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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली के घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मेरठ के विद्रोही सिपाहियों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने के बाद, वृद्ध और अनिच्छुक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को औपचारिक रूप से भारत का सम्राट ('शहंशाह-ए-हिन्दुस्तान') घोषित किया गया, जिससे इस सैन्य विद्रोह को एक अखिल भारतीय राजनीतिक वैधता प्राप्त हुई।
- 2. दिल्ली में विद्रोह के संचालन और प्रशासनिक निर्णयों के लिए एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) का गठन किया गया था, जिसमें नागरिक और सैन्य दोनों सदस्य शामिल थे और इसके अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय सम्राट के व्यक्तिगत आदेशों से स्वतंत्र रूप से लिए जाते थे।
- 3. सितंबर 1857 में ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन और हडसन के नेतृत्व में दिल्ली पर पुनः अधिकार किए जाने के उपरांत, बहादुर शाह जफर को हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार किया गया तथा उनके पुत्रों एवं पौत्रों को अंग्रेजों द्वारा सरेआम गोली से उड़ा दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली क्रांतिकारियों का मुख्य केंद्र बन गया था। मेरठ से आए सिपाहियों ने अनिच्छुक और वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अपना नेता स्वीकार करने के लिए विवश किया, जिससे इस विद्रोह को प्रतीकात्मक रूप से संपूर्ण देश की मान्यता मिली। दिल्ली में प्रशासनिक व्यवस्था चलाने के लिए दस सदस्यों (छह सैन्य और चार नागरिक) की एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' बनाई गई थी, जो प्रशासनिक और सैन्य मामलों के निर्णय लेती थी और सम्राट की स्थिति अधिकांशतः संवैधानिक प्रमुख जैसी थी। सितंबर 1857 में ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः कब्जा कर लिया गया, जॉन निकलसन इस अभियान में मारा गया, और जफर को हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार कर मेजर हडसन द्वारा उनके पुत्रों की हत्या कर दी गई। इस ऐतिहासिक घटना के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में व्यापारिक विस्तार तथा राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फ्रांसिस कैरो ने मुगल सम्राट औरंगजेब से अधिकार पत्र प्राप्त कर वर्ष 1668 में भारत में पहली फ्रांसीसी फैक्ट्री की स्थापना सूरत में की थी, जबकि इसके दो वर्ष पश्चात मार्कारा के नेतृत्व में मसूलिपट्टनम में दूसरी फ्रांसीसी फैक्ट्री स्थापित हुई।
2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में वास्तविक राजनीतिक और व्यापारिक सुदृढ़ीकरण वर्ष 1651 में शाहशुजा द्वारा जारी 'निशान' (राजकीय आज्ञापत्र) के माध्यम से मिला, जिसके तहत मात्र 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले बंगाल में मुक्त व्यापार करने का विशेषाधिकार प्राप्त हुआ।
3. भारत में एंग्लो-फ्रेंच प्रतिद्वंद्विता (कर्नाटक युद्ध) के दौरान, प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746-48) ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध का परिणाम था, जिसका अंत एक्स-ला-शापेली की संधि से हुआ और इसके तहत अंग्रेजों को मद्रास वापस मिल गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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बंगाल विभाजन (1905) और उसके परिणामस्वरूप प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई थी, जिसमें ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का संकल्प लिया गया था।
2. विभाजन के विरोधस्वरूप 16 अक्टूबर 1905 को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, गंगा स्नान किया और 'वंदे मातरम्' गाते हुए सड़कों पर जुलूस निकाले।
3. इस आंदोलन के दौरान मुस्लिम समुदाय की बड़े पैमाने पर सक्रिय भागीदारी रही, और पूर्वी बंगाल के मुस्लिम बहुसंख्यक किसानों ने नवाब सलीमुल्लाह के नेतृत्व में हिन्दू जमींदारों के विरुद्ध स्वदेशी आंदोलन का पूर्ण समर्थन किया था।
4. स्वदेशी आंदोलन के प्रसार के साथ-साथ पारंपरिक शिक्षा प्रणाली के बहिष्कार और राष्ट्रीय नियंत्रण वाली शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अक्टूबर 1905 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका तथा विद्रोही सिपाहियों और प्रशासनिक वास्तविकताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के विद्रोही सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचने पर बहादुर शाह जफर ने तुरंत उत्साहपूर्वक इस विद्रोह का नेतृत्व स्वीकार कर लिया था तथा वे संपूर्ण विद्रोह के योजनाकार और मुख्य सैन्य रणनीतिकार के रूप में दिल्ली के मोर्चे पर सक्रिय रहे थे।
2. सम्राट बहादुर शाह जफर की अत्यधिक आयु और इस संघर्ष में उनकी अनिच्छुक व बाध्यकारी संलिप्तता के कारण दिल्ली का वास्तविक सैन्य एवं प्रशासनिक नियंत्रण 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के हाथों में था, जिसमें विभिन्न रेजिमेंटों से आए निर्वाचित सिपाही निर्णय लेते थे।
3. बरेली से आए बख्त खान ने दिल्ली पहुँचकर मुगल दरबार और विद्रोही सेना को पुनर्गठित करने का प्रयास किया, किंतु ब्रिटिश सेना द्वारा सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार कर लिए जाने के बाद जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'मौलवी फैजाबाद' भी कहा जाता है, और उनके दमन के लिए ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील और कैंपबेल ने अत्यंत आक्रामक रणनीतियाँ अपनाई थीं।
2. बरेली में रोहिलखंड के पूर्व शासक हाफिज रहमत खान के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह का सफल नेतृत्व किया था, जिसे अंततः सर कॉलिन कैंपबेल ने भारी सैन्य बल के साथ पराजित किया।
3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व लियाकत अली ने किया था, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सेनापति जनरल नील द्वारा पराजित किया गया और इस शहर पर अंग्रेजों ने पुनः पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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