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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 15 times

मराठा साम्राज्य के प्रशासन और शिवाजी के शासनकाल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. शिवाजी की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' (आठ मंत्रियों का परिषद) नामक मंत्रिपरिषद थी, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी था और पेशवा इस परिषद का सबसे प्रमुख एवं सर्वसर्वा प्रधान होता था, जिसे अन्य मंत्रियों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त था।
  2. 2. राजस्व प्रशासन के अंतर्गत शिवाजी ने मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था के आधार पर भूमि की पैमाइश कराई तथा अपने राज्य में जागीरदारी प्रथा को पूर्ण रूप से समाप्त कर उसकी जगह 'नकद वेतन' देने की व्यवस्था को बढ़ावा दिया।
  3. 3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के प्रमुख बाह्य कर थे, जिनमें चौथ पड़ोसी मुगल अथवा अन्य क्षेत्रों से सुरक्षा प्रदान करने के एवज में वसूला जाने वाला कुल राजस्व का 25 प्रतिशत था, जबकि सरदेशमुखी उस क्षेत्र पर उनके पारंपरिक वंशानुगत अधिकारों के दावे के रूप में 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर के रूप में लिया जाता था।
  4. 4. शिवाजी की सैन्य व्यवस्था में पागा (राजकीय घुड़सवार सेना) के सैनिकों को राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र प्रदान किए जाते थे, जबकि सिहल्ती (अस्थाई घुड़सवार) सैनिक अपने घोड़े और अस्त्र-शस्त्र स्वयं लेकर युद्ध में भाग लेते थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि 'अष्टप्रधान' में पेशवा (मुख्य प्रधान) सबसे महत्वपूर्ण मंत्री अवश्य था, लेकिन शिवाजी के काल में पेशवा को अन्य मंत्रियों पर कोई नियंत्रण या आधिपत्य प्राप्त नहीं था; सभी आठों मंत्री व्यक्तिगत रूप से सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी होते थे। पेशवा को सर्वोच्च नियंत्रण बाद में पेशवा काल (बालाजी विश्वनाथ के समय) में मिला। कथन 2 सही है, शिवाजी ने जागीर प्रथा का विरोध किया और राज्य अधिकारियों को नकद वेतन देने की नीति अपनाई, साथ ही मलिक अंबर की रय्यतवाड़ी व्यवस्था को अपनाया। कथन 3 सही है, चौथ (25%) और सरदेशमुखी (10%) मराठा राज्य की आय के प्रमुख स्रोत थे, जहाँ चौथ पड़ोसी क्षेत्रों से आक्रमण न करने के बदले सुरक्षा कर था और सरदेशमुखी उनके सर्वोच्च देशमुखी अधिकारों का दावा था। कथन 4 गलत है क्योंकि 'पागा' घुड़सवार राज्य के घोड़े और शस्त्र प्रयोग करते थे, जबकि 'बरगीर' और 'सिलहदार' (न कि सिहल्ती) में 'सिलहदार' वे सैनिक होते थे जो अपने अस्त्र-शस्त्र और घोड़े स्वयं लाते थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय से पूर्व ब्रिटिश शासन की आर्थिक, राजनीतिक और प्रशासनिक नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया था, जिससे भारतीय शासक वर्ग और उनके आश्रितों में भारी असुरक्षा और असंतोष उत्पन्न हुआ। 2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों (विशेषकर 'एकतरफा मुक्त व्यापार' और भारी आयात शुल्क) के परिणामस्वरूप भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और सूती वस्त्र उद्योग पूरी तरह नष्ट हो गए, जिससे बड़ी संख्या में कारीगर और शिल्पकार बेरोजगार होकर कृषि पर निर्भर होने को मजबूर हो गए। 3. वर्ष 1856 में लॉर्ड डलहौजी द्वारा अवध का अधिग्रहण 'कुशासन' (Misgovernance) के आधार पर किया गया था, जिसके कारण न केवल वहाँ के नवाब को अपदस्थ किया गया, बल्कि हजारों सिपाही जो अवध की सेना से थे और ब्रिटिश सेना में सेवारत थे, अचानक 'भूमि राजस्व वृद्धि' और अन्य करों की मार के दायरे में आ गए। 4. ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार करने की खुली छूट देने और ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act), जिसके तहत पैतृक संपत्ति से बेदखल होने का भय समाप्त किया गया, ने पारंपरिक भारतीय समाज में यह गहरी आशंका पैदा की कि ब्रिटिश सरकार उनका धर्म परिवर्तन कराना चाहती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), प्रथम व द्वितीय गोलमेज सम्मेलन तथा गांधी-इरविन समझौते के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया तथा इसी अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार किए गए 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' प्रस्ताव को स्वीकार किया गया। 2. वर्ष 1931 में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया, और इसी सम्मेलन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने 'कम्युनल अवार्ड' (सांप्रदायिक पंचाट) की घोषणा की, जिसके तहत दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल का प्रावधान किया गया था। 3. लार्ड इरविन और महात्मा गांधी के मध्य संपन्न हुए 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने और समुद्र तट के किनारे बसे लोगों को बिना कर के नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी। 4. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा 'दमनकारी अध्यादेशों' के माध्यम से कांग्रेस को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप जनवरी 1932 में महात्मा गांधी की पुनः गिरफ्तारी के साथ आंदोलन ने अपनी तीव्रता खो दी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए विद्रोह और उनके नेतृत्वकर्त्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छावनी की 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा के बाबू कुंवर सिंह के साथ जा मिले। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्रों में विद्रोहियों का नेतृत्व करने वाले स्थानीय जमींदार और राजा थे, जिनमें मुजफ्फरपुर में कमिश्नर टेलर के दमन के बावजूद सैनिकों ने अंग्रेजों को खदेड़ कर पूर्ण स्वतंत्र सरकार की स्थापना की थी। 4. आरा (जगदीशपुर) के बाबू कुंवर सिंह ने दानापुर से आए सैनिकों के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सफल छापामार युद्ध लड़ा और अंग्रेजों के विरुद्ध बिहार में इस महान विद्रोह के मुख्य प्रतीक बने। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए संघर्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अवध में विद्रोह की शुरुआत 30 जून 1857 को चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश रेजिडेंट हेनरी लॉरेंस की पराजय के साथ हुई, जहाँ स्थानीय जनता और सैनिकों ने बेगम हजरत महल के नेतृत्व में ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी थी। 2. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर प्रशासनिक और सैन्य संचालन अपने हाथों में लिया, तथा लखनऊ की रेजिडेंसी की लंबी घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश सेनाओं को घोर कठिनाइयों में डाला। 3. फैजाबाद से अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और कैंपबेल तथा आउट्राम की संयुक्त सेनाओं को कड़ा मुकाबला दिया था। 4. लखनऊ के अंतिम पतन के उपरांत बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सेनाओं के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और आजीवन ब्रिटिश पेंशन स्वीकार कर कलकत्ता में निवास किया, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पुवायाँ के राजा के विश्वासघात के बाद अंग्रेजों ने फांसी पर लटका दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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