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History of India
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 'नरम दल' और 'गरम दल' के वैचारिक संघर्ष, रणनीतियों तथा बंगाल विभाजन के उपरांत उत्पन्न राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के पीछे मुख्य वैचारिक मतभेद यह था कि गरम दल के नेता स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखना चाहते थे, जबकि नरम दल के नेता इसे पूरे देश में प्रसारित करना चाहते थे।
  2. 2. लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चंद्र पाल (जिन्हें 'लाल-बाल-पाल' त्रिपुटी कहा जाता है) ने प्रशासनिक सुधारों के लिए ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास रखने की नरमपंथियों की 'भिक्षुक वृत्ति' (Mendicancy) की तीखी आलोचना की और पूर्ण स्वराज या आक्रामक राजनीतिक संघर्ष पर बल दिया।
  3. 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) को अपने राजनीतिक लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया था, जिसे लेकर नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच तीखी तनातनी हुई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि इसके विपरीत, नरम दल के नेता स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक ही सीमित रखना चाहते थे और इसका दायरा पूरे देश में फैलाने के पक्ष में नहीं थे, जबकि गरम दल (उग्रवादी) इस आंदोलन को पूरे भारत में फैलाना चाहते थे। कथन 2 सही है; लाल-बाल-पाल त्रिपुटी ने नरमपंथियों की प्रार्थना, याचिका और विरोध की नीतियों को 'राजनीतिक भिक्षुक वृत्ति' कहा और आत्म-निर्भरता तथा आक्रामक संघर्ष पर जोर दिया। कथन 3 भी सही है; वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्षीय भाषण में पहली बार 'स्वराज' शब्द का आधिकारिक रूप से उल्लेख किया गया और उसे कांग्रेस का लक्ष्य बनाया गया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास और वैचारिक संघर्ष के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions

→ मुगलकालीन प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत शुरू की गई 'मनसबदारी व्यवस्था' आंशिक रूप से मंगोलों की दशमलव पद्धति पर आधारित थी, जिसमें प्रत्येक मनसबदार को अपने पद के अनुसार 'जात' (व्यक्तिगत पद और वेतन) और 'सवार' (घुड़सवार सैनिकों की संख्या) का निर्धारण करना होता था। 2. जहांगीर के शासनकाल में चित्रकला अपने स्वर्ण युग पर थी, और इसी काल में नूरजहाँ ने एक शक्तिशाली राजनीतिक गुट ('जहाँगीर गुट' या ज्यूरी) का निर्माण किया था, जिसमें उनके पिता इत्तिमद उद्दौला और भाई आसफ खान शामिल थे। 3. शाहजहाँ के शासनकाल में स्थापत्य कला ने चरम सीमा को छुआ, किंतु इस काल में बर्नियर और ट्रैवर्नीयर जैसे विदेशी यात्रियों ने यह उल्लेख किया कि साम्राज्य की अत्यधिक केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था और कृषि पर बढ़ते राजस्व बोझ के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो गई थी। 4. औरंगजेब द्वारा पुनः 'जिजिया' कर लगाया जाना तथा मंदिरों को तोड़ने की उसकी नीति केवल धार्मिक असहिष्णुता का परिणाम थी, और इस काल में मुगल साम्राज्य का कुल क्षेत्रफल अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' और इसके क्रांतिकारी अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गदर पार्टी की स्थापना 'सोहन सिंह भकना' द्वारा की गई थी और इसके साप्ताहिक पत्र 'गदर' का प्रकाशन मुख्य रूप से उर्दू, पंजाबी, गुजराती और पश्तो जैसी विभिन्न भाषाओं में किया जाता था ताकि विभिन्न पृष्ठभूमि के प्रवासियों तक इसे पहुँचाया जा सके। 2. लाला हरदयाल इस आंदोलन के प्रमुख बुद्धिजीवियों और संस्थापकों में से एक थे, जिन्होंने 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसका मुखपत्र बाद में 'गदर' के रूप में प्रसिद्ध हुआ। 3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर गदर पार्टी के अधिकांश क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करने के लिए विदेशों से भारत लौटने का आह्वान किया, जिसे 'गदर षड्यंत्र' (Ghadar Mutiny) के रूप में जाना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → जून 1947 की माउंटबेटन योजना और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं को अपनी-अपनी विधानसभाओं का विभाजन करने के लिए दो भागों में मतदान करने का अधिकार दिया गया था, जिसमें मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों और गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधियों ने अलग-अलग बैठक कर प्रांत के विभाजन के पक्ष में निर्णय लिया। 2. इस योजना के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय करने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया था, जिसमें दोनों ही क्षेत्रों ने पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया था। 3. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अनुसार 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन में विभाजित कर दिया गया, तथा दोनों नए डोमिनियन की संविधान सभाओं को अपनी-अपनी विधायी संप्रभुता प्रदान की गई और ब्रिटिश संसद का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनके सैन्य और राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सत्ता को समाप्त कर दिया, जिसमें अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार, राजनयिक और राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्यरत थे। 2. तात्या टोपे ने कानपुर और ग्वालियर के मोर्चों पर ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध अत्यंत कुशल छापामार (गोरिल्ला) युद्ध का संचालन किया तथा ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल को पराजित कर कानपुर पर स्थायी रूप से अधिकार बनाए रखा था। 3. कानपुर में ब्रिटिश आत्मसमर्पण के उपरांत घटी 'बीबीघर नरसंहार' (Bibighar Massacre) की घटना के पश्चात ब्रिटिश सेनापति जनरल सर ह्यूरोज ने कानपुर की पुनः प्राप्ति के लिए भीषण सैन्य अभियान का नेतृत्व किया था और नाना साहब को गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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