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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत आने वाला प्रथम पुर्तगाली यात्री वास्को डी गामा मई 1498 में कालीकट पहुँचा था, जहाँ स्थानीय शासक ज़ुमोरीन (सामुतिरि) ने उसका स्वागत किया था, जबकि इस समुद्री मार्ग की खोज में अरब व्यापारियों ने पुर्तगालियों का भरपूर सहयोग किया था क्योंकि वे हिंद महासागर के व्यापार में अपनी एकाधिकार को और मजबूत करना चाहते थे।
- 2. फ्रांसिस्को डी अल्मीडा भारत का प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीला पानी नीति) का अनुसरण किया, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर को पुर्तगाली झील में बदलना और अरबों एवं वेनेशियन व्यापारियों के व्यापारिक एकाधिकार को तोड़ना था।
- 3. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के सुल्तान यूसुफ आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में लिया और पुर्तगालियों को स्थानीय भारतीय महिलाओं से विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया।
- 4. नुनिओ दा कुन्हा ने 1530 में पुर्तगालियों की राजधानी को कोचिन से बदलकर गोवा स्थानांतरित किया, तथा उसने हुगली और बेसिन के क्षेत्रों में पुर्तगाली प्रभाव को विस्तार दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि जब वास्को डी गामा कालीकट पहुँचा, तो स्थानीय शासक ज़ुमोरीन ने उसका स्वागत किया था, किंतु **अरब व्यापारियों** ने पुर्तगालियों के आने का तीव्र विरोध किया था क्योंकि वे हिंद महासागर के व्यापार पर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते थे। कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। अल्मीडा ने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' लागू की, अल्बुकर्क ने गोवा पर अधिकार किया और पुर्तगाली साम्राज्य को सुदृढ़ किया, तथा नुनिओ दा कुन्हा ने 1530 में राजधानी कोचिन से गोवा स्थानांतरित की। इस कालखंड की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना के तहत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों में यह व्यवस्था की गई थी कि दोनों प्रांतों के हिन्दू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्य अलग-अलग बैठक करके यह निर्णय लेंगे कि प्रांत का विभाजन किया जाए या नहीं।
2. उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Plebiscite) का प्रावधान किया गया था।
3. योजना के अंतर्गत भारत और पाकिस्तान के बीच शक्तियों के हस्तांतरण तथा सीमाओं के निर्धारण के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग सीमा आयोगों का गठन किया गया था, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से पहले ही अपनी सीमा निर्धारण रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी थी।
4. ब्रिटिश संसद में पारित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत को दो स्वतंत्र डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित कर दिया गया तथा ब्रिटिश राजमुकुट का भारतीय रियाسतों पर सर्वोच्च अधिकार (Paramountcy) तुरंत समाप्त कर दिया गया, जिससे रियासतों को यह छूट मिल गई कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों अथवा स्वतंत्र रहें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ब्रिटिश भारत में प्रवर्तित विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — तथा उनके प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 ई. में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्थाई स्वामी बना दिया गया और राज्य की मांग को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया, जिससे किसानों की कानूनी स्थिति मात्र पारंपरिक किराएदार या बटाईदार जैसी बनकर रह गई।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास तथा बंबई प्रेसीडेंसी के कुछ क्षेत्रों में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता हुआ, जिसमें बीच के बिचौलियों को समाप्त कर दिया गया और किसानों को भूमि का पूर्ण तथा हस्तांतरणीय मालिकाना हक प्रदान किया गया।
3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू की गई 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व के निर्धारण की इकाई व्यक्तिगत किसान को न बनाकर पूरे गाँव या 'महाल' (गाँव का समूह) को बनाया गया था, जिसमें संपूर्ण ग्राम समुदाय सामूहिक रूप से राजस्व भुगतान के लिए उत्तरदायी होता था।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का एक समान और दीर्घकालिक सकारात्मक परिणाम यह हुआ कि ब्रिटिश काल में भारतीय कृषि का अभूतपूर्व आधुनिकीकरण हुआ और किसानों की क्रय शक्ति में भारी वृद्धि दर्ज की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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किस पेशवा की हत्या उसके चाचा रघुनाथराव (राघोबा) के षड्यंत्र द्वारा 1773 ई. में कर दी गई थी?
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अकबर की मृत्यु 1605 ई. में किस बीमारी के कारण हुई थी?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला था, क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने उनकी पैतृक पेंशन और उपाधि को बंद कर दिया था तथा उन्हें बिठूर से कानपुर आने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
2. तात्या टोपे (रामचंद्र पांडुरंग टोपे) नाना साहब के अत्यंत योग्य और वफादार सैन्य कमांडर थे, जिन्होंने कानपुर के पतन के बाद ग्वालियर में सिंधिया सेना को अपने पक्ष में मिला लिया था और बाद में अंग्रेजों के खिलाफ लंबे समय तक सफल छापामार युद्ध का संचालन किया था।
3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और राजनीतिक दूत थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर पेशवा की पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तुर्की और क्रीमिया का दौरा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश साम्राज्य विरोधी ताकतों से संपर्क साधने का प्रयास किया था।
4. कानपुर में ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरता के साथ विद्रोह को कुचला था, जिसके दौरान 'सती चौरा घाट' की घटना घटी थी, और अंततः नाना साहब ब्रिटिश सेना को परास्त कर सुरक्षित रूप से यूरोप चले गए थे, जहाँ उनकी प्राकृतिक मृत्यु हुई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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