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History of India
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मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अशोक के 'धम्म' का मूल उद्देश्य धार्मिक विजय प्राप्त करना नहीं था, बल्कि इसके अंतर्गत प्रजा में नैतिक सहिष्णुता, बड़ों का आदर, अहिंसा और सामाजिक सदभाव को बढ़ावा देना था, जिसके लिए उसने 'धम्ममहामात्र' नामक उच्च अधिकारियों की नियुक्ति की थी।
  2. 2. कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा रचित 'अर्थशास्त्र' में मौर्य कालीन केंद्रीय प्रशासन में सर्वोच्च स्तर पर मंत्रियों और अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा जाता था, जिनकी कुल संख्या अठारह थी और इन पर कड़ी निगरानी रखने के लिए गुप्तचर प्रणाली (गूढ़पुरुष) का व्यापक उपयोग किया जाता था।
  3. 3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित होता था, जिसमें प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे और ये समितियाँ उद्योग, विदेशी यात्रियों, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, व्यापार और कर संग्रह जैसे विभिन्न प्रशासनिक कार्यों की देखरेख करती थीं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन मौर्य साम्राज्य के प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। सम्राट अशोक ने अपने धम्म के प्रचार और क्रियान्वयन के लिए 'धम्ममहामात्र' अधिकारियों की नियुक्ति की थी। कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में केंद्रीय प्रशासन के 18 प्रमुख विभागों या अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा गया है। इसके अतिरिक्त, मेगास्थनीज की 'इंडिका' में पाटलिपुत्र के नगर प्रशासन का वर्णन मिलता है जो छह समितियों द्वारा संचालित होता था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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वैदिक काल और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'अयस' शब्द का प्रयोग सामान्यतः तांबे या कांस्य के लिए किया जाता था, जबकि उत्तर वैदिक काल में लोहे के प्रचलन के बाद इसके लिए 'कृष्ण अयस' या 'श्याम अयस' शब्द का प्रयोग किया जाने लगा। 2. 'गोपथ ब्राह्मण' का संबंध शुक्ल यजुर्वेद से है, जिसमें विभिन्न यज्ञीय अनुष्ठानों और कर्मकांडों के साथ-साथ ब्रह्मांड की उत्पत्ति और प्राचीन ऋषियों के वंशावली का विस्तृत विवरण मिलता है। 3. उत्तर वैदिक काल की चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW - Painted Grey Ware) संस्कृति मुख्य रूप से गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र से जुड़ी हुई है, जो इस काल के लोहे के प्रयोग और ग्रामीण से अर्द्ध-नगरीय जीवन की ओर संक्रमण को दर्शाती है। 4. वैदिक कालीन राजनीतिक संस्था 'विदथ' आर्यों की सबसे प्राचीन संस्था मानी जाती है, जिसमें न केवल धार्मिक अनुष्ठान और सैन्य लूट के माल का वितरण होता था, बल्कि इसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी अनिवार्य रूप से होती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? इतिहासकार बरनी के अनुसार, अलाउद्दीन के सुधारों के कारण दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में किसका अभाव हो गया था? फ्रांसीसी चिकित्सक फ्रांस्वा बर्नियर ने भारत के "अकाल" और "गरीबी" का दोष किसे दिया था? वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों तथा अन्य कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विद्रोहियों के पास न तो कोई केंद्रीयकृत उच्च कमान (Centralized High Command) था और न ही कोई सुनियोजित अखिल भारतीय राजनीतिक व सैन्य रणनीति; विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ताओं ने मुख्य रूप से अपने स्थानीय और क्षेत्रीय हितों व अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। 2. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों जैसे टेलीग्राफ और तीव्र रेल परिवहन का निर्णायक लाभ था, जबकि विद्रोहियों के पास सैनिक अनुशासन, आधुनिक हथियारों और गुप्त सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था का पूर्ण अभाव था। 3. भारत के अधिकांश बड़े देसी रियासतें (जैसे हैदराबाद, ग्वालियर, इंदौर और भोपाल के शासक) तथा शिक्षित मध्यम वर्ग व व्यापारी वर्ग या तो तटस्थ रहे या उन्होंने अंग्रेजों का सक्रिय रूप से समर्थन किया, जिससे विद्रोह अखिल भारतीय जन-आंदोलन का रूप नहीं ले सका। 4. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा भारत का सम्राट घोषित किए जाने के बाद उनके पास विशाल सैन्य संसाधन और अत्याधुनिक तोपखाने उपलब्ध थे, जिनकी सहायता से उन्होंने अंग्रेजों को दिल्ली से खदेड़ दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल के वैचारिक दृष्टिकोण, कार्यप्रणाली और राजनीतिक उद्देश्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और गोपालकृष्ण गोखले) का ब्रिटिश न्यायप्रियता में दृढ़ विश्वास था और वे मुख्य रूप से 'प्रार्थना, याचिका और शिष्टमंडल' (Prayer, Petition and Protest) की उदारवादी पद्धति में विश्वास रखते थे, जबकि गरमपंथी नेता (लाल-बाल-पाल और अरबिंदो घोष) ब्रिटिश शासन के प्रति पूर्ण असहयोग और 'आत्म-निर्भरता' पर बल देते थे। 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को पूरे देश में विस्तारित करने के प्रश्न पर नरम दल और गरम दल के बीच तीव्र मतभेद उत्पन्न हो गए; जहाँ गरमपंथी इसे संपूर्ण भारत में लागू करना चाहते थे, वहीं नरमपंथी इस आंदोलन को केवल बंगाल तक ही सीमित रखना चाहते थे। 3. कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन (1906) में बाल गंगाधर तिलक या लाजपत राय को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के नरमपंथियों के प्रबल विरोध के कारण सर्वसम्मति से गोपालकृष्ण गोखले को अध्यक्ष चुना गया, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर 'स्वराज' (Dominion Status या औपनिवेशिक स्वराज्य) को कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य घोषित किया। 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के मंच से दोनों दलों के बीच हिंसक झड़पों और वैचारिक असहमतियों के कारण सूरत विभाजन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पर नरमपंथियों का नियंत्रण हो गया और गरमपंथियों को लगभग एक दशक के लिए कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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