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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 16 times

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के नेतृत्वकर्ताओं तथा उनके दमन से जुड़े ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. फैजाबाद — मौलवी अहमदुल्लाह शाह (नेतृत्व) एवं जनरल कैंपबेल (दमन)
  2. 2. बरेली — खान बहादुर खान (नेतृत्व) एवं सर कॉलिन कैंपबेल (दमन)
  3. 3. इलाहाबाद — मौलवी लियाकत अली (नेतृत्व) एवं कर्नल नील (दमन)
  4. 4.

फैजाबाद — लियाकत अली (नेतृत्व) एवं ह्यूरोज़ (दमन) उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद में विद्रोह का कुशल नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह (जिन्हें 'डंका शाह' भी कहा जाता था) ने किया था, और इस क्षेत्र में विद्रोह का दमन जनरल कैंपबेल और अंग्रेजों द्वारा किया गया था। बरेली में रुहेलखंड के पूर्व शासक हाफिज़ रहमत खान के पोते खान बहादुर खान ने विद्रोह की बागडोर संभाली थी, जिसे बाद में सर कॉलिन कैंपबेल ने कुचल दिया। इसके अतिरिक्त, इलाहाबाद और बनारस में हुए भयानक विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जिसका अत्यंत क्रूरता के साथ दमन कर्नल जेम्स नील (Colonel Neil) द्वारा किया गया था। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ वर्ष 1857 के विद्रोह के विभिन्न कारणों (राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का विलय तो किया ही गया, साथ ही वर्ष 1856 में अवध का विलय 'कुशासन' के आधार पर कर दिया गया, जिससे वहाँ के पारंपरिक सैनिकों और नवाब के आश्रितों में गहरा रोष उत्पन्न हुआ। 2. सामाजिक और धार्मिक सुधारों के तहत ब्रिटिश सरकार द्वारा लाए गए 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम, 1850' (Religious Disabilities Act) के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि हिंदू से ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अपनी पैतृक संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीय समाज ने धर्म परिवर्तन का सरकारी षड्यंत्र माना। 3. आर्थिक कारणों में अंग्रेजों की मुक्त व्यापार नीति और औपनिवेशिक शुल्कों के कारण पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प उद्योगों का पूर्ण पतन हो गया, जिससे बेरोजगार हुए कारीगरों और जुलाहों को कृषि पर आश्रित होना पड़ा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया। 4. भू-राजस्व प्रणालियों के तहत लागू की गई रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्थाओं के कारण अत्यधिक करों और साहूकारों के शोषण से त्रस्त किसानों ने विद्रोह में खुलकर भाग लिया, और अंग्रेजों द्वारा इस शोषण को रोकने के लिए तुरंत ही सख्त कानूनी कदम उठाए गए जिससे किसानों को राहत मिल गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजििस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह की बागडोर संभाली और ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध लंबी घेराबंदी का नेतृत्व किया। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने फैजाबाद और अवध क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल तथा आउट्राम की संयुक्त सेनाओं को शुरुआती संघर्षों में कड़ी टक्कर दी। 3. लखनऊ की अंतिम पराजय के पश्चात बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण कर दिया और ब्रिटिश सरकार से पेंशन स्वीकार कर कलकत्ता में जीवन व्यतीत किया। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने ₹50,000 का भारी इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवायाँ के एक स्थानीय राजा के विश्वासघात के कारण वे ब्रिटिश सैनिकों द्वारा धोखे से मार दिए गए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फाँसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर सीधे आरा की ओर प्रस्थान किया, जहाँ उन्होंने बाबू कुंवर सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध मोर्चा संभाला। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्र में 1857 के विद्रोह के दौरान स्थानीय जमींदारों और यूरोपीय अधिकारियों के मध्य हिंसक संघर्ष हुआ, तथा छपरा में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में विद्रोहियों ने ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी थी। 4. पटना के कमिश्नर विलियम टेलर ने बिहार में विद्रोह के शुरुआती दौर में अत्यधिक नरमी बरतते हुए किसी भी स्थानीय नेता को गिरफ्तार करने से इनकार कर दिया था, जिससे सम्पूर्ण बिहार में अंग्रेजों की पकड़ मजबूत हो गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात् उनके छोटे भाई अमर सिंह द्वारा संचालित प्रतिरोधक गतिविधियों और संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों और कैमूर की पहाड़ियों को अपना सामरिक केंद्र बनाकर अंग्रेजों के विरुद्ध लंबे समय तक छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) जारी रखा और एक समानांतर प्रशासन का संचालन किया। 2. अमर सिंह के इस संघर्ष को कुचलने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों ने व्यापक सैन्य अभियान चलाए, जिसके तहत ब्रिटिश सेना ने जगदीशपुर के किले को तोप से उड़ा दिया और बाद में अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने पर उन्हें सार्वजनिक रूप से कलकत्ता में फाँसी दे दी गई थी। 3. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इन अभियानों में बिहार के अन्य स्थानीय नेताओं और सैनिकों ने भी उनका साथ दिया, तथा इस विद्रोह को दबाने के लिए कमिश्नर विलियम टेलर और जनरल विन्सेंट आयर ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाई थीं। 4. वर्ष 1858 के अंत तक ब्रिटिश सेना द्वारा चलाए गए दमन चक्र के दौरान अमर सिंह अंग्रेजों के हाथ नहीं लगे, बल्कि वे नेपाल की तराई क्षेत्र की ओर निकल गए जहाँ अज्ञात कारणों या बीमारी से उनकी मृत्यु हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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