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History of India
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इल्तुतमिश ने सल्तनत काल में सबसे पहले शुद्ध अरबी सिक्के - चांदी का टका और तांबे का जीतल - प्रचलित किए, तथा सुल्तान के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए बगदाद के खलीफा से 'मंसूर' (मान्यता पत्र) प्राप्त किया।
  2. 2. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य में भू-राजस्व की दर को बढ़ाकर उपज का आधा (50 प्रतिशत) कर दिया और उपज के आकलन के लिए 'बिस्वा' प्रणाली को आधार बनाया, तथा बिचौलियों (खूत्, मुकद्दम और चौधरी) के विशेष अधिकारों को समाप्त कर उनसे भी सामान्य किसानों की तरह कर वसूल किया।
  3. 3. मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के समय उत्पन्न अकाल और किसानों के भारी विरोध को शांत करने के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक कृषि विभाग की स्थापना की और किसानों को 'तकावी' (सोंधार) ऋण वितरित किए।
  4. 4. फिरोजशाह तुगलक ने शरियत के नियमों के विपरीत वसूله जाने वाले लगभग चौबीस प्रकार के कष्टदायक करों (आवाब) को समाप्त कर दिया और केवल चार वैध करों - खराज, जकात, जजिया और खम्स - को ही अपने राज्य में लागू रखा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने टका और जीतल जैसे शुद्ध अरबी सिक्के चलाए और 1229 ईस्वी में बगदाद के खलीफा से औपचारिक मान्यता प्राप्त की। अलाउद्दीन खिलजी ने भू-राजस्व बढ़ाकर 50% किया और बिचौलियों के विशेषाधिकार छीने। मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि सुधारों के लिए विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'दीवान-ए-कोही' विभाग की स्थापना की थी। फिरोजशाह तुगलक ने शरियत सम्मत केवल चार करों को छोड़कर बाकी सभी अवैध करों को समाप्त कर दिया था।
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