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History of India
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन, सैन्य संगठन और शिवाजी के शासनकाल की राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शिवाजी की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' (आठ मंत्रियों का परिषद) नामक मंत्रिपरिषद थी, जिसमें पेशवा (मझार) सर्वोच्च पद होता था जो सैन्य मामलों के अलावा अन्य सभी नागरिक और वित्तीय कार्यों की देखरेख करता था तथा मंत्रिपरिषद का प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी था।
- 2. राजस्व सुधारों के अंतर्गत शिवाजी ने जागीरदारी प्रथा को कड़ाई से हतोत्साहित किया और उसके स्थान पर अधिकारियों को नकद वेतन देने की परंपरा को बढ़ावा दिया, हालांकि कुछ मामलों में सैन्य सेवा के बदले भूमि अनुदान (सरंजाम) भी दिए जाते थे।
- 3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के प्रमुख कर थे, जिनमें चौथ मराठा राज्य की सीमा के बाहर पड़ोसी मुगल अथवा अन्य क्षेत्रों से सुरक्षा प्रदान करने के एवज में वसूला जाने वाला कुल राजस्व का 25 प्रतिशत था, जबकि सरदेशमुखी उस क्षेत्र पर उनके पारंपरिक वंशानुगत अधिकारों के दावे के रूप में 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर के रूप में लिया जाता था।
- 4. शिवाजी की घुड़सवार सेना दो प्रमुख भागों में विभाजित थी — 'पागा' (राजकीय घुड़सवार सेना) जिसमें सैनिकों को घोड़े और शस्त्र राज्य द्वारा प्रदान किए जाते थे, और 'सिहल्ती' या 'बारगीर' जो स्वयं अपने घोड़े और अस्त्र-शस्त्र लेकर युद्ध में भाग लेते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 आंशिक रूप से असत्य है। शिवाजी की सैन्य व्यवस्था में 'पागा' (राजकीय घुड़सवार सेना) के सैनिकों को घोड़े और हथियार राज्य द्वारा दिए जाते थे, जबकि 'सिलहदार' (न कि सिहल्ती) वे सैनिक होते थे जो अपने घोड़े और अस्त्र-शस्त्र स्वयं लाते थे। बारगीर और पागा एक ही श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। मराठा साम्राज्य और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के अंतर्संबंधों तथा ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सिंगापुर में जापानी सेना के सहयोग से रास बिहारी बोस और कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित 'इंडियन नेशनल आर्मी' (INA) का पुनर्गठन कर उसका सर्वोच्च नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस को सौंपा गया था, जिन्होंने वर्ष 1943 में सिंगापुर में 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की थी।
2. सुभाष चंद्र बोस द्वारा सिंगापुर से प्रसारित किए गए रेडियो संदेशों में महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए उन्हें 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर पुकारा गया था और आज़ाद हिंद फौज के सैन्य ब्रिगेडों के नामकरण प्रमुख राष्ट्रीय एवं स्वतंत्रता सेनानियों जैसे गांधी ब्रिगेड, नेहरू ब्रिगेड, सुभाष ब्रिगेड तथा महिलाओं के लिए 'झांसी की रानी रेजिमेंट' के नाम पर किए गए थे।
3. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भूमिगत कांग्रेस नेताओं (जैसे अरुणा आसफ अली, अच्युत पटवर्धन और राममनोहर लोहिया) तथा 'कांग्रेस रेडियो' (उषा मेहता द्वारा संचालित) ने जापानी आक्रामकता के भय के कारण सुभाष चंद्र बोस के सशस्त्र संघर्ष और धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) के सहयोग की नीति का कड़ा विरोध किया था, जिससे राष्ट्रीय आंदोलन के इस दौर में वैचारिक मतभेद स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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किस सुल्तान ने मुसलमान स्त्रियों को पीरों और संतों की मजार पर जाने से रोक दिया था?