त्वरित लिंक्स
History of India
12 views
गुप्तकालीन प्रशासन, राजस्व प्रणाली तथा भूमि अनुदान (अग्रहार) व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. गुप्त काल में 'भूमिछिद्रन्याय' (भूमि के अप्रयुक्त या बंजर हिस्सों को कृषि योग्य बनाने से संबंधित कानूनी अवधारणा) के तहत ब्राह्मणों, मंदिरों और बौद्ध विहारों को कर-मुक्त भूमि दी जाती थी, जिसे 'अग्रहार' कहा जाता था।
- 2. राजा द्वारा दान में दी गई इन भूमियों पर स्थानीय कृषकों और मजदूरों को काम करना पड़ता था, और शूद्रों को इन भूमियों पर स्थायी रूप से स्वतंत्र कृषक के रूप में बसने का पूर्ण कानूनी अधिकार प्राप्त था।
- 3. गुप्त साम्राज्य की प्रांतीय इकाई को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिसके प्रमुख को 'उपरिक' कहा जाता था, जबकि 'विषय' (जिला) के प्रशासनिक प्रमुख को 'विषयपति' कहा जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
गुप्त काल (Golden Age of India) में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और भूमि अनुदान व्यवस्था का व्यापक विस्तार हुआ था। कथन 1 सही है क्योंकि 'भूमिछिद्रन्याय' के अंतर्गत बंजर व अप्रयुक्त भूमि को कर-मुक्त करके ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थाओं को दान दिया जाता था। कथन 2 गलत है क्योंकि इन भूमि अनुदानों के कारण कृषकों और श्रमिकों की स्थिति दयनीय होने लगी और वे भूमि से बंधते चले गए, तथा शूद्रों को स्वतंत्र कृषक के रूप में स्थापित होने का कोई व्यापक कानूनी अधिकार नहीं मिला था बल्कि वे अधिकतर दास या बटाईदार के रूप में कार्य करते थे। कथन 3 पूरी तरह सही है; गुप्त प्रशासन में साम्राज्य 'भुक्ति' (प्रांत) में विभाजित था जिसके प्रशासक 'उपरिक' होते थे, और भुक्तियाँ 'विषय' (जिलों) में बंटी होती थीं जिनके प्रमुख 'विषयपति' कहलाते थे। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
मुगल साम्राज्य के कालीन राजनीतिक, प्रशासनिक एवं धार्मिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जहाँगीर के शासनकाल में स्थापित 'दुस्पासिह-सिंहस्पा' प्रणाली के अंतर्गत मनसबदारों को अपने नियत सवार पद से दोगुने घोड़े रखने होते थे, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त भत्ता प्रदान किया जाता था।
2. शाहजहां के शासनकाल के उत्तरार्ध में साम्राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार लाने के लिए भू-राजस्व निर्धारण हेतु 'दहशाल' पद्धति को पूर्णतः समाप्त कर केवल 'नस्क' पद्धति को अनिवार्य कर दिया गया था।
3. औरंगजेब के शासनकाल में जारी किए गए फरमानों के तहत संगीत पर आधिकारिक प्रतिबंध लगा दिया गया था, किंतु मुगल दरबार में फारसी भाषा में ऐतिहासिक ग्रंथ लिखे जाने की परंपरा को उसने पूर्व की भांति राजकीय संरक्षण प्रदान करना जारी रखा।
4. मुगल सम्राटों में अकबर ने सर्वप्रथम राजपूतों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने की नीति अपनाई, जिसके तहत उसने आमेर के राजा भारमल की पुत्री से विवाह किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण, गांधी-इरविन समझौते तथा गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की शर्त स्वीकार की थी, किंतु भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी की सजा को माफ करने की गांधीजी की मांग को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया गया था।
2. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, और इस सम्मेलन में उन्होंने अछूतों के लिए डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा मांग किए गए 'पृथक निर्वाचक मंडल' का पूर्ण समर्थन किया था।
3. गांधी-इरविन समझौते के अनुपालन के परिणामस्वरूप कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर दिया था तथा कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते का अनुमोदन किया गया था।
4. वर्ष 1932 में जब गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन से निराश होकर भारत लौटने के पश्चात पुनः सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया, तब वाइसराय लॉर्ड विलिंगडन ने अत्यधिक दमनकारी नीतियां अपनाते हुए कांग्रेस को गैर-कानूनी घोषित कर दिया और दमनकारी अध्यादेशों के माध्यम से आंदोलन को कुचल दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगल काल में "चाचर" भूमि:
→
अकबर के समय मुगल साम्राज्य कितने सूबों (प्रांतों) में विभाजित था?
→
मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक, धार्मिक और सैन्य विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में स्थापित 'मनसबदारी व्यवस्था' केवल सैन्य अधिकारियों तक सीमित थी, और इसमें 'जात' पद अधिकारी के व्यक्तिगत वेतन तथा 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले गुड़सवार सैनिकों की संख्या को निर्धारित करता था, जिसे मंगोलों की दशमलव प्रणाली के आधार पर संगठित किया गया था।
2. जहाँगीर के काल में मुगल चित्रकला ने अपने चरमोत्कर्ष को प्राप्त किया, तथा उसके दरबार में उस्ताद मंसूर पशु-पक्षियों के चित्रों के लिए और अबुल हसन портреतों (व्यक्तिचित्रों) के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध थे।
3. शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान वास्तुकला में संगमरमर के व्यापक प्रयोग और 'पिएत्रा दुरा' (Pietra Dura - जड़वा काम) तकनीक का उत्कृष्ट विकास हुआ, जिसके तहत मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस) का निर्माण भी करवाया गया था।
4. औरंगजेब ने अपने शासनकाल के प्रारंभिक दौर में संगीत पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, जरोखा दर्शन और तुलादान जैसी प्रथाओं को समाप्त कर दिया था, तथा उत्तर भारत के प्रमुख हिंदू मंदिरों (जैसे काशी विश्वनाथ और मथुरा के केशवदेव मंदिर) को तुड़वाकर शाही फरमान जारी किए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.