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History of India
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, सैन्य एवं राजस्व सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नगद वेतन देने की स्थायी व्यवस्था शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा लागू की ताकि सैन्य भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लग सके।
- 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि) स्थानांतरित की, जिसका प्रमुख उद्देश्य मंगोल आक्रमणों से सुरक्षा प्राप्त करना तथा साम्राज्य के मध्य भाग में प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना था, किंतु यह योजना कुप्रबंधन और परिवहन की कठिनाइयों के कारण असफल रही।
- 3. फ़िरोज़ शाह तुगलक ने कृषि को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण कराया, जिनमें 'हक-ए-शर्ब' नामक सिंचाई कर उन किसानों पर लगाया गया जो राज्य की नहरों से पानी प्राप्त करते थे, और यह कर कुल उपज का 1/10वां हिस्सा निर्धारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। अलाउद्दीन खिलजी ने प्रशासनिक केंद्रीयकरण और सैन्य सुधारों के अंतर्गत सैनिकों को नगद वेतन देना शुरू किया, 'दाग' (घोड़ों को दागना) और 'हुलिया' प्रथा शुरू की। मुहम्मद बिन तुगलक ने साम्राज्य के केंद्रीय स्थान और मंगोल खतरों से बचने के लिए राजधानी परिवर्तन किया था। फ़िरोज़ शाह तुगलक ने सिंचाई के लिए पाँच बड़ी नहरों का निर्माण कराया और शरीयत के नियमों के तहत 'हक-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) लगाया। इस कालखंड के विस्तृत इतिहास के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गाय का दूधहती थी, और इस काल में गाय (अघन्या) को सबसे पवित्र तथा आर्थिक विनिमय का मुख्य साधन माना जाता था।
2. उत्तर वैदिक काल में सभा और समिति जैसी राजनीतिक संस्थाओं का प्रभाव कम होने लगा, तथा शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव की कथा के माध्यम से आर्यों के पूर्वी उत्तर प्रदेश और गंडक (नदाणि) नदी की घाटी की ओर विस्तार का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
3. ऋग्वैदिक समाज मूल रूप से पितृसत्तात्मक था, किंतु महिलाओं को उपनयन संस्कार, वेदों के अध्ययन और सभा-समिति की बैठकों में भाग लेने की पूर्ण स्वतंत्रता थी, और अपाला, घोषा तथा लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना की थी।
4. वैदिक काल में तांबे और कांसे के लिए 'अयस' शब्द का प्रयोग किया जाता था, और उत्तर वैदिक काल में लोहे की खोज के बाद इसे 'श्याम अयस' या 'कृष्ण अयस' कहकर पुकारा गया, जिससे कृषि उत्पादन और स्थायी बस्तियों का तेजी से विकास हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अकबर ने जजिया कब हटाया?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे द्वारा घटित घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में डमडम और बैरकपुर के शस्त्रागारों में नई 'एनफील्ड राइफल' और उसमें प्रयुक्त होने वाले कारतूसों के संबंध में यह अफवाह या तथ्य सामने आया कि इन कारतूसों के आवरण में गाय और सूअर की चर्बी का लेप लगाया गया है, जिसे लोड करने से पहले सैनिकों को दांतों से काटना पड़ता था।
2. बैरकपुर छावनी की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग और ब्रिटिश उत्पीड़न के विरोध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों एडजुटेंट लेफ्टिनेंट बो और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई।
3. मंगल पांडे की फाँसी के उपरांत बैरकपुर छावनी की 34वीं और 19वीं नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंटों को ब्रिटिश सरकार द्वारा तुरंत सम्मानित किया गया और भविष्य के असंतोष को रोकने के लिए सेना में एनफील्ड राइफलों के प्रयोग को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के तहत भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया और 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' तथा 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का नया पद सृजित किया गया, जिसे सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद प्रदान की गई थी।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (1858) में देशी रियासतों के शासकों को आश्वस्त किया गया कि भविष्य में उनके राज्यों का विलय नहीं किया जाएगा, तथा 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया, जिससे दत्तक पुत्र लेने के उनके अधिकार को मान्यता मिल गई।
3. इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रजा के धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप करने, प्राचीन अधिकारों, रीति-रिवाजों का सम्मान करने तथा नस्ल या धर्म के भेदभाव के बिना योग्यता के आधार पर सार्वजनिक सेवाओं में भारतीयों को नियुक्त करने का स्पष्ट आश्वासन दिया था।
4. विद्रोह के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार की नीति को अनिश्चित काल के लिए जारी रखते हुए अधिनियम में यह प्रावधान किया गया कि भारतीय सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात कम किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी बगावत को दोबारा रोका जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन धर्म के श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों के बीच हुए ऐतिहासिक विभाजन का मुख्य कारण पाटलिपुत्र में आयोजित प्रथम जैन संगीति के दौरान स्थूलभद्र और भद्रबाहु के अनुयायियों के बीच अनुशासन और वस्त्र पहनने की परंपरा को लेकर उत्पन्न मतभेद था।
2. बौद्ध धर्म की महायान शाखा और हीनायान (स्थविरवाद) शाखा के बीच मूल सैद्धांतिक अंतर यह है कि जहाँ महायान संप्रदाय बुद्ध को भगवान मानकर उनकी मूर्ति पूजा और बोधिसत्वों की परोपकारी अवधारणा में विश्वास करता है, वहीं हीनायान संप्रदाय बुद्ध को एक महापुरुष मानता है तथा व्यक्तिगत निर्वाण प्राप्ति पर जोर देता है।
3. बौद्ध धर्म के त्रिरिपिटक (सुत्तपिटक, विनयपिटक और अभिधम्मपिटक) में से 'विनयपिटक' मुख्य रूप से संघ के भिक्षु-भिक्षुओं के लिए आचार-संहिता और अनुशासन के नियमों का संकलन प्रस्तुत करता है।
4. महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित जैन धर्म के मूल पंचमहाव्रतों में से 'ब्रह्मचर्य' का सिद्धांत पार्श्वनाथ द्वारा दिए गए चार व्रतों में अंतिम और पाँचवें महाव्रत के रूप में जोड़ा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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