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना के लिए 'दाग' (घोड़ों को दागना) और 'चेहरा' (सैनिकों का हुलिया दर्ज करना) प्रणाली की शुरुआत की तथा बाजार नियंत्रण नीति के तहत खाद्यान्न और अन्य वस्तुओं के मूल्य निर्धारित करने के लिए 'शहना-ए-मंडी' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलतगढ़ (देवगिरि) स्थानांतरित की और राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) के रूप में तांबे और कांसे के सिक्के चलवाए, जिन्हें सोने और चांदी के सिक्कों के समकक्ष मान्यता दी गई।
3. फ़िरोज़ शाह तुगलक ने किसानों को राहत देने के लिए तक्क़वी ऋणों को पूरी तरह से माफ कर दिया, तथा सिंचाई के विकास के लिए पाँच बड़ी नहरों का निर्माण करवाया और 'हक-ए-शर्ब' नामक सिंचाई कर लागू किया।
4. इल्तुतमिश ने सल्तनत काल में पहली बार शुद्ध अरबी के सिक्के—चांदी का टंका और तांबे का जीतल—प्रचलित किए तथा 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीस गुलाम सरदारों का दल) का गठन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य के प्रशासन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य द्वारा रचित 'अर्थशास्त्र' में राज्य के सात अंगों (प्रकृति) का वर्णन किया गया है, जिसमें 'स्वामी' (राजा), 'अमात्य' (मंत्री/सच्चिव), 'जनपद' (क्षेत्र एवं जनता), 'दुर्ग' (किल्ला), 'कोष' (खजाना), 'दण्ड' (सेना) और 'मित्र' शामिल हैं।
2. अशोक के शिलालेखों और प्रांतीय प्रशासन के अंतर्गत, साम्राज्य चार मुख्य प्रांतों में विभाजित था, जिनकी राजधानियाँ तक्षशिला, उज्जैन, सुवर्णगिरि और तोसली थीं, तथा इन प्रांतों के प्रशासन का संचालन राज्याधिकारियों के रूप में 'कुमार' या 'आर्यपुत्र' नामक राजकुमारों द्वारा किया जाता था।
3. मौर्य काल में भू-राजस्व (भाग) उपज का सामान्यतः 1/6 भाग से 1/4 भाग तक वसूला जाता था, तथा कृषि कार्यों की देखरेख करने वाले सर्वोच्च अधिकारी को 'सीताध्यक्ष' कहा जाता था जो राजकीय कृषि भूमि (सीता भूमि) का प्रबंधन करता था।
4. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार मौर्य समाज सात जातियों (वर्गों) में विभाजित था, जिसमें दार्शनिक, किसान, शिकारी, शिल्पी, योद्धा, निरीक्षक और सभासद (पार्षद) शामिल थे, और उसने भारत में दासों के अस्तित्व का पूरी तरह से खंडन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और विशेषकर मनसबदारी तथा जागीरदारी प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा आरंभ की गई मनसबदारी व्यवस्था में 'जात' पद से अधिकारी के व्यक्तिगत वेतन और पद-प्रतिष्ठा का बोध होता था, जबकि 'सवार' पद से उसे अपने अधीन रख-रखाव वाले घुड़सवार सैनिकों की संख्या का ज्ञान होता था।
2. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में एक नया संशोधन करते हुए 'दु-अस्पा सिह-अस्पा' प्रणाली जोड़ी गई, जिसके अंतर्गत कुछ विशेष मनसबदारों को बिना अपने 'जात' पद को बढ़ाए हुए अतिरिक्त 'सवार' पद रखने की अनुमति दी जाती थी।
3. शाहजहाँ के शासनकाल में जागीर संकट (Jagirdari Crisis) अपने चरम पर पहुँच गया था, क्योंकि खालसा भूमि के क्षेत्रफल में अप्रत्याशित वृद्धि होने के कारण अमीरों को वेतन के बदले जागीरें आवंटित करने के लिए पर्याप्त भूमि (पैबाकी) उपलब्ध नहीं थी।
4. औरंगजेब के अंतिम वर्षों के दौरान दक्कन अभियानों के विस्तार के कारण जागीरों की भारी कमी हो गई थी, जिसे इतिहास में 'बेजागीरी' की स्थिति कहा जाता है और यह मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक पतन का एक प्रमुख आंतरिक कारण बना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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