त्वरित लिंक्स
History of India
6 views
दिल्ली में 1857 के विद्रोह के नेतृत्व और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली की पुनः प्राप्ति के उपरांत, मेजर विलियम हडसन ने हुमायूं के मकबरे के पास छिपे मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया था और उनके बेटों की हत्या कर दी थी।
- 2. विद्रोही सिपाहियों और विभिन्न क्षेत्रों से आए सैनिकों ने मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, किंतु भारत का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित कर दिया था, जिससे इस विद्रोह को अखिल भारतीय प्रतीकात्मक वैधता मिली।
- 3. बहादुर शाह जफर ने एक सक्रिय और कुशल सैन्य रणनीतिकार के रूप में पूरी दिल्ली की रक्षा का कमान अपने हाथों में संभाला था तथा ब्रिटिश सेनापति जॉन निकोलसन के विरुद्ध खुद रणक्षेत्र में मोर्चे का नेतृत्व किया था।
- 4. विद्रोह के दमन के पश्चात ब्रिटिश सरकार द्वारा बहादुर शाह जफर पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें निर्वासित कर बर्मा (वर्तमान म्यांमार) के रंगून भेज दिया गया, जहाँ वर्ष 1862 में उनका निधन हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोहियों ने वृद्ध और असमर्थ मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अपना औपचारिक नेता घोषित किया था। यद्यपि जफर स्वयं प्रत्यक्ष रूप से युद्ध का नेतृत्व करने या सैन्य रणनीतिक निर्णय लेने में असमर्थ थे (कथन 3 असत्य है, क्योंकि वास्तविक सैन्य कमान बख्त खान के पास थी और जफर ने सक्रिय मोर्चे का नेतृत्व नहीं किया), किंतु उनके नाम मात्र के नेतृत्व से पूरे देश में ब्रिटिश विरोधी ताकतों को एक मजबूत प्रतीकात्मक प्रेरणा मिली। ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली की घेराबंदी के बाद मेजर हडसन ने उन्हें हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार किया और उनके पुत्रों की हत्या कर दी। बाद में उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें रंगून निर्वासित कर दिया गया। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
दिल्ली के लोदी गार्डन में स्थित "शीश गुंबद" के अंदर किसका मकबरा है?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह के पास संपूर्ण भारत के लिए कोई सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण, एकीकृत प्रशासनिक योजना या भविष्य का कोई स्पष्ट वैकल्पिक ढांचा नहीं था।
2. विद्रोही खेमे में केंद्रीयकृत कमान और उच्च स्तरीय सैन्य समन्वय का पूर्ण अभाव था, तथा विभिन्न क्षेत्रों के नेता अपने स्थानीय हितों और तात्कालिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर लड़ रहे थे।
3. भारत के अधिकांश बड़े रियासतों के शासकों, बड़े जमींदारों और आधुनिक शिक्षित वर्ग ने विद्रोह का सक्रिय समर्थन किया, जिसके कारण अंग्रेजों को पूरे भारत में व्यापक प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
4. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक सैन्य तकनीक, कुशल तोपखाना, अनुशासित सैनिक और उत्कृष्ट संचार माध्यम (जैसे टेलीग्राफ) उपलब्ध थे, जिसके समक्ष बिखरे हुए विद्रोही सैनिक टिक नहीं सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय के लिए उत्तरदायी राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी की 'राज्य हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया, तथा मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के उत्तराधिकारियों से लाल किले की शाही उपाधियाँ और उनके विशेषाधिकार छीन लिए जाने की घोषणा से भारतीय शासक वर्ग और अभिजात वर्ग में भारी असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई।
