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History of India
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मराठा साम्राज्य के उत्थान और छत्रपति शिवाजी के सैन्य प्रशासन तथा राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शिवाजी ने अपनी सेना में वंशानुगत जागीरदारी प्रथा को कड़ाई से प्रतिबंधित करते हुए सैनिकों को सीधे नकद वेतन देने की व्यवस्था शुरू की थी और किलों की सुरक्षा के लिए 'हवलदार', 'सबनीस' और 'कारखानीस' जैसे प्रशासनिक अधिकारियों की एक त्रि-स्तरीय प्रणाली नियुक्त की थी।
- 2. 'अष्टप्रधान' मंडल में 'सुमंत' या 'दबीर' का मुख्य कार्य विदेश मंत्री के रूप में विदेशी राज्यों के साथ संबंधों का संचालन करना और राजा के दैनिक दरबार में आने वाले विदेशी मेहमानों तथा राजदूतों का स्वागत करना था।
- 3. शिवाजी के भू-राजस्व प्रशासन में 'अन्नाजी दत्तो' द्वारा तैयार किए गए भूमि सुधारों के तहत राज्य की हिस्सेदारी कुल उपज का शुरुआती पैंतालीस प्रतिशत निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर साठ प्रतिशत कर दिया गया था और बिचौलियों (देशमुखों और पाटिल) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था।
- 4. शिवाजी द्वारा वसूल किए जाने वाले 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' करों में, सरदेशमुखी कर पड़ोसी क्षेत्रों पर आक्रमण करने के लिए सुरक्षा की गारंटी के एवज में वसूला जाने वाला भू-राजस्व का एक चौथाई हिस्सा था, जबकि चौथ शिवाजी द्वारा अपने आपको पूरे क्षेत्र का सर्वोच्च देशमुखी होने के दावे के रूप में लिया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि शिवाजी ने जागीर प्रथा को हतोत्साहित किया और सैनिकों को नकद वेतन देने के साथ-साथ किलों के प्रबंधन के लिए हवलदार, सबनीस और कारखानीस की नियुक्ति की। कथन 2 सही है क्योंकि 'अष्टप्रधान' में 'सुमंत' विदेश मामलों के मंत्री (दबीर) के रूप में कार्य करता था। कथन 3 गलत है क्योंकि शिवाजी ने अन्नजी दत्तो की सहायता से भूमि का सर्वेक्षण करवाकर राज्य का हिस्सा उपज का लगभग 40% (दो-पंजी) निश्चित किया था, और उन्होंने देशमुखों या पाटिल जैसे मध्यस्थों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया था, बल्कि उनके अधिकारों को विनियमित किया था। कथनार्क 4 गलत है क्योंकि 'चौथ' पड़ोसी क्षेत्रों से वसूला जाने वाला कुल राजस्व का 1/4 हिस्सा था (सुरक्षा के बदले), जबकि 'सरदेशमुखी' 10% कर था जो शिवाजी अपने आप को सर्वोच्च देशमुख होने के दावे पर वसूलते थे (कथनों में परिभाषाएं विपरीत दी गई हैं)। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में औपचारिक नेतृत्व संभालने वाले मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की वास्तविक स्थिति, विद्रोही सिपाहियों के साथ उनके संबंधों और उनके शासन की प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बहादुर शाह जफर ने अपनी इच्छा से विद्रोह का नेतृत्व स्वीकार नहीं किया था, बल्कि मेरठ से दिल्ली पहुँचे विद्रोही सिपाहियों द्वारा लाल किले में प्रवेश कर उन्हें अपना 'शहनशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किए जाने के बाद वे अनिच्छा से इस आंदोलन का प्रतीक बने थे।
2. विद्रोही सिपाहियों और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने तथा निर्णयों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में एक 'प्रशासनिक न्यायालय' (Court of Administration) का गठन किया गया था, जिसमें सैन्य और नागरिक मामलों के निर्णय लिए जाते थे, और इस न्यायालय के सदस्यों का चुनाव मुख्य रूप से सिपाहियों द्वारा किया जाता था, जिस पर सम्राट का पूर्ण नियंत्रण नहीं था।
3. दिल्ली पर ब्रिटिश सेना द्वारा पुनः अधिकार किए जाने के पश्चात कर्नल हडसन ने हुमायूं के मकबरे के पास से बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया था, और उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी दे दी गई थी ताकि मुगल राजवंश का पूर्णतः अंत किया जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों के तहत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के माध्यम से सतारा, नागपुर और झाँसी के साथ-साथ वर्ष 1856 में अवध का विलय 'कुशासन' के आधार पर कर दिया गया, जिससे अवध के नवाब के सैनिकों और पारंपरिक अभिजात वर्ग के बीच व्यापक रोष फैल गया।
