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History of India
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण और स्थायी रूप से कम वेतन पर रखने के लिए बाजार नियंत्रण (Price Control) नीति लागू की थी, जिसके तहत खाद्यान्न से लेकर घोड़ों और दासों तक के मूल्य निश्चित कर दिए गए थे और इसके लिए 'दीवान-ए-रियासत' तथा 'शहना-ए-मंडी' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी।
  2. 2. मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए दोआब क्षेत्र में भारी कर वृद्धि की गई थी, जो अकाल और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण अत्यधिक असफल रही, जिसके बाद उसने किसानों को राहत देने और कृषि के विकास के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की थी।
  3. 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार किसानों को राहत देते हुए सिंचाई के लिए कुओं और नहरों का निर्माण कराया, जिस पर किसानों से 'हक-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) वसूला जाता था, और उसने शरीयत के विरुद्ध बताए जाने वाले 25 प्रकार के सभी कष्टदायक करों (आवाब) को समाप्त कर केवल चार शरियत-सम्मत कर—खराज, जकात, जजिया और खुम्स—को ही वैध रखा था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। अलाउद्दीन खिलजी ने सैनिकों के कम खर्च पर बड़े घोड़े और सेना रखने के लिए बाजार नियंत्रण प्रणाली शुरू की थी, जिसमें 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' की महत्वपूर्ण भूमिका थी। मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब कर वृद्धि की विफलता के बाद कृषि सुधार के लिए 'दीवान-ए-कोही' की स्थापना की थी। फिरोजशाह तुगलक ने सिंचाई कर 'हक-ए-शर्ब' लगाया और शरीयत के विपरीत लगने वाले 25 प्रकार के अवैध करों को समाप्त कर केवल चार प्रमुख इस्लामी करों को मान्यता दी थी। इस काल के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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