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History of India
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उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा उनके संस्थापकों के वैचारिक और संगठनात्मक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध करते हुए उपनिषदों के एकेश्वरवाद पर बल दिया, किंतु उन्होंने ईसाई धर्म के त्रित्व (Trinity) सिद्धांत को स्वीकार न करते हुए 'द प्रीसेप्ट्स ऑफ जीसस' में केवल ईसा मसीह के नैतिक और दार्शनिक उपदेशों की प्रशंसा की थी।
- 2. स्वामी विवेकानंद ने 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक मुक्ति प्राप्त करना था, और इस संस्था ने वेदान्त दर्शन के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ समाज सुधार, शिक्षा विस्तार और राहत कार्यों जैसे व्यावहारिक कार्यों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
- 3. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों (अस्पृश्य जातियों) को ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंडों और शोषणकारी सामाजिक व्यवस्था से मुक्त कराना तथा उन्हें आत्मसम्मान प्रदान करना था।
- 4. एनी बेसेंट ने थियोसोफिकल सोसाइटी के भारतीय मुख्यालय की स्थापना अड्यार (मद्रास) में की थी, और उन्होंने प्राचीन हिंदू धर्म के पुनरुत्थान के साथ-साथ बाल विवाह, जाति भेद जैसी सामाजिक कुप्रथाओं का समर्थन करते हुए भारतीय राजनीति में 'होम रूल लीग' आंदोलन का नेतृत्व किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि राजा राममोहन राय ने उपनिषदों के एकेश्वरवाद पर बल दिया और 'द प्रीसेप्ट्स ऑफ जीसस' में ईसा मसीह के नैतिक उपदेशों की सराहना की थी। कथन 2 गलत है क्योंकि रामकृष्ण मिशन का उद्देश्य केवल धार्मिक मुक्ति नहीं, बल्कि व्यावहारिक वेदांत और मानव सेवा (शिक्षा, चिकित्सा, राहत कार्य) था। कथन 3 सही है, महात्मा ज्योतिराव फुले ने 1873 में शूद्रों और अतिशूद्रों के अधिकारों के लिए 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की थी। कथन 4 गलत है क्योंकि एनी बेसेंट ने सामाजिक कुप्रथाओं (जैसे बाल विवाह और जाति भेद) का कड़ा विरोध किया था, समर्थन नहीं। इस आंदोलन से जुड़े विस्तृत विवरण के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
Related Questions
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता की लिपि मुख्य रूप से चित्रात्मक (Pictographic) थी, जो दाईं से बाईं ओर (Boustrophedon शैली) लिखी जाती थी, और इस लिपि को अब तक पूरी तरह से पढ़ा (Decipher) जा चुका है।
2. लोथल में खोजा गया 'गोदीवाडा' (Dockyard) एक कृत्रिम ईंटों से बना विशाल ढांचा था, जो समुद्री व्यापार और जलपोतों के आवागमन के लिए उपयोग किया जाता था।
3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'नर्तकी की कांस्य मूर्ति' (Dancing Girl) 'लुप्त मोम तकनीक' (Lost-wax casting process) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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ऋग्वैदिक काल एवं उत्तर वैदिक काल की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'सभा' और 'समिति' नामक संस्थाएँ अत्यधिक शक्तिशाली थीं, जो राजा की निरंकुशता पर नियंत्रण रखती थीं, और इन दोनों संस्थाओं में महिलाओं (जैसे 'सभाती' और 'इशा') की सक्रिय भागीदारी का उल्लेख मिलता है, जबकि उत्तर वैदिक काल में आते-आते इन संस्थाओं का राजनीतिक प्रभाव क्षीण होने लगा और महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
2. ऋग्वैदिक समाज मुख्य रूप से एक समतावादी और कबीलाई समाज था जिसमें वर्ण व्यवस्था कर्म पर आधारित थी और गोत्र प्रणाली अपनी पूरी अवस्था में थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में लोहे (श्याम अयस) की खोज के बाद कृषि आधारित अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई और वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित होकर कठोर हो गई।
3. उत्तर वैदिक काल में गोत्र (Gotra) संस्था का उदय हुआ, जिसका मूल अर्थ 'गोहूति' या 'गोष्ठ' (वह स्थान जहाँ कुल विशेष का गोधन पाला जाता था) था, और इसी काल में पहली बार चार आश्रमों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास) का पूर्ण विधान 'जाबालोपनिषद' में देखने को मिलता है।
