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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अवध में विद्रोह की शुरुआत 37वीं नेटिव इन्फैंट्री और ओुध रेजिमेंट द्वारा जून 1857 में हुई, जिसके उपरांत बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिश कादिर को नवाब घोषित कर स्वयं शासन की बागडोर संभाली और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी का नेतृत्व किया।
  2. 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने फैजाबाद और अवध के विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया और चिनहट के युद्ध में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को पराजित किया था।
  3. 3. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने भारी सैन्य बल, गोरखा रेजिमेंट और नेपाल के जंगबहादुर की सहायता से मार्च 1858 में लखनऊ पर पुनः अधिकार कर लिया, जिसके पश्चात बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें पेंशन पर कलकत्ता भेज दिया गया।
  4. 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों द्वारा पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का भारी इनाम रखा गया था, और अंततः एक स्थानीय जागीरदार (पवाया के राजा) के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई तथा उनका सिर काटकर सरेआम प्रदर्शित किया गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान अवध और लखनऊ का केंद्र ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सबसे लंबे और संगठित प्रतिरोधों में से एक था। बेगम हजरत महल (अवध के नवाब वाजिद अली शाह की पत्नी) ने अपने नाबालिग बेटे बिरजिश कादिर को गद्दी पर बैठाकर लखनऊ में विद्रोह की कमान संभाली और रेजिडेंसी की घेराबंदी का प्रभावी नेतृत्व किया। मौलवी अहमदुल्लाह शाह (जिन्हें 'डंका शाह' के रूप में जाना जाता है) ने फैजाबाद और अवध में ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी तथा 30 जून 1857 को लड़े गए 'चिनहट के युद्ध' में हेनरी लॉरेंस की सेना को धूल चटाई। ब्रिटिश जनरल कॉलिन कैंपबेल ने मार्च 1858 में भारी सैन्य बल और नेपाल के प्रधानमंत्री जंगबहादुर की गोरखा सेना की मदद से लखनऊ पर कब्जा कर लिया। इसके बाद बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और नेपाल भाग गईं, जहाँ शरण लेते हुए उनकी मृत्यु हुई; अतः कथन 3 गलत है। वहीं, मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने 50,000 रुपये का इनाम रखा था, और पवाया (रोहिलाखंड) के राजा के विश्वासघात के कारण वे अंग्रेजों के साथ मुठभेड़ में मारे गए। विकिपीडिया संदर्भ
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) को वर्ष 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किया गया था, जिसमें भू-राजस्व का 10/11 भाग कंपनी के लिए तथा 1/11 भाग जमींदारों के अपने प्रशासनिक खर्च एवं लाभ के रूप में निर्धारित किया गया था। 2. रयतवारी व्यवस्था, जिसे मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू किया गया था, के अंतर्गत सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था, तथा लगान अदायगी में विफलता पर किसानों को भूमि से बेदखल करने का अधिकार सरकार के पास था। 3. महालवारी व्यवस्था को उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू किया गया था, जिसमें भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न होकर संपूर्ण गाँव या 'महाल' के आधार पर किया जाता था और राजस्व भुगतान की सामूहिक जिम्मेदारी ग्राम के मुखिया या लंबरदार की होती थी। 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक परिणाम यह हुआ कि भारतीय कृषि का तेजी से आधुनिकीकरण हुआ, किसानों की क्रय शक्ति में भारी वृद्धि हुई और ग्रामीण क्षेत्र में पूंजी निर्माण को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिला। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके कारणों के संबंध में विभिन्न ब्रिटिश एवं भारतीय इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध मतों और कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था" - आर.सी. मजूमदार 2. "यह विद्रोह पूर्णतः देशभक्ति से रहित और स्वार्थी सैनिकों का एक ऐसा संघर्ष था जिसका कोई उच्च उद्देश्य नहीं था" - सर जॉन सीले 3. "जिस तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम को वीर सावरकर ने महिमामंडित किया, वह वास्तव में एक सुनियोजित राष्ट्रीय षड्यंत्र था जिसका नेतृत्व केवल सामंती तत्वों ने किया" - बेंजामिन डिजरायली 4. "यह धर्म का युद्ध था जो बर्बरता और सभ्यता के बीच एक क्रूर संघर्ष के रूप में लड़ा गया था" - टी.आर. होम्स उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाला था, और ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध प्रतिरोध का संचालन करते हुए अंततः नेपाल की तराई में शरण ली जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया और रोहेलखंड से लेकर अवध तक अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए, तथा ब्रिटिश सरकार ने उनकी गिरफ्तारी पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। 3. लखनऊ की घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी लॉरेंस रेजिडेंसी की रक्षा करते हुए मारा गया था, और बाद में सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजीमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की मदद से लखनऊ पर पुनः अधिकार प्राप्त किया था। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध में केवल मुस्लिम सैनिकों और मौलानाओं को लामबंद किया, तथा उन्होंने कभी भी राजपूतों, जमींदारों या अन्य स्थानीय हिंदू राजाओं से सहयोग प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी के रूप में ब्रिटिश पेंशन बंद किए जाने का प्रतिशोध लेते हुए अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का आह्वान किया। 2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और रणनीतिकार थे, ने विद्रोह के वैचारिक और कूटनीतिक समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा ब्रिटेन जाकर नाना साहब की पेंशन के मामले की पैरवी की थी। 3. तात्या टोपे ने कानपुर की सेना के वास्तविक सैन्य संचालन की कमान संभाली और बाद में जनरल विंडहाम की ब्रिटिश सेना को कानपुर के समीप पराजित कर शहर पर अधिकार करने में मुख्य भूमिका निभाई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में घटित घटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' मस्कट बंदूक के स्थान पर 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिसके कारतूसों को लोड करने से पहले उसके आवरण को मुँह से काटना पड़ता था और सैनिकों में यह प्रबल आशंका फैल गई थी कि उस आवरण में गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है। 2. बैरकपुर स्थित 34वीं नेटिव इन्फैंट्री (NI) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बीयुक्त कारतूसों के प्रयोग के विरोध में खुलकर बगावत करते हुए ब्रिटिश एडजुटेंट लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर उन्हें घायल कर दिया था। 3. मंगल पांडे की इस घटना के तुरंत बाद, ब्रिटिश प्रशासन ने 34वीं नेटिव इन्फैंट्री की उस संपूर्ण रेजिमेंट को जिसमें यह विद्रोह भड़का था, तत्काल प्रभाव से बिना किसी औपचारिक जाँच के स्थायी रूप से भंग कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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