त्वरित लिंक्स
History of India
8 views
वैदिक सभ्यता और साहित्य के विकास क्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक उपयोग युद्धक अस्त्र-शस्त्रों और कृषि के भारी उपकरणों के निर्माण में किया जाता था, जिसे 'कृष्ण अयस' कहा गया है।
- 2. उत्तर वैदिक कालीन ग्रंथों में गोत्र प्रथा की स्थापना हुई, जिसका शाब्दिक अर्थ वह स्थान था जहाँ संपूर्ण कुल का गोधन एक साथ पाला जाता था, और इस काल में एक ही गोत्र में विवाह वर्जित कर दिए गए।
- 3. शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव और गौतम राहुगण की कथा का उल्लेख है, जो आर्यों के पश्चिम से पूर्व की ओर (सरयू नदी के पार) भौगोलिक विस्तार और अग्नि के प्रसार को दर्शाती है।
- 4. वैदिक अनुष्ठानों और उनके शुद्ध संपादन को समझने के लिए रचे गए छह 'वेदांगों' में शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि 'कृष्ण अयस' (लोहे) का ज्ञान एवं व्यापक उपयोग ऋग्वैदिक काल में नहीं, बल्कि उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ईसा पूर्व के बाद) में प्रारंभ हुआ था। ऋग्वैदिक लोग लोहे से परिचित नहीं थे, वे तांबे या कांस्य ('अयस') का प्रयोग करते थे। कथन 2, 3 और सही हैं। उत्तर वैदिक काल में गोत्र व्यवस्था संस्थागत हुई और शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव की कथा मिलती है जो आर्यों के सदाानीरा (गंडक) नदी तक के विस्तार को दर्शाती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह के नेतृत्व तथा संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा पर अधिकार करने के पश्चात जब ब्रिटिश सेनापति मेजर विंसेंट आयर ने जगदीशपुर पर आक्रमण किया, तब बाबू कुंवर सिंह ने मध्य भारत की ओर प्रस्थान किया और बांदा, रीवा तथा लखनऊ में नाना साहब की सेना के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध सफल सैन्य अभियान चलाए।
2. बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु (26 अप्रैल 1858) के पश्चात उनके भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध को समाप्त कर दिया और ब्रिटिश सरकार के साथ संधि कर ली थी।
3. अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों से ब्रिटिश सेना के विरुद्ध एक प्रभावी और लंबी छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) नीति का संचालन किया, तथा जगदीशपुर के जंगलों से एक समानांतर सरकार चलाई।
4. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस प्रतिरोध को कुचलने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों ने इस क्षेत्र में अत्यधिक दमनकारी नीतियां अपनाईं, जिनमें गांवों को जलाना और विद्रोहियों को सामूहिक रूप से दंडित करना शामिल था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस की राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित होने के बाद, सुभाष चंद्र बोस ने आंदोलन का समर्थन करते हुए फॉरवर्ड ब्लॉक के माध्यम से देश के भीतर सशस्त्र संघर्ष का गुप्त रूप से नेतृत्व किया।
2. जर्मनी में रहने के दौरान सुभाष चंद्र बोस ने 'फ्री इंडिया सेंटर' (Free India Center) की स्थापना की और बर्लिन रेडियो से प्रसारण करते हुए महात्मा गांधी को पहली बार 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था।
3. अक्तूबर 1943 में सिंगापुर में सुभाष चंद्र बोस ने 'अस्थायी सरकार - आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) के गठन की घोषणा की, जिसे जापान, जर्मनी और इटली सहित कुल नौ धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) ने आधिकारिक मान्यता प्रदान की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वास्को डी गामा की 1498 में कालीकट की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान वहाँ के स्थानीय शासक 'जमूरीन' (सामुतिरी) ने पुर्तगालियों का स्वागत किया, क्योंकि कालीकट के अरब व्यापारियों ने पुर्तगाली व्यापारिक एकाधिकार का तुरंत समर्थन किया था।
2. भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय के रूप में फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल नीति) की शुरुआत की, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर के व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करना और अरबी-मिस्र के व्यापारिक वर्चस्व को समाप्त करना था।
3. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा पर अधिकार कर लिया और पुर्तगालियों को स्थानीय भारतीय महिलाओं के साथ विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया।
4. नुनिओ डी कुन्हा ने पुर्तगाली मुख्यालय को कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया और 1534 में बेसिन तथा 1535 में दीव पर अधिकार कर उत्तर भारत के मुगलों के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पानीपत का प्रथम युद्ध किसके बीच हुआ?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और उसकी प्रकृति के संबंध में विभिन्न विचारकों द्वारा दिए गए निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेंजामिन डिजरायली (Benjamin Disraeli) ने ब्रिटिश संसद में यह तर्क दिया था कि 1857 का विद्रोह केवल एक साधारण सिपाही विद्रोह न होकर एक राष्ट्रीय विरोध (National Revolt) था, क्योंकि इसके व्यापक समर्थन में ग्रामीण जनता और पारंपरिक समाज भी शामिल था।
2. इतिहासकार लॉरेंस और सीले (Sir John Seeley) ने इसे पूर्णतः 'स्वदेशी और देशभक्ति से रहित एक स्वार्थी सिपाही विद्रोह' करार दिया था, जिसका भारतीय जनता से कोई सरोकार नहीं था।
3. बीडी सावरकर ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इसे सुनियोजित और संगठित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम बताया, जबकि डॉ. आरसी मजूमदार ने इसे 'न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय, और न ही स्वतंत्रता संग्राम' माना।
4. कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने इसे केवल सामंती तत्वों का प्रतिक्रियावादी संघर्ष माना, जिसे आधुनिकता और प्रगति के विरुद्ध पारंपरिक शक्तियों की अंतिम छटपटाहट बताया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.