2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों (De-industrialization) के कारण भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का पूर्ण पतन हो गया, जिससे लाखों बुनकर और कारीगर बेरोजगार हो गए, जबकि ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्थाओं (जैसे स्थायी बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) ने किसानों पर अत्यधिक कर का बोझ लादकर उन्हें ग्रामीण साहूकारों के चंगुल में फंसा दिया।
3. वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने हिंदू से ईसाई धर्म में परिवर्तित व्यक्तियों को अपने पैतृक पूर्वजों की संपत्ति से वंचित करने वाले पुराने कानून को बदल दिया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई धर्म के प्रचार और जबरन धर्मांतरण के एक सुनियोजित षड्यंत्र के रूप में देखा।
4. सेना के भीतर नस्लीय भेदभाव, भारतीय सैनिकों को कम वेतन और 'भत्ता' (Foreign Service Allowance) न दिए जाने की नीति के साथ-साथ वर्ष 1856 के 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) ने, जिसके तहत भारतीय सैनिकों को समुद्र पार वर्मा या विदेशों में भी सेवा देने के लिए बाध्य किया गया था, सैनिकों की धार्मिक मान्यताओं को सीधे तौर पर आहत किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, प्रशासनिक संरचना और विज्ञान-प्रौद्योगिकी के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भूमि की बिक्री और उसके हस्तांतरण से संबंधित प्रशासनिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने वाले अभिलेखीय साक्ष्यों में 'महाक्षपधलिक' नामक अधिकारी का उल्लेख मिलता है, जो राज्य के राजकीय अभिलेखागार (Record Office) का मुख्य प्रभारी होता था।
2. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए स्वर्ण सिक्के (जिन्हें 'दीनार' कहा जाता था) कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों की तुलना में अधिक शुद्धता और कलात्मक सुंदरता प्रदर्शित करते हैं, जो इस काल में विदेशी व्यापार के अत्यधिक समृद्ध होने का अकाट्य प्रमाण है।
3. आर्यभट ने अपनी प्रसिद्ध कृति 'आर्यभटिय' में पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने (भ्रमण) और सूर्यग्रहण व चंद्रग्रहण के वास्तविक खगोलीय कारणों का वैज्ञानिक प्रतिपादन किया था, तथा पाई (π) का मान लगभग 3.1416 निर्धारित किया था।
4. गुप्त प्रशासन में प्रांतों को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिनके प्रशासनिक प्रमुख को 'उपरिक' कहा जाता था, और इनकी नियुक्ति सीधे केंद्रीय सम्राट द्वारा की जाती थी, जो सामान्यतः राजवंश के राजकुमार या उच्च प्रशासनिक वर्ग से होते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वैदिक काल और वैदिक साहित्य के विभिन्न ग्रंथों, सामाजिक संरचना तथा दार्शनिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था का आधार जन्म पर आधारित न होकर कर्म पर आधारित था, जिसका स्पष्ट प्रमाण ऋग्वेद के नवें मंडल में मिलता है जहाँ एक व्यक्ति कहता है कि 'मैं कवि हूँ, मेरा पिता वैद्य है और मेरी माता चक्की पीसने वाली है'।
2. उत्तर वैदिक काल में सभा और समिति जैसी राजनीतिक संस्थाओं का महत्व कम हो गया, और राजा की शक्ति में वृद्धि हुई, जिसे 'राजसूय' और 'अश्वमेध' जैसे बड़े यज्ञों के माध्यम से वैधता प्राप्त होती थी, तथा इस काल में 'शतपथ ब्राह्मण' में राजा के लिए 'विराट' शब्द का प्रयोग किया गया है।
3. वैदिक दर्शन के 'षड्दर्शन' में से 'मीमांसा' (पूर्व मीमांसा) दर्शन के प्रस्थापक महर्षि जैमिनी थे, जो वेदों के कर्मकांडीय हिस्से पर बल देता है और मोक्ष प्राप्ति के लिए यज्ञों तथा अनुष्ठानों के निष्पादन को अनिवार्य मानता है।
4. ऋग्वेद में उल्लिखित नदियों में सबसे अधिक पवित्र नदी 'सरस्वती' को माना गया है, जिसे 'नदितमा' (नदियों में श्रेष्ठ) कहा गया है, जबकि व्यापारिक और भौगोलिक दृष्टि से सबसे अधिक बार उल्लेख 'सिंधु' नदी का मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.