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History of India
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण, गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान द्वारा गठित 'खुदाई खिदमतगार' आंदोलन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और इसी दौरान पेशावर में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से गढ़वाल रेजिमेंट के सैनिकों ने इनकार कर दिया था।
  2. 2. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने सभी प्रकार के राजनीतिक बंदियों को तत्काल रिहा करने की सहमति दी थी, तथा हिंसा के आरोपियों सहित जिन लोगों पर गंभीर अपराध के मुकदमे थे, उनकी भी पूर्ण रिहाई का प्रावधान इसमें शामिल था।
  3. 3. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया था, किंतु वहाँ सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के विवाद और मुख्य संवैधानिक मुद्दों पर गतिरोध उत्पन्न होने के कारण यह सम्मेलन असफल साबित हुआ।
  4. 4. कराची कांग्रेस अधिवेशन (मार्च 1931), जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, में गांधी-इरविन समझौते को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की गई तथा इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' का प्रस्ताव पारित किया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती दल) ने उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और पेशावर में गढ़वाल रेजिमेंट के सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से मना कर दिया था। कथन 2 गलत है क्योंकि गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार ने हिंसात्मक अपराधों में लिفت राजनीतिक बंदियों को रिहा करने से इनकार कर दिया था, केवल उन राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की सहमति दी थी जिन पर हिंसा का आरोप नहीं था। कथन 3 सही है, द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में गांधीजी ने भाग लिया था जो सांप्रदायिक मुद्दों के कारण असफल रहा। कथन 4 भी सही है, कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते की पुष्टि हुई और मौलिक अधिकारों का प्रस्ताव पास हुआ। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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