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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक ज्ञान था और इसका प्रयोग कृषि उपकरणों तथा अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता था, जिसे 'अयस' कहा गया है।
  2. 2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म के आधार पर कठोर हो गई, जिसमें क्षत्रियों और वैश्यों की तुलना में ब्राह्मणों और शूद्रों की सामाजिक स्थिति में स्पष्ट परिवर्तन आए, तथा इस काल में 'गोत्र' प्रथा की स्थापना हुई।
  3. 3. ऋग्वैदिक समाज मुख्य रूप से पितृसत्तात्मक था, जिसमें महिलाओं को सभा और समिति जैसी राजनीतिक संस्थाओं में भाग लेने की अनुमति थी, और उपनयन संस्कार तथा वेदों के अध्ययन का अधिकार भी महिलाओं को प्राप्त था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि ऋग्वैदिक काल के लोगों को लोहे (श्याम अयस) का ज्ञान नहीं था; वे केवल तांबे या कांस्य (जिसे 'अयस' कहा गया है) से परिचित थे। लोहे का ज्ञान उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ईसा पूर्व) के आसपास हस्तिनापुर और अतरंजीखेड़ा जैसे स्थलों से मिलना शुरू हुआ। कथन 2 सत्य है, उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था कर्म के स्थान पर जन्म पर आधारित हो गई और इसी काल में 'गोत्र' व्यवस्था का उद्भव हुआ। कथन 3 सत्य है, ऋग्वैदिक समाज पितृसत्तात्मक था, किंतु महिलाओं को उच्च सामाजिक स्थिति प्राप्त थी, वे सभा और समिति में भाग लेती थीं, उपनयन संस्कार करवाती थीं और गार्गी, मैत्रेयी जैसी विदुषी महिलाएँ इसका प्रमाण हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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