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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में सत्ता के विकेंद्रीकरण और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की वास्तविक राजनीतिक स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दिल्ली के विद्रोही सिपाहियों और नवाबों द्वारा प्रशासन के सुचारू संचालन के लिए दस सदस्यों (छह सैन्य और चार नागरिक) वाली एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) का गठन किया गया था, जिसके सभी महत्वपूर्ण निर्णय सम्राट की व्यक्तिगत अनुमति के बिना लिए जाते थे।
- 2. बहादुर शाह जफर इस विद्रोह के नाममात्र के प्रतीक और 'शहंशाह-ए-हिन्दुस्तान' अवश्य बनाए गए थे, किंतु उनकी स्थिति इतनी विवश थी कि वे अपने ही राजमहल के भीतर विद्रोही सैनिकों की अनुशासनहीनता, आर्थिक तंगी और मनमानी कार्यप्रणाली पर कोई प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं कर सके थे।
- 3. सितंबर 1857 में ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनradhikar (पुनः अधिकार) करने के पश्चात, बहादुर शाह जफर को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर रंगून (बर्मा) निर्वासित कर दिया था, जहाँ वर्ष 1862 में उनका निधन हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के समय दिल्ली में विद्रोही सिपाहियों ने मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किया था। प्रशासनिक और सैन्य नियंत्रण के लिए एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' का गठन किया गया था, जिसमें सैन्य और नागरिक दोनों प्रतिनिधि शामिल थे। हालांकि जफर को सर्वोच्च प्रतीक बनाया गया था, वास्तविक शक्ति सैनिकों के हाथ में थी और सम्राट उनकी मनमानी के कारण बेहद असहाय महसूस करते थे। पतन के बाद उन्हें रंगून निर्वासित कर दिया गया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मौर्योत्तर काल तथा गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों ने सीसे (Lead) और प्रोटीन के सिक्कों का मोठ्या पैमाने पर प्रचलन किया, तथा उनके अभिलेखों में भूमि अनुदान (Brahmanas and Buddhist monks) देने की प्रथा का सबसे पहला पुरातात्विक साक्ष्य मिलता है।
2. गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त के 'प्रयाग प्रशस्ति' (इलाहाबाद स्तंभ लेख), जिसकी रचना उसके संधि विग्रहिक हरिसेंण ने की थी, में आर्यावर्त के नौ और दक्षिण भारत के बारह राजाओं को पराजित करने का उल्लेख मिलता है।
3. गुप्तकाल में सुदूर दक्षिण के साथ व्यापारिक गतिविधियों के क्षीण होने के बावजूद, रोम के साथ व्यापार में अत्यधिक वृद्धि हुई और गुप्त शासकों ने रोमन सम्राटों की तर्ज पर सबसे शुद्ध और भारी मात्रा में स्वर्ण सिक्के ('दिनार') जारी किए।
4. फाह्यान (Fa-Hien), जो चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में भारत आया था, ने अपने विवरण में मध्य देश (गंगा घाटी) की समृद्धि, शाकाहार की प्रधानता तथा दंड विधान की कठोरता (फांसी और अंग-भंग) का विस्तार से उल्लेख किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ऋग्वैदिक कालीन राजनीतिक संगठन और सामाजिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'विदथ' आर्यों की सबसे प्राचीन संस्था थी, जिसका प्रयोग धार्मिक, आर्थिक और सैन्य कार्यों के साथ-साथ विचार-विमर्श के लिए भी किया जाता था, और इसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी होती थी।
2. राजा का पद वंशानुगत होने के बावजूद, 'सभा' और 'समिति' जैसी संस्थाएं राजा की निरंकुशता पर नियंत्रण रखती थीं, जहाँ 'समिति' में आम जन (विश) के लोग भाग लेते थे और यह राजा के निर्वाचन या उसकी सत्ता की पुष्टि करने का अधिकार रखती थी।
3. इस काल में समाज स्पष्ट रूप से कठोर वर्ण व्यवस्था पर आधारित था, जहाँ जन्म के आधार पर शूद्रों को अछूत माना जाता था और पुरोहित वर्ग (ब्राह्मण) को समाज में सर्वोच्च आर्थिक व राजनीतिक विशेषाधिकार प्राप्त थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने मुंबई में प्रस्ताव पारित किया, तब महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का मंत्र दिया था, लेकिन सुभाष चंद्र बोस देश के भीतर इस आंदोलन के भूमिगत नेतृत्व (Underground Leadership) का हिस्सा थे और उन्होंने राम मनोहर लोहिया तथा अरुणा आसफ अली के साथ मिलकर इसकी योजना बनाई थी।
2. जापान के नियंत्रण वाले सिंगापुर में रास बिहारी बोस के प्रयासों से स्थापित 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आज़ाद हिंद फौज' का सर्वोच्च सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व जब सुभाष चंद्र बोस के हाथों में आया, तो उन्होंने सिंगापुर में 'अस्थाई आज़ाद भारत सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की थी।
3. आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा था, तथा सुभाष चंद्र बोस ने ही सिंगापुर से रेडियो प्रसारण के दौरान महात्मा गांधी को सर्वप्रथम 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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गुप्त साम्राज्य (Golden Age) और मौर्योत्तर काल की प्रशासनिक तथा आर्थिक प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भूमि अनुदान (Agraharas and Brahmadeya) की प्रथा का विस्तार बड़े पैमाने पर हुआ, जिसके परिणामस्वरूप धार्मिक और प्रशासनिक अधिकारों के साथ-साथ 'सामंतवाद' के बीज अंकुरित होने लगे, किंतु इस काल में सिक्कों की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई और तांबे के सिक्कों का कुल प्रचलन सातवाहन तथा कुषाण काल की तुलना में नगण्य हो गया था।
2. सातवाहन काल में प्रचलित 'अग्रहर' व्यवस्था के अंतर्गत ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि दी जाती थी, और इसी काल में भूमिदान पत्रों को ताम्रपत्रों (Copper Plates) पर उत्कीर्ण कराने की परंपरा का औपचारिक आरंभ हुआ था।
3. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए स्वर्ण सिक्के, जिन्हें 'दीनार' कहा जाता था, रोम के स्वर्ण सिक्कों (Denarius) के मुकाबले शुद्धता और वजन में कहीं अधिक उत्कृष्ट थे, तथा गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम के शासनकाल में सर्वाधिक प्रकार के मयूर शैली के स्वर्ण सिक्के चलाए गए थे।
4. मौर्योत्तर काल में भारत और रोमन साम्राज्य के मध्य होने वाले फले-फूल रहे समुद्री व्यापार का मुख्य केंद्र भरूच (भृगुकच्छ / Barygaza) था, जिसका विस्तृत समकालीन विवरण यूनानी ग्रंथ 'पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी' (Periplus of the Erythraean Sea) में मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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शिवाजी महाराज ने अपनी नौसेना का मुख्य केंद्र कहाँ स्थापित किया था?
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