त्वरित लिंक्स
History of India
7 views
प्राचीन भारतीय इतिहास में वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन् प्रथम ने वातापी के चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया और 'वातापीकोंड' (वातापी का विजेता) की उपाधि धारण की थी।
- 2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय की नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन पर विजय का उल्लेख प्रख्यात पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख (Aihole Inscription) में मिलता है, जिसकी रचना रवि कीर्ति ने की थी।
- 3. चोल राजवंश के पुनरुत्थान का श्रेय विजयालय को जाता है, जिसने तंजावुर को अपनी राजधानी बनाया और 'निशुंभसुदनी' (दुर्गा) देवी के मंदिर का निर्माण करवाया था।
- 4. पल्लव राजा राजसिंह (नरिंसहवर्मन् द्वितीय) ने कांची में प्रसिद्ध 'कैलासनाथ मंदिर' का निर्माण करवाया था, जो द्रविड़ वास्तुकला की प्रारंभिक शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्धन राजवंश के शासक हर्षवर्धन को नर्मदा नदी के तट पर चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने पराजित किया था, जिसका सजीव वर्णन विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार रवि कीर्ति द्वारा रचित ऐहोल अभिलेख में मिलता है। इसके अतिरिक्त, पल्लव राजा नरसिंहवर्मन् प्रथम ने वातापी पर अधिकार कर 'वातापीकोंड' की उपाधि ली, विजयालय ने चोल साम्राज्य की नींव रखकर तंजावुर में निशुंभसुदनी मंदिर बनवाया, और राजसिंह (नरिंसहवर्मन् द्वितीय) ने कांची के प्रसिद्ध कैलासनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था।
Related Questions
→
छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के आरंभिक उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में षोडश महाजनपदों की स्पष्ट सूची मिलती है, जिनमें अंग, मगध, काशी और कौशल पूर्वी भारत के सबसे प्रमुख महाजनपद थे।
2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगीर (गिरिव्रज) थी, जो पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी और इसके उत्थान में यहाँ के प्रचुर मात्रा में उपलब्ध लौह भंडारों ने सामरिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
3. हर्यक वंश के संस्थापक बिम्बिसार ने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए आक्रामक विजय और वैवाहिक संबंधों की नीति अपनाई, जिसके तहत उसने मल्ल, वज्जी और चेदि राजवंशों की राजकुमारियों के साथ सीधे विवाह कर अपनी स्थिति अत्यंत मजबूत की थी।
4. मगध के शासक अजातशत्रु ने अपने पिता बिम्बिसार की हत्या कर सत्ता प्राप्त की थी, तथा उसी के शासनकाल में वज्जी संघ के साथ लंबे संघर्ष के दौरान वैशाली को पराजित करने के लिए युद्ध में 'रथमूसल' और 'महाशिलाकंटक' जैसे उन्नत नवीन हथियारों का प्रयोग किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1750 ई. में हुई किस संधि के बाद पेशवा मराठा साम्राज्य का वास्तविक और वंशानुगत शासक बन गया?
→
मराठा साम्राज्य के प्रशासन और छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य एवं राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी महाराज के केंद्रीय प्रशासन में 'अष्टप्रधान' नामक मंत्रिपरिषद थी, जिसमें प्रत्येक मंत्री राजा के अधीन सीधे कार्य करता था और इनमें 'पेशवा' (या पंत प्रधान) सबसे महत्वपूर्ण मंत्री था जो सामान्य प्रशासन और वित्त की देखरेख करता था, जबकि सेना का प्रमुख 'सेनापति' (या सर-ए-नौबत) होता था जो मंत्री परिषद का पदेन सदस्य नहीं होता था बल्कि एक सैन्य अधिकारी था।
2. शिवाजी ने अपने राज्य की आय बढ़ाने के लिए पड़ोसी मुगल क्षेत्रों और अन्य राज्यों से 'चौथ' (कुल राजस्व का एक चौथाई हिस्सा) और 'सरदेशमुखी' (अतिरिक्त 10 प्रतिशत कर) वसूलने की व्यवस्था की, जिसमें सरदेशमुखी वसूलने का मुख्य आधार शिवाजी द्वारा अपने आप को महाराष्ट्र का मुख्य 'सरदेशमुख' (सर्वोच्च जमींदार) दावा करना था।
3. शिवाजी की घुड़सवार सेना दो भागों में विभाजित थी—'पागा' (राजकीय सीधे नियंत्रण वाले घुड़सवार जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र दिए जाते थे) और 'सिलहदार' (जो अपने घोड़े और हथियार स्वयं लाते थे), और पागा सेना का प्रबंधन 'हवलदार' और 'जुमलादार' जैसे अधिकारियों के माध्यम से किया जाता था।
4. शिवाजी ने पारंपरिक 'इक्ता' और 'जागीरदारी' प्रथा को प्रोत्साहित करते हुए सैन्य अधिकारियों को भूमि अनुदान (सरंजाम) देने की प्रणाली को सबसे पहले लागू किया था, जिससे प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिला और केंद्रीय सत्ता सुदृढ़ हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और इसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की गई।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जब बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया और रविंद्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर 'राखी बंधन दिवस' मनाया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा पर विशेष बल दिया गया, जिसके तहत कलकत्ता में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई और इसके प्रथम अध्यक्ष रबींद्रनाथ ठाकुर को बनाया गया था।
4. इस आंदोलन के दौरान उग्रवादी नेताओं के प्रभाव से पारंपरिक भारतीय मेलों, लोक कलाओं और स्वदेशी उत्पादों के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिला था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) प्रणाली को लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया और कुल लगaन का 10/11 भाग ब्रिटिश सरकार को तथा 1/1 भाग जमींदारों को अपने प्रशासनिक व्यय के लिए रखने की अनुमति दी गई।
2. रयतवारी व्यवस्था मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसिडेंसी में लागू की गई थी, जहाँ किसानों (रयतों) को भूमि का मालिक माना गया और सरकार के साथ उनका सीधा भू-राजस्व समझौता हुआ, जिसमें लगान की दरें पूरी तरह स्थाई थीं और कभी संशोधित नहीं की जाती थीं।
3. महालवारी व्यवस्था को उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू किया गया था, जिसमें भू-राजस्व निर्धारण के लिए व्यक्तिगत किसानों के स्थान पर पूरे गाँव (महाल) को इकाई माना गया और सामूहिक रूप से गाँव के मुखिया या लंबरदार को राजस्व चुकाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारत का पारंपरिक कृषि ढांचा छिन्न-भिन्न हो गया, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक कर का बोझ बढ़ा, और कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण होने के बावजूद किसानों की क्रय शक्ति में भारी गिरावट आई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.