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History of India
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, अशोक के धम्म और प्रांतीय शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य कालीन केंद्रीय प्रशासन में कृषि विभाग के अध्यक्ष को 'सीताध्यक्ष' कहा जाता था, जो राजकीय कृषि भूमि (सीता भूमि) की देखरेख और प्रबंधन करता था।
  2. 2. अशोक के शिलालेखों में उल्लिखित 'रज्जुक' नामक अधिकारी का मुख्य कार्य केवल ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय प्रशासन संभालना था, तथा उनका राजस्व निर्धारण या भूमि पैमाइश से कोई संबंध नहीं था।
  3. 3. अशोक के 'धम्म महामात्र' नामक अधिकारियों की नियुक्ति उनके राज्याभिषेक के तेरहवें वर्ष के पश्चात की गई थी, जिनका मुख्य कार्य विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच धार्मिक सहिष्णुता का प्रचार करना और कल्याणकारी कार्य करना था।
  4. 4. मौर्य प्रशासन में प्रांतीय शासन व्यवस्था के तहत अशोक के समय साम्राज्य पाँच प्रमुख प्रांतों में विभाजित था, जिनकी राजधानियाँ तक्षशिला, उज्जैन, तोसली, सुवर्णगिरि और पाटलिपुत्र थीं, तथा इन प्रांतों का प्रशासन 'कुमार' या 'आर्यपुत्र' नामक राजवंश के राजकुमारों द्वारा संचालित होता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार कृषि विभाग के अध्यक्ष को 'सीताध्यक्ष' कहा जाता था जो राजकीय भूमि का प्रबंधन करता था। कथन 2 गलत है क्योंकि 'रज्जुक' अधिकारी का कार्य केवल न्याय करना ही नहीं बल्कि भूमि की पैमाइश करना और राजस्व का निर्धारण करना भी था। कथन 3 सही है, अशोक ने अपने राज्याभिषेक के तेरहवें वर्ष के बाद धम्म महामात्रों की नियुक्ति की थी। कथन 4 भी पूर्णतः सही है, इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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