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History of India
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मुगल सम्राट अकबर की प्रशासनिक, धार्मिक और भू-राजस्व नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अकबर ने अपने शासनकाल के 24वें वर्ष (1580 ई.) में राजा टोडरमल के सहयोग से 'दहसाला' (आइन-ए-दहसाला) व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू किया, जिसके अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और उनके औसत बाजार मूल्यों के आधार पर मालगुजारी का स्थायी निर्धारण किया गया था।
- 2. मनसबदारी व्यवस्था में 'जात' और 'सवार' पदों का वर्गीकरण अकबर द्वारा ही आरंभ किया गया था, जहाँ 'जात' पद मनसबदार की व्यक्तिगत स्थिति और वेतन का सूचक था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों और सैनिकों की संख्या को निर्धारित करता था।
- 3. अकबर ने वर्ष 1575 में फतेहपुर सीकरी में 'इबादतखाना' की स्थापना की थी, जिसकी शुरुआत में केवल सुन्नी उलेमाओं को ही प्रवेश की अनुमति थी, किंतु बाद में 1578 में इसे सभी धर्मों—जैसे हिन्दू, जैन, ईसाई, पारसी और शिया—के विद्वानों के लिए खोल दिया गया।
- 4. वर्ष 1582 में अकबर द्वारा प्रतिपादित 'तौहीद-ए-इलाही' (जिसे बाद में बदायूंनी आदि इतिहासकारों ने दीन-ए-इलाही कहा) एक नया धर्म था, जिसका अनिवार्य रूप से पालन करना प्रत्येक मुगल अधिकारी और मनसबदार के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं क्योंकि अकबर के काल में राजा टोडरमल द्वारा विकसित दहसाला व्यवस्था भू-राजस्व का एक वैज्ञानिक तरीका था, मनसबदारी में जात और सवार प्रणाली की शुरुआत हुई, और 1578 में इबादतखाना सभी धर्मों के लिए खोल दिया गया था। कथन 4 गलत है क्योंकि 'तौहीद-ए-इलाही' कोई नया धर्म नहीं था और इसे किसी पर भी जबरन थोपा नहीं गया था, यह केवल अकबर के प्रति निष्ठा रखने वाले चुनिंदा शिष्यों का एक आध्यात्मिक समूह था। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां द्वारा किए गए नेतृत्व और सैन्य संचालन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए नाना साहब ने स्वयं को पेशवा बाजीराव द्वितीय का दत्तक पुत्र घोषित किया और ब्रिटिश सत्ता को समाप्त कर पेशवा के अधीन मराठा शासन को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और रणनीतिकार थे, ने विद्रोह के दौरान कूटनीतिक संपर्कों को मजबूत करने के लिए लंदन की यात्रा की थी और बाद में कानपुर के संघर्ष में अंग्रेजों के विरुद्ध महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. तात्या टोपे ने कानपुर की पराजय के बाद ग्वालियर में सिंधिया की सेना को अपने पक्ष में मिलाया और रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर केंद्रीय भारत में ब्रिटिश सेनापति जनरल ह्यूरोज़ के विरुद्ध अत्यंत प्रभावी सैन्य अभियानों का संचालन किया।
4. कानपुर में ब्रिटिश सेना के समर्पण के पश्चात घटी 'सतीचौरा घाट कांड' की घटना के तुरंत बाद नाना साहब ने अंग्रेजों के साथ स्थायी संधि कर ली और उन्हें सुरक्षित इलाहाबाद भेजने की व्यवस्था की, जिसके बाद वे कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई (मुंबई) के ग्वालिया टैंक मैदान में ऐतिहासिक भाषण देने और कांग्रेस का झंडा फहराने वाली प्रमुख समाजवादी नेत्री अरुणा आसफ अली थीं, जिन्हें बाद में भूमिगत रहकर आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए भी जाना जाता है।
2. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में कलकत्ता से गुप्त रूप से देश छोड़ने के पश्चात 'ग्रेट ब्रिटेन' नामक छद्म नाम से सोवियत संघ की यात्रा की थी, क्योंकि वे सोवियत संघ को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध सबसे बड़ा स्वाभाविक सहयोगी मानते थे।
3. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आज़ाद हिंद फौज का औपचारिक नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस को सौंपे जाने के पश्चात, आईएनए के अंतर्गत 'सुभाष ब्रिगेड', 'जवाहर ब्रिगेड' और महिलाओं की एक रेजिमेंट के रूप में 'झाँसी की रानी रेजिमेंट' का गठन किया गया था, जिसका नेतृत्व लक्ष्मी सहगल ने किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की कला, वास्तुकला और प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने महाबलीपुरम (मामल्लापुरम) में एक ही विशाल चट्टान को काटकर प्रसिद्ध रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण करवाया था, जबकि मामल्लपुरम शहर की स्थापना भी उसी ने की थी।
2. बादामी के चालुक्य वंश के सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने एहोले के लाड़ खां मंदिर और जैन मंदिर का निर्माण करवाया था, और चालुक्यों की यह वास्तुकला शैली नागर और वेसर शैलियों का सम्मिश्रण मानी जाती है।
3. चोल सम्राट राजराज प्रथम ने तंजावुर में प्रसिद्ध 'राजराजेश्वर' या 'बृहदेश्वर मंदिर' का निर्माण ग्रेनाइट पत्थर से करवाया था, जो द्रविण वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति है और इसके शिखर पर स्थित विशाल कुंभ एक ही पत्थर के खंड से निर्मित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने मुगलों के विरुद्ध किस सैन्य संगठन की स्थापना की थी?
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) तथा सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुणा आसफ अली ने भूमिगत रहकर आंदोलन का संचालन किया था, जबकि उषा मेहता ने गुप्त रूप से 'कांग्रेस रेडियो' (Congress Radio) का प्रसारण कर ब्रिटिश दमन की खबरों को देश-विदेश तक पहुँचाया था।
2. सुभाष चंद्र बोस ने 1941 में 'ग्रेट एस्केप' के तहत ब्रिटिश नजरबंदी से निकलकर पेशावर और काबुल के रास्ते जर्मनी पहुँचे, जहाँ उन्होंने बर्लिन रेडियो से भारतीय स्वतंत्रता के पक्ष में प्रसारण किया और 'फ्री इंडिया लीजन' (Free India Legion) की स्थापना की।
3. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा स्थापित 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आजाद हिंद फौज' की कमान जब अक्टूबर 1943 में सुभाष चंद्र बोस को सौंपी गई, तो उन्होंने सिंगापुर में ही 'अस्थायी आजाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की, जिसे कुल नौ देशों की सरकारों ने मान्यता दी थी।
4. आजाद हिंद फौज के सैनिकों ने जापानी सेना के सहयोग से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर अधिकार कर लिया था, जिनका नाम बदलकर क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा गया था, तथा मार्च 1944 में INA के सैनिकों ने मणिपुर के मोइरांग क्षेत्र में पहली बार भारतीय भूमि पर तिरंगा झंडा फहराया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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