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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित संगठनों और उनके संस्थापकों/संबंधित सुधारकों पर विचार कीजिए:

  1. 1. आत्मीय सभा (1814) — राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित, जो एकार्यवाद (Monotheism) के प्रचार और वेदांत ग्रंथों के प्रसार के लिए प्रारंभिक सभा थी।
  2. 2. तत्वबोधिनी सभा (1839) — देवेंद्रनाथ ठाकुर द्वारा स्थापित, जिसका मुख्य उद्देश्य उपनिषदों के विचारों का प्रसार करना और ब्रह्म समाज को अधिक संगठित रूप देना था।
  3. 3. प्रार्थना समाज (1867) — आत्माराम पांडुरंग द्वारा बॉम्बे में स्थापित, जिसे महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर जैसे सुधारकों का व्यापक समर्थन मिला और इसका मुख्य उद्देश्य जातिगत बंधनों को तोड़ना तथा विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा देना था।
  4. 4. देव समाज (1887) — स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा लाहौर में स्थापित, जिसका मुख्य बल मांसाहार निषेध, नास्तिकता का त्याग और उच्च नैतिक आचरण पर था।

उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

युग्म 1, 2 और 3 सही सुमेलित हैं। राजा राममोहन राय ने 1814 में 'आत्मीय सभा' की स्थापना की थी। 1839 में देवेंद्रनाथ टैगोर ने 'तत्वबोधिनी सभा' की स्थापना की जो आगे चलकर ब्रह्म समाज से जुड़ी। 1867 में आत्माराम पांडुरंग ने बॉम्बे में 'प्रार्थना समाज' की स्थापना की जिसमें एम.जी. रानाडे का महत्वपूर्ण योगदान था। किंतु युग्म 4 गलत है; 'देव समाज' की स्थापना 1887 में लाहौर में शिव नारायण अग्निहोत्री ने की थी, न कि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने। इस प्रकार के सुधार आंदोलनों के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
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→ सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), प्रथम गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस द्वारा प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930) के बहिष्कार के पश्चात ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाने के लिए मार्च 1931 में गांधी-इरविन समझौता हुआ, जिसके तहत सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करना स्वीकार किया, किंतु हिंसा के आरोपियों और भगत सिंह तथा उनके साथियों के मृत्युदंड को इस समझौते से बाहर रखा गया। 2. कराची अधिवेशन (1931) में, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, गांधी-इरविन समझौते का समर्थन किया गया और इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस ने 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' पर अपने प्रस्ताव को पारित किया। 3. लन्दन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, किंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और दलितों के लिए पृथक निर्वाचन के मुद्दे पर मतभेदों के कारण यह सम्मेलन असफल घोषित कर दिया गया। 4. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन की असफलता के उपरांत भारत लौटने पर गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण को तुरंत पुनः प्रारंभ किया, जिसे ब्रिटिश सरकार ने दबाने के लिए आपातकालीन अध्यादेशों का सहारा लिया और कांग्रेस संगठन को गैरकानूनी घोषित कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → महात्मा गांधी के भारत आगमन के उपरांत उनके शुरुआती सत्याग्रहों — चंपारण (1917), अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) — के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के अंतर्गत किसानों को अपनी भूमि के कुल भूभाग के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करना बाध्यकारी था। 2. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) में गांधीजी ने मिल मालिकों और मजदूरों के बीच मध्यस्थता करते हुए पहली बार भारत में 'भूख हड़ताल' (Hunger Strike) को अपने एक प्रभावी हथियार के रूप में प्रयोग किया था, जो प्लेग बोनस को लेकर था। 3. खेड़ा सत्याग्रह (1918) में फसल पूरी तरह बर्बाद होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा भू-राजस्व वसूलने के निर्णय के विरुद्ध गांधीजी ने किसानों को लगान न चुकाने का आह्वान किया था, और इसी आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल ने गांधीजी के मुख्य सहयोगी के रूप में कार्य किया था। 4. चंपारण सत्याग्रह की सफलता से अत्यधिक प्रभावित होकर रबीन्द्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी को पहली बार 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था, तथा इस आंदोलन की जांच के लिए गठित 'चंपारण अग्रियन कमेटी' (Champaran Agrarian Committee) में गांधीजी को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह को दबाने वाले ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों और उनके संबंधित कार्यक्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली — जॉन निकलसन और हडसन 2. लखनऊ — सर कॉलिन कैंपबेल और जेम्स आउट्राम 3. झाँसी और ग्वालियर — सर ह्यूरोज़ 4. बनारस और इलाहाबाद — कर्नल जेम्स नील उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? → गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, भूमि अनुदान व्यवस्था (Land Grants) और प्रशासनिक शब्दावली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में राजाओं द्वारा ब्राह्मणों, मंदिरों और बौद्ध विहारों को दिए जाने वाले कर-मुक्त भूमि अनुदान की प्रथा में भारी वृद्धि हुई, जिसे ताम्रपत्रों (Copper Plate Inscriptions) पर अंकित किया जाता था और इस प्रकार की भूमि को 'अग्रहार' कहा जाता था। 2. भूमि के वर्गीकरण के अंतर्गत 'क्षेत्र' खेती योग्य भूमि को, 'अपहरत' बिना जोती गई जंगली भूमि को, 'वापस' निवास योग्य भूमि को और 'शिल्प' चारागाह भूमि को कहा जाता था, जिसका उल्लेख अमरसिंह द्वारा रचित 'अमरकोश' में मिलता है। 3. गुप्त प्रशासनिक व्यवस्था में भू-राजस्व संग्रह और ग्रामीण प्रशासन की देखरेख के लिए 'महत्तर' (गाँव का मुखिया या प्रतिष्ठित व्यक्ति) और 'पट्टकुल' (ग्राम लेखाकार) जैसे अधिकारी प्रमुख होते थे, जिनका उल्लेख दामोदरपुर और बैग्राम ताम्रपत्रों में मिलता है। 4. गुप्त काल में सोने के सिक्कों को 'दिनार' कहा जाता था, और स्कंदगुप्त के शासनकाल के पश्चात् जारी किए जाने वाले स्वर्ण सिक्कों में सोने की शुद्धता (Intrinsic value) में निरंतर वृद्धि देखी गई, जो इस बात का प्रमाण है कि गुप्त साम्राज्य का विदेशी व्यापार अत्यधिक समृद्ध था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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