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History of India
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, भू-राजस्व प्रणालियों और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (जबती) व्यवस्था के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और उनके प्रचलित बाजार मूल्यों का आकलन कर मालगुजारी का निर्धारण किया गया था, जिसमें भू-राजस्व का नकद भुगतान अनिवार्य किया गया था।
- 2. शाहजहाँ के शासनकाल में यूरोपीय यात्री बर्नियर और तावर्नियर भारत आए थे, तथा इसी काल में स्थापत्य कला अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची, किंतु औरंगजेब के शासनकाल में संगीत और चित्रकला पर राजकीय प्रतिबंध लगा दिया गया, जिसके फलस्वरूप कलाकारों ने क्षेत्रीय रियासतों (जैसे राजपूत और पहाड़ी राज्यों) का रुख किया।
- 3. मनसबदारी व्यवस्था में जहांगीर द्वारा 'दु-अस्मेह और सिह-अस्मेह' (Du-aspa and Sih-aspa) प्रणाली की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत मनसबदारों को बिना अपने जात पद (Jaat rank) को बढ़ाए ही अतिरिक्त घोड़ों के साथ अपने सवार पद (Swar rank) को बढ़ाने की अनुमति दी गई थी।
- 4. औरंगजेब की दक्कन नीति उसकी प्रशासनिक विफलता का एक प्रमुख कारण बनी, जिसके तहत उसने बीजापुर (1686) और गोलकुंडा (1687) को मुगल साम्राज्य में मिला लिया, लेकिन इसके परिणामस्वरूप मराठों के साथ उसका दीर्घकालिक और विनाशकारी संघर्ष शुरू हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक, सैन्य और आर्थिक इतिहास के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। अकबर की दहसाला प्रणाली ने भू-राजस्व को अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाया। जहांगीर ने मनसबदारी व्यवस्था में 'दु-अस्मेह' (दो घोड़े वाले) और 'सिह-अस्मेह' (तीन घोड़े वाले) का नया नियम जोड़ा, जिससे सैन्य शक्ति में वृद्धि हुई। शाहजहाँ के काल में स्थापत्य कला अपनी पराकाष्ठा पर थी और औरंगजेब के काल में संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। साथ ही, बीजापुर और गोलकुंडा का विलय उसकी दक्कन नीति का हिस्सा था। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मुगलकालीन प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था—विशेष रूप से मनसबदारी, जागीरदारी और भू-राजस्व प्रणालियों—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा प्रारंभ की गई मनसबदारी व्यवस्था में 'जात' (Jaat) पद मनसबदार के व्यक्तिगत वेतन और उसकी पदानुक्रमित स्थिति को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' (Swar) पद उसे अपने अधीन रखे जाने वाले घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों की संख्या को दर्शाता था।
2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दु-अस्मेह और सिह-अस्मेह' (Du-aspa and Sih-aspa) की नवीन उप-व्यवस्था जोड़ी गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने मूल 'सवार' पद को बढ़ाए बिना ही अतिरिक्त घोड़ों के साथ सैनिकों की संख्या बढ़ाने की अनुमति दी गई थी।
3. शाहजहाँ के शासनकाल में अपनाई गई 'माहवार' (Month-scale) प्रणाली के कारण जागीरों से वास्तविक आय और अनुमानित आय (जमा) के बीच के अंतर को पाटने का प्रयास किया गया, जिससे मनसबदारों को मिलने वाले राजस्व में कमी आ गई क्योंकि जागीरों से उतनी आय नहीं हो पाती थी जितना उनका मासिक वेतन तय किया गया था।
4. औरंगजेब के शासनकाल के अंतिम चरण में 'पैवकी' (Paibaik) भूमियों की कमी और दक्षिण भारत के अभियानों के कारण जागीरों के अभूतपूर्व संकट (Jagirdari Crisis) ने जन्म लिया, जिसके परिणामस्वरूप मनसबदारों और सम्राट के बीच प्रशासनिक अस्थिरता उत्पन्न हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित धार्मिक एवं सामाजिक सुधार संगठनों तथा उनके संस्थापकों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. सत्यशोधक समाज - ज्योतिराव फुले
2. देव समाज - शिवनारायण अग्निहोत्री
3. सेवा सदन - पंडिता रमाबाई
4. भारत सेवक समाज (Servants of India Society) - गोपाल कृष्ण गोखले
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकथा प्रणाली' (कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की अनिवार्य खेती) थोपी गई थी, जिसके विरुद्ध महात्मा गांधी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जे.बी. कृपलानी और महादेव देसाई के सहयोग से सफल सत्याग्रह का नेतृत्व किया था।
2. चंपारण कृषि समिति (Champaran Agrarian Enquiry Committee) के दबाव में ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा, और इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम' पारित करके तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया तथा किसानों से वसूले गए अवैध धन का एक हिस्सा वापस दिलाया गया।
3. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली माफ न किए जाने के कारण गांधीजी ने किसानों को राजस्व का भुगतान पूरी तरह रोक देने का आह्वान किया था, और इस आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल, इंदुलाल याज्ञिक और शकरलाल बैंकर्स जैसे स्थानीय नेताओं ने गांधीजी का सक्रिय रूप से साथ दिया था।
4. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान ही महात्मा गांधी ने पहली बार अखिल भारतीय स्तर पर 'असहयोग आंदोलन' का स्पष्ट खाका तैयार किया था, क्योंकि सरकार ने खेड़ा के किसानों की सभी माँगो को तुरंत स्वीकार करते हुए हमेशा के लिए भू-राजस्व समाप्त कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम 'महामल्ल' के शासनकाल में महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकश्म रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण करवाया गया था, जबकि कांचीपुरम के प्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण राजसिंह (नरसिंहवर्मन द्वितीय) ने करवाया था।
2. वातापी (बादामी) के चालुक्य वंश के सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत विवरण महाकवि रविचर्ति द्वारा रचित ऐहोल शिलालेख (प्रशस्ति) में प्राप्त होता है।
3. चोल राजवंश की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, जिसका विस्तृत उल्लेख उत्तरमेरूर अभिलेखों में मिलता है, के अंतर्गत ग्राम सभाओं के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (घड़े की पर्ची) नामक लोकतांत्रिक लॉटरी प्रणाली का प्रयोग किया जाता था।
4. हर्ष के कन्नौज धर्मसभा के दौरान महायान बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए चीनी यात्री ह्वेनसांग को सभा का अध्यक्ष बनाया गया था, किंतु ह्वेनसांग की इस सर्वोच्च धार्मिक स्थिति से ईर्ष्यावश हीनयानियों और ब्राह्मणों ने सभा के पंडाल में आग लगाने का असफल षड्यंत्र रचा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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