2. आर्थिक कारणों के अंतर्गत ब्रिटिश मुक्त व्यापार नीति और एकतरफा शुल्क व्यवस्था ने भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और सूती कपड़ा उद्योग को पूरी तरह नष्ट कर दिया, तथा भू-राजस्व की कठोर प्रणालियों (जैसे स्थायी बंदोबस्त और रयतवारी) के कारण ग्रामीण किसानों पर कर्ज का बोझ अत्यधिक बढ़ गया।
3. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने यह प्रावधान किया कि धर्म परिवर्तन करने से पैतृक संपत्ति से अधिकार समाप्त नहीं होगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई धर्म में धर्मांतरण को बढ़ावा देने के षड्यंत्र के रूप में देखा, तथा ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भारतीय सामाजिक रीति-रिवाजों और परंपराओं में किए जा रहे सुधारों को भी संदेह की दृष्टि से देखा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय स्वतंत्रता और माउंटबेटन योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 3 जून 1947 को प्रस्तुत माउंटबेटन योजना में यह स्पष्ट किया गया था कि बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकें दो भागों में होंगी—एक मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधियों के लिए और दूसरी शेष जिलों के प्रतिनिधियों के लिए—ताकि यह निर्णय लिया जा सके कि प्रांतों का विभाजन किया जाए या नहीं।
2. इस योजना के तहत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया था।
3. माउंटबेटन योजना के प्रावधानों के अंतर्गत ही ब्रिटिश संसद में 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' पारित किया गया, जिसके द्वारा 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
4. इस योजना में रियाسतों (Princely States) को यह छूट दी गई थी कि वे अपनी भौगोलिक स्थिति और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए भारत या पाकिस्तान में शामिल हों, अथवा एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र के रूप में अपना अलग अस्तित्व बनाए रखें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में घटित घटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' मस्कट बंदूक के स्थान पर दिसंबर 1856 में नई 'एनफील्ड' (Enfield) राइफल को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की बात ने भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के प्रत्यक्ष विरोध में अपने वरिष्ठ अंग्रेजी अधिकारियों—लेफ्टिनेंट बॉग (Lt. Baugh) और ह्यूसन (Lt. Hewson)—पर गोली चलाकर उन्हें घायल कर दिया था।
3. इस घटना के तुरंत बाद मंगल पांडे को बंदी बना लिया गया और कोर्ट-मार्शल के पश्चात 8 अप्रैल 1857 को उन्हें बैरकपुर में ही फांसी दे दी गई, जिसके परिणामस्वरूप इस छावनी की पूरी 34वीं रेजिमेंट को बाद में भंग कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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दिल्ली में 1857 के विद्रोह के दौरान मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका और विद्रोही सैनिकों की संगठनात्मक व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली के सैनिकों द्वारा बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने के उपरांत, सम्राट ने विद्रोहियों के सैन्य और प्रशासनिक मामलों के प्रबंधन के लिए एक 'शासन न्यायालय' (Court of Administration) का गठन किया था जिसमें सेना और प्रशासन दोनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
2. यद्यपि बहादुर शाह जफर ने विद्रोह का औपचारिक नेतृत्व स्वीकार कर लिया था, तथापि उनकी अत्यधिक वृद्धावस्था, व्यक्तिगत अनिच्छा और उनके निकटवर्ती शाही दरबारियों तथा राजकुमारों के मध्य आपसी समन्वय व दूरदर्शिता के अभाव के कारण वे विद्रोहियों को कोई प्रभावी या दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा प्रदान नहीं कर सके।
3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के पश्चात ब्रिटिश अधिकारी मेजर हडसन ने बहादुर शाह जफर को लाल किले से गिरफ्तार किया था और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें अंडमान और निकोबार की पोर्ट ब्लेयर जेल में आजीवन कारावास के लिए भेज दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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