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History of India
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वैदिक सभ्यता एवं वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक ज्ञान था और इसे 'कृष्ण अयस' तथा 'श्यामा अयस' कहा जाता था, जिसका उपयोग बड़े पैमाने पर युद्धक अस्त्र-शस्त्र और कृषि के भारी उपकरणों के निर्माण में किया जाता था।
- 2. उत्तर वैदिक काल में आर्यों का भौगोलिक विस्तार पूर्वी उत्तर प्रदेश (कोसल) और बिहार (विदेह) क्षेत्र तक हो गया था, जिसका उल्लेख शतपथ ब्राह्मण में वर्णित 'वैधान माधव और गौतम राहुगण' की कथा से मिलता है।
- 3. ऋग्वेद में उल्लिखित 'दशराज युद्ध' (दस राजाओं का युद्ध) परूष्णी (रावी) नदी के तट पर लड़ा गया था, जिसमें भरत कुल के राजा सुदास ने दस राजाओं के संघ को पराजित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि ऋग्वैदिक काल के लोगों को लोहे का ज्ञान नहीं था; वे केवल तांबे और कांसे (अयस) से परिचित थे। लोहे (जिसे 'कृष्ण अयस' या 'श्यामा अयस' कहा गया) का ज्ञान उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ईसा पूर्व के बाद) में हुआ था। कथन 2 सही है, उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार गंगा-यमुना दोआब से आगे बढ़कर पूर्व में सदानीरा (गंडक) नदी तक हो गया था, और शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव की कथा इसी विस्तार का संकेत देती है। कथन 3 भी बिल्कुल सही है, परूष्णी (आधुनिक रावी) नदी के तट पर त्रत्सु भरत कुल के राजा सुदास और दस जन (कबीलों) के संघ के बीच 'दशराज युद्ध' हुआ था जिसमें सुदास की विजय हुई थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, कला-संस्कृति तथा विज्ञान के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में 'कुमारामार्त्य' सबसे महत्वपूर्ण प्रांतीय और केंद्रीय अधिकारी होते थे, जिनकी नियुक्ति सीधे सम्राट द्वारा की जाती थी, और इन्हें प्रशासनिक सुविधा के लिए 'विषय' (ज़िलों) के प्रशासन से भी जोड़ा जाता था जिनका प्रमुख 'विषयपति' कहलाता था।
2. इस काल में तांबे के सिक्कों की तुलना में सोने के सिक्के (दीनार) बहुत कम मात्रा में जारी किए गए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह से समाप्त हो चुका था और अर्थव्यवस्था पूरी तरह वस्तु-विनिमय प्रणाली पर आधारित हो गई थी।
3. गुप्तकालीन वास्तुकला में पहली बार ईंटों और पत्थरों से बने पक्के मंदिरों के निर्माण की शुरुआत हुई, जिसमें उत्तर भारत में 'नागर शैली' के मंदिरों (जैसे देवगढ़ का दशावतार मंदिर और भुमाराम का शिव मंदिर) का उत्कृष्ट विकास देखने को मिलता है।
4. गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में आर्यभट्ट ने अपनी पुस्तक 'आर्यभटिय' में पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने (घूर्णन) तथा सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के वास्तविक वैज्ञानिक कारणों का प्रतिपादन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी की घटना के ऐतिहासिक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बैस मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी धार्मिक आक्रोश उत्पन्न किया।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के खुले तौर पर विरोध में बगावत करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई।
3. बैरकपुर छावनी की इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने संपूर्ण भारतीय सेना से एनफील्ड राइफल का प्रयोग हमेशा के लिए वापस ले लिया और सभी सैनिकों से लिखित रूप में माफी मांगकर स्थिति को शांत किया।
4. मंगल पांडे द्वारा विद्रोह की शुरुआत करने के कुछ दिनों बाद ही रेजिमेंट के अन्य सिपाहियों ने भी उनका पूर्ण समर्थन करते हुए बैरकपुर के पूरे शस्त्रागार पर अधिकार कर लिया और अंग्रेजों को बंगाल से खदेड़ दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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औरंगजेब का शासनकाल:
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छत्रपति शिवाजी महाराज के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी ने अपने सैन्य संगठन में 'पागा' और 'सिलहदार' घुड़सवारों की व्यवस्था की थी, जिसमें पागा सैनिक राज्य द्वारा प्रदत्त घोड़ों और शस्त्रों का प्रयोग करते थे, जबकि सिलहदार सैनिक अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर युद्ध में भाग लेते थे।
2. शिवाजी के प्रशासन में 'अष्टप्रधान' मंडल का प्रत्येक मंत्री राजा के अधीन सीधे कार्य करता था और इनमें से अधिकांश मंत्रियों को आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था, सिवाय पंडितराव और न्यायाधीश के।
3. शिवाजी की राजस्व व्यवस्था मलिक अंबर की भूमि सुधार प्रणालियों से अत्यधिक प्रभावित थी, जिसके तहत उन्होंने भूमि की पैमाइश के लिए 'काठी' और बीघा के मानक माप को अपनाया तथा उपज का 40% भाग राज्य के कर के रूप में वसूल किया, जिसे बाद में बढ़ाकर 50% कर दिया गया था।
4. शिवाजी के द्वारा दक्षिण भारत के राज्यों से वसूल किया जाने वाला 'चौथ' कर उनकी सीमा के सुरक्षा प्रदान करने के बदले कुल आय का एक-चौथाई हिस्सा होता था, जबकि 'सरदेशमुखी' आंतरिक क्षेत्रों पर उनके पारंपरिक वंशानुगत अधिकारों के दावे के रूप में 10 प्रतिशत वसूला जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की राजनीतिक, सैन्य और सांस्कृतिक उपलब्धियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान आयोजित 'कन्नौज सभा' का मुख्य उद्देश्य ह्वेनसांग के सम्मान में महायान बौद्ध धर्म की श्रेष्ठता स्थापित करना था, जिसमें बीस विभिन्न देशों के राजाओं और विभिन्न संप्रदायों के विद्वानों ने भाग लिया था।
2. पल्लव शासक महेंद्रवमन् प्रथम ने अपने शुरुआती जीवन में जैन धर्म का त्याग कर शैव धर्म अपना लिया था, और उनके द्वारा रचित संस्कृत प्रहसन 'मत्तविलास प्रहसन' में बौद्ध और जैन भिक्षुओं के भ्रष्ट आचरण पर हास्यपूर्ण व्यंग्य किया गया है।
3. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका सजीव विवरण बाणभट्ट द्वारा रचित 'हर्षचरित' में अत्यधिक विस्तार से मिलता है।
4. तंजावुर के प्रसिद्ध 'बृहदेश्वर मंदिर' (राजराजेश्वर मंदिर) का निर्माण चोल सम्राट राजराज प्रथम द्वारा करवाया गया था, जो द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है और इसके शिखर पर स्थित विशाल कुंभ एक ही पत्थर से निर्मित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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