4. ऋग्वैदिक काल में राजा को 'गोपा जनस्य' (कबीले का रक्षक) कहा जाता था, जिसे नियमित कर (बलि) देने की अनिवार्य व्यवस्था थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में 'भागदुध' नामक अधिकारी कर संग्रह करने लगा और राजा की शक्ति में वृद्धि के साथ-साथ 'राजसूय', 'अश्वमेध' तथा 'वाजपेय' जैसे बड़े यज्ञों का प्रचलन बढ़ गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व, सैन्य रणनीतियों तथा संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा पर विजय प्राप्त करने के पश्चात वीर कुंवर सिंह ने उत्तर प्रदेश की ओर प्रस्थान किया और आजमगढ़ में कर्नल मिलमैन की सेना को पराजित करने के बाद, जगदीशपुर वापस लौटते समय अप्रैल 1858 में कैप्टन ली ग्रांड की सेना को पूरी तरह खदेड़ दिया था।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत उनके छोटे भाई अमर सिंह ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष को जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों को अपना सुरक्षित अड्डा बनाते हुए ब्रिटिश सेना के खिलाफ एक प्रभावी गोरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) का संचालन किया तथा समानांतर प्रशासन स्थापित किया था।
3. अमर सिंह द्वारा कैमूर की पहाड़ियों से संचालित इस प्रतिरोध को कुचलने के लिए ब्रिटिश जनरल डगलस और कमिश्नर सैमुअल्स ने व्यापक सैन्य अभियान चलाया था, जिसके पश्चात अमर सिंह अंग्रेजों के हाथ लग गए और उन्हें सार्वजनिक रूप से पटना में फांसी दे दी गई थी।
4. वीर कुंवर सिंह ने अपनी संपूर्ण सैन्य यात्रा के दौरान केवल पारंपरिक हथियारों पर ही निर्भर रहकर ब्रिटिश सेना से आधुनिक बंदूकों और गोला-बारूद का अधिग्रहण करने से हमेशा परहेज किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई (मुंबई) के ग्वालिया टैंक मैदान में ऐतिहासिक भाषण देने और कांग्रेस का झंडा फहराने वाली प्रमुख समाजवादी नेत्री अरुणा आसफ अली थीं, जिन्हें बाद में भूमिगत रहकर आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए भी जाना जाता है।
2. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में कलकत्ता से गुप्त रूप से देश छोड़ने के पश्चात 'ग्रेट ब्रिटेन' नामक छद्म नाम से सोवियत संघ की यात्रा की थी, क्योंकि वे सोवियत संघ को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध सबसे बड़ा स्वाभाविक सहयोगी मानते थे।
3. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आज़ाद हिंद फौज का औपचारिक नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस को सौंपे जाने के पश्चात, आईएनए के अंतर्गत 'सुभाष ब्रिगेड', 'जवाहर ब्रिगेड' और महिलाओं की एक रेजिमेंट के रूप में 'झाँसी की रानी रेजिमेंट' का गठन किया गया था, जिसका नेतृत्व लक्ष्मी सहगल ने किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वैदिक सभ्यता एवं वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक प्रयोग शुरू हो चुका था, जिसके कारण इस काल के लोगों ने घने जंगलों को साफ करके कृषि योग्य भूमि का विस्तार किया और एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की।
2. शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में गंधार, शल्य, केकय, कुरु और पांचाल के साथ-साथ कृषि से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं (जैसे जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई) का विस्तृत वर्णन मिलता है।
3. उत्तर वैदिक काल में 'सभा' और 'समिति' नामक संस्थाओं का प्रभाव कम होने लगा, तथा राजा की शक्तियां बढ़ गईं, जिसमें 'गोत्र' व्यवस्था की उत्पत्ति इसी काल में एक सामाजिक पहचान के रूप में हुई।
4. ऋग्वैदिक समाज पूरी तरह से समतावादी था, जहाँ महिलाओं को न केवल उपनयन संस्कार और वेदमंत्रों की रचना का अधिकार था, बल्कि पर्दा प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियां भी प्रचलित थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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