History of India
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गदर पार्टी और इसके क्रांतिकारी कार्यक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सोहन सिंह भकना द्वारा स्थापित 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' नामक संगठन ने ही आगे चलकर 'गदर पार्टी' का रूप लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से भारत से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था।
- 2. लाला हरदयाल द्वारा सैन फ्रांसिस्को से प्रकाशित साप्ताहिक पत्र 'गदर' का मुख्य पृष्ठ हमेशा 'अंग्रेजी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक के तहत प्रकाशित होता था, जिसमें ब्रिटिश नीतियों की आर्थिक और राजनीतिक असफलता रेखांकित की जाती थी।
- 3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर गदर पार्टी के क्रांतिकारियों ने 'गदर दी गूँज' और अन्य पैम्फलेट्स के माध्यम से विदेशों में रह रहे भारतीयों से भारत लौटकर ब्रिटिश सेना के भारतीय सैनिकों को बगावत के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया था।
- 4. गदर आंदोलन की गुप्त योजनाओं का समय से पूर्व लीक हो जाना और ब्रिटिश खुफिया तंत्र द्वारा इसे प्रभावी ढंग से कुचल दिए जाने के कारण वर्ष 1915 का 'गदर षड्यंत्र' सफल नहीं हो सका था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
गदर पार्टी की स्थापना वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' के रूप में सोहन सिंह भकना, लाला हरदयाल और अन्य प्रवासियों द्वारा की गई थी। इस पार्टी का मुख्य पत्र 'गदर' था, जिसके हर अंक के पहले पृष्ठ पर 'अंग्रेजी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक छपता था। प्रथम विश्व युद्ध (1914) के दौरान गदर क्रांतिकारियों ने भारत लौटकर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करने की योजना बनाई जिसे 'गदर षड्यंत्र' कहा जाता है, किंतु मुखियों की गद्दारी और ब्रिटिश खुफिया तंत्र की सक्रियता के कारण यह विफल हो गया। इस ऐतिहासिक आंदोलन के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के तहत भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया और 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' तथा 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का नया पद सृजित किया गया, जिसे सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद प्रदान की गई थी।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (1858) में देशी रियासतों के शासकों को आश्वस्त किया गया कि भविष्य में उनके राज्यों का विलय नहीं किया जाएगा, तथा 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया, जिससे दत्तक पुत्र लेने के उनके अधिकार को मान्यता मिल गई।
3. इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रजा के धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप करने, प्राचीन अधिकारों, रीति-रिवाजों का सम्मान करने तथा नस्ल या धर्म के भेदभाव के बिना योग्यता के आधार पर सार्वजनिक सेवाओं में भारतीयों को नियुक्त करने का स्पष्ट आश्वासन दिया था।
4. विद्रोह के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार की नीति को अनिश्चित काल के लिए जारी रखते हुए अधिनियम में यह प्रावधान किया गया कि भारतीय सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात कम किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी बगावत को दोबारा रोका जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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पल्लव और चालुक्य राजवंशों के संघर्ष तथा दक्षिण भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव नरेश महेन्द्रवर्मन प्रथम को अपने शासनकाल के प्रारंभिक दौर में जैन धर्म का अनुयायी माना जाता है, किंतु बाद में शैव संत अप्पर (तिरुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर उन्होंने शैव धर्म अपना लिया था।
2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित कर 'परमेश्वर' की उपाधि धारण की थी, जिसका विस्तृत उल्लेख ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत और अहोल शिलालेख में मिलता है।
3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी (बादामी) पर आक्रमण कर चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया और 'वातापिकोंड' (वातापी का विजेता) की उपाधि धारण की थी।
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और प्रारंभिक संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत आने वाला पहला पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा वर्ष 1498 में कालीकट पहुँचा था, जहाँ स्थानीय शासक 'जमूरिन' ने पारंपरिक व्यापारिक प्रतिस्पर्धियों (अरब व्यापारियों) के विरोध के बावजूद उसका स्वागत किया था।
2. पुर्तगालियों ने भारत में अपनी प्रारंभिक सत्ता सुदृढ़ करने के उद्देश्य से वर्ष 1505 में फ्रांसिस्को डी अल्मेडा को भारत का प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनाकर भेजा, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल नीति) की शुरुआत की ताकि हिंद महासागर के व्यापार पर एकाधिकार स्थापित किया जा सके।
3. भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक अल्बुकर्क को माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली मुख्यालय बनाया और भारतीयों के साथ वैवाहिक संबंधों को प्रोत्साहित कर सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया था।
4. ब्रिटिश ईस्ट India कंपनी ने भारत में अपनी पहली स्थायी व्यावसायिक फैक्ट्री की स्थापना सूरत में वर्ष 1613 में जहांगीर के फरमान से की थी, जबकि इससे पूर्व वर्ष 1611 में उन्होंने मुसूलीपट्नम (मछलीपट्टनम) में अपनी प्रथम फैक्ट्री स्थापित कर ली थी।
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पुर्तगालियों द्वारा स्थापित 'इस्ताद दा इंडिया' (Estado da India) के तहत हिंद महासागर में व्यापारिक जहाजों से 'कार्टाज' (Cartaz) नामक कर वसूला जाता था, तथा अफ़सोस की नीति के अंतर्गत वर्ष 1510 में अल्बुकर्क ने बीजापुर के सुल्तान यूसुफ आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली साम्राज्य का मुख्य प्रशासनिक केंद्र बनाया था।
2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को वर्ष 1600 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा दिए गए शाही चार्टर (राजपत्र) के माध्यम से अनिश्चित काल के लिए पूर्व के साथ व्यापार करने का एकाधिकार प्रदान किया गया था, जिसे बाद में जेम्स प्रथम के शासनकाल में सीमित कर दिया गया था।
3. बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुए संघर्ष के दौरान, वर्ष 1757 के प्लासी के युद्ध में रॉबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर के साथ गुप्त संधि कर नवाब को पराजित किया, किंतु इस युद्ध के तत्काल पश्चात बंगाल का औपचारिक नवाब मीर जाफर को बनाया गया जिसे अंग्रेजों ने 'कठपुतली नवाब' के रूप में इस्तेमाल किया।
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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