क्योंकि पूना पैक्ट के तहत दलितों के लिए 'पृथक निर्वाचिका' (Separate Electorates) के विचार को त्याग दिया गया था और इसके स्थान पर प्रांतीय व केंद्रीय विधानसभाओं में उनके लिए 'संयुक्त निर्वाचन के अंतर्गत सुरक्षित सीटें' (Reserved Seats) का प्रावधान किया गया था। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा सर्वप्रथम जुलाई 1905 में की गई थी तथा लॉर्ड कर्जन ने प्रशासनिक सुविधा को इसका मुख्य आधार बताया था, किंतु इसका वास्तविक उद्देश्य बंगाल में उभर रही राष्ट्रवादी चेतना को कमजोर करना और सांप्रदायिक आधार पर राजनीतिक विभाजन पैदा करना था। 2. 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई और प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' (Boycott Resolution) पारित किया गया। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के प्रसिद्ध गीतकार और कवि मुकुंद दास ने 'अमार सोनार बांग्ला' गीत की रचना की थी, जिसे बाद में स्वतंत्र बांग्लादेश ने अपना राष्ट्रीय गान बनाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 3 जून 1947 को प्रस्तुत 'माउंटबेटन योजना' के अंतर्गत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों की अलग बैठक बुलाए जाने का प्रावधान किया गया था, ताकि वे विभाजन के पक्ष या विपक्ष में निर्णय ले सकें। 2. ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' को बिना किसी संशोधन के अत्यंत त्वरित गति से पारित किया गया, जिसके तहत 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन के सृजन तथा उनके बीच ब्रिटिश भारत की संपत्ति और परिसंपत्तियों के विभाजन के लिए 'विभाजन परिषद' (Partition Council) के गठन का प्रावधान किया गया था। 3. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) का आयोजन किया गया था, जिसमें खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व वाले 'खुदाई खिदमतगार' संगठन ने भारत में शामिल होने के पक्ष में भारी मतदान किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा झाँसी के किले की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत वीरता से संघर्ष किया और अपने सुसज्जित संरक्षकों व टोपे की सहायता से झाँसी बचाने में सफल रहीं, जिसके बाद उन्होंने कालपी की ओर प्रस्थान किया। 2. झाँसी के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने कालपी में सैन्य शक्ति संगठित की और ग्वालियर के सिंधिया शासक को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहब को पेशवा घोषित किया गया था। 3. ग्वालियर के पतन के अंतिम निर्णायक युद्ध (मुरार या कोटा-की-सराय का युद्ध) में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे बच निकलने में सफल रहे और बाद में एक स्थानीय जमींदार के विश्वासघात के कारण पकड़े गए तथा उन्हें शिवपुरी में फांसी दे दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? औरंगजेब ने किस वर्ष "झरोखा दर्शन" और "तुलादान" की प्रथाओं को समाप्त कर दिया था? मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चिश्ती संप्रदाय के संतों ने सुल्तानों और शासकों द्वारा दिए जाने वाले राजकीय अनुदानों (मदद-ए-माश) और जागीरों को स्वीकार करने से स्पष्ट इंकार कर दिया था, तथा वे सादा जीवन व्यतीत करते हुए 'समां' (संगीत गोष्ठियों) को ईश्वर प्राप्ति का माध्यम मानते थे। 2. वारकरी संप्रदाय (जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र में फला-फूला) ने कर्मकांड, संस्कृत भाषा की अनिवार्यता और जटिल अनुष्ठानों का विरोध करते हुए मराठी भाषा में भक्ति पदों (अभंगों) के माध्यम से लोक-कल्याण का संदेश दिया, और इस संप्रदाय के प्रमुख संतों में ज्ञानेश्वर, नामदेव और तुकाराम शामिल थे। 3. विशिष्टाद्वैतवाद के प्रवर्तक आचार्य रामानुजाचार्य ने यह प्रतिपादित किया कि जीव और ब्रह्म में कोई भेद नहीं है तथा जगत पूरी तरह से एक मिथ्या (माया) है, जिसके कारण मोक्ष की प्राप्ति केवल और केवल ज्ञान मार्ग (ज्ञान योग) के माध्यम से ही संभव है। 4. उत्तर भारत में रामभक्ति शाखा के प्रमुख संत तुलसीदास ने अकबर के समकालीन होते हुए भी उसके दरबार से कोई प्रत्यक्ष संबंध या राजकीय सहायता स्वीकार नहीं की, तथा उन्होंने 'रामचरितमानस' की रचना अवधी भाषा में करके साधारण जनमानस तक धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों को पहुँचाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.