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History of India
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मराठा साम्राज्य के प्रशासन, शिवाजी की नीतियों और उनके सैन्य संगठन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शिवाजी ने पारंपरिक जागीरदारी प्रथा को हतोत्साहित करते हुए अपने प्रशासनिक नियंत्रण को सुदृढ़ करने के लिए राज्य की ओर से सैनिकों और अधिकारियों को सीधे नकद वेतन देने की व्यवस्था को प्राथमिकता दी थी।
- 2. 'अष्टप्रधान' मंडल में 'अमात्य' या 'मजूमदार' का प्रमुख कार्य राज्य की आय और व्यय का लेखा-जोखा रखना तथा सभी शाही दस्तावेजों और पत्रों की भाषा एवं शैली की जाँच करना था।
- 3. शिवाजी के शासनकाल में 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' करों के संग्रह की व्यवस्था थी; जहाँ चौथ पड़ोसी मुगल या अन्य क्षेत्रों से सुरक्षा की गारंटी के एवज में वसूला जाने वाला भू-राजस्व का एक चौथाई हिस्सा था, वहीं सरदेशमुखी को शिवाजी अपने आप को पूरे क्षेत्र का सर्वोच्च देशमुखी (वंशानुगत राजस्व अधिकारी) होने के दावे के रूप में कुल राजस्व का दस प्रतिशत वसूलते थे।
- 4. शिवाजी की पैदल सेना (मावलो) में अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती बनाए रखने के लिए 'हवलदार', 'जुम्लेदार' और 'हजारों' जैसे सैन्य पदों की श्रेणियां निर्धारित थीं, और सेना में लूट के माल का बँटवारा कड़े नियमों के तहत राज्य के पक्ष में नियंत्रित किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि शिवाजी ने अपने प्रशासन में वंशानुगत जागीरदारी प्रथा पर रोक लगाने का प्रयास किया और सैनिकों को नियमित नकद वेतन देने की नीति अपनाई। कथन 2 गलत है क्योंकि 'अमात्य' (मजूमदार) का मुख्य कार्य राज्य की आय और व्यय का हिसाब रखना था, जबकि शाही पत्रों की भाषा और शैली की जाँच करने का कार्य 'वाक्यनवीस' या 'सुरुनवीस' (चिटनीस) का था। कथन 3 सही है; 'चौथ' पड़ोसी क्षेत्रों पर आक्रमण न करने और उनकी रक्षा करने के बदले वसूला जाने वाला कर (लगभग 25%) था, और 'सरदेशमुखी' शिवाजी द्वारा अपने पैतृक अधिकारों के दावे के रूप में 10% अतिरिक्त वसूला जाता था। कथन 4 सही है, शिवाजी की सैन्य व्यवस्था अत्यंत अनुशासित थी जिसमें पैदल सेना और घुड़सवार सेना के लिए स्पष्ट पदानुक्रम और लूट के वितरण के कड़े नियम थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व में प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें वज्जी और मल्ल महाजनपद 'गणसंघ' (राजतंत्र के स्थान पर कुलीनतंत्र/गणतांत्रिक व्यवस्था) के रूप में संगठित थे।
2. मगध साम्राज्य के उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका थी, क्योंकि इसकी आरंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत सुरक्षित थी और इसके समीप प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क के भंडार उपलब्ध थे।
3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों और विजय की नीति (जैसे अंग महाजनपद का विलय) से अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु (कुणिक) ने लिच्छवियों को पराजित करने के लिए वैशाली में वस्सकार नामक गुप्तचर की सहायता ली थी।
4. शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक के शासनकाल में वैशाली में द्वितीय बौद्ध संगति का आयोजन किया गया था, और इसी वंश के अंतिम शासक को पराधस्त कर महापद्मनंद ने नंद वंश की नींव रखी थी जिसे पुराणों में 'सर्वक्षत्रान्तक' (क्षत्रों का नाश करने वाला) कहा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह के नेतृत्व तथा संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा और शाहबाद क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध भीषण संघर्ष का नेतृत्व करने वाले बाबू कुंवर सिंह ने दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना को कई मोर्चों पर परास्त किया तथा अपनी वृद्धावस्था के बावजूद गंगा नदी पार करते समय अंग्रेजों की गोली से घायल होने पर अपना एक हाथ स्वयं काटकर गंगा को समर्पित कर दिया था।
2. बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष को समाप्त करने के बजाय कैमूर की पहाड़ियों और जंगलों से छपाए-मार (Guerrilla) युद्ध की रणनीति का सफल संचालन किया और लंबे समय तक ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी।
3. अमर सिंह के नेतृत्व वाले इस विद्रोही प्रतिरोध को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने बिहार में अत्यधिक दमनकारी नीतियां अपनाईं, जिसके तहत अंततः अमर सिंह को नेपाल नरेश द्वारा शरण दिए जाने के कारण ब्रिटिश सेना उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं कर पाई और उनकी मृत्यु नेपाल की तराई में ही प्राकृतिक कारणों से हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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उन्नीसवीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. तत्त्वबोधिनी सभा - देवेंद्रनाथ ठाकुर
2. साधारण ब्रह्म समाज - आनंद मोहन बोस और शिवनाथ शास्त्री
3. सेवा सदन - रामाबाई रानाडे
4. देव समाज - शिव नारायण अग्निहोत्री
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सुमेलित है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल नेटिव इन्फैंट्री (34th Bengal Native Infantry) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में 'एनफील्ड राइफल' में इस्तेमाल होने वाले कारतूसों के विरोध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों लेफ्टिनेंट बाग और सर्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर उन्हें गोली मार दी थी।
2. ब्रिटिश सेना में पारंपरिक भूरे रंग की 'ब्राउन बेस' मस्कट बंदूक के स्थान पर जिस नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, उसके कारतूस के आवरण को लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था, जिसके बारे में सैनिकों में यह अफवाह या सत्य फैल गया था कि उस आवरण में गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है।
3. मंगल पांडे को बैरकपुर में सैन्य अदालत (Court-martial) द्वारा मुकदमा चलाए जाने के पश्चात 8 अप्रैल 1857 को निर्धारित तिथि से पहले ही फांसी दे दी गई, जिसके परिणामस्वरूप देश भर के अन्य छावनियों के सैनिकों में तीव्र आक्रोश फैल गया।
4. इस घटना के तुरंत बाद अवध की रेजिमेंटों ने भी हथियार डाल दिए और बैरकपुर छावनी को 1857 के विद्रोह के दौरान हमेशा के लिए ब्रिटिश सेना द्वारा भंग (Disband) कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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