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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह के विभिन्न कारणों (राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजनीतिक कारणों के तहत लॉर्ड डलहौजी द्वारा लागू 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के अंतर्गत सतारा, नागपुर और झाँसी के अतिरिक्त अवध का भी विलय कर दिया गया था, जिससे भारतीय शासकों के साथ-साथ पारंपरिक अभिजात वर्ग में गहरा अविश्वास उत्पन्न हुआ।
- 2. सामाजिक और धार्मिक सुधारों के नाम पर अंग्रेजों द्वारा लाए गए सुधारों, जैसे कि वर्ष 1856 का 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' और सेना में सेवा देने के लिए समुद्र पार जाने की अनिवार्यता (General Service Enlistment Act, 1856), को रूढ़िवादी भारतीयों ने उनके धर्म और संस्कृति पर सीधा हस्तक्षेप माना।
- 3. आर्थिक कारणों में अंग्रेजों की भू-राजस्व नीतियों और ब्रिटिश औद्योगिक वस्तुओं के आयात ने पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को पूरी तरह नष्ट कर दिया, जिससे केवल ग्रामीण कृषक वर्ग प्रभावित हुआ, जबकि शहर के कारीगरों और शिल्पकारों की आर्थिक स्थिति अत्यंत सुदृढ़ हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत नीति' (Doctrine of Lapse) के तहत कई रियासतों का विलय किया गया और वर्ष 1856 में कुशासन के आधार पर अवध का विलय भी किया गया, जिससे शासकों और सैनिकों दोनों में असंतोष फैला। कथन 2 सही है क्योंकि वर्ष 1856 का 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' तथा 'जनरल सर्विस एनलिस्टमेंट एक्ट' (जिसके तहत नए सैनिकों को समुद्र पार विदेशों में भी सेवा देनी पड़ती थी) को रूढ़िवादी समाज ने धर्म भ्रष्ट करने का षड्यंत्र माना। कथन 3 गलत है क्योंकि आर्थिक नीतियों और ब्रिटिश विनिहित वस्तुओं के आगमन से केवल कृषक और जमींदार वर्ग ही नहीं, बल्कि पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प, हथकरघा उद्योग और शहरी कारीगर भी पूरी तरह बर्बाद हो गए थे, जिससे समाज का हर वर्ग त्रस्त था। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न भारतीय क्षेत्रों में ब्रिटिश सत्ता को पुनः स्थापित करने और विद्रोह का दमन करने वाले ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकलसन
2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल
3. झाँसी और ग्वालियर - सर ह्यूरोज
4. बिहार (जगदीशपुर) - मेजर विलियम टेलर और विंसेंट आयर
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विद्रोहियों के पास न तो कोई केंद्रीय संगठन और सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण था और न ही कोई स्पष्ट भविष्य की योजना; अधिकांश नेता अपने स्थानीय हितों और क्षेत्रों की सीमाओं से बंधे हुए थे, जिसके कारण ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध एक समन्वित अखिल भारतीय प्रतिरोध खड़ा नहीं किया जा सका।
2. नाना साहब, रानी लक्ष्मीबाई और कुंवर सिंह जैसे क्षेत्रीय नेतृत्व ने अत्यधिक वीरता का प्रदर्शन किया, किंतु उनके पास आधुनिक सैन्य तकनीक, तार (टेलीग्राम) व्यवस्था और रेलवे जैसे संचार के आधुनिकीकृत साधन नहीं थे, जबकि अंग्रेजों के पास ये सभी संसाधन उपलब्ध थे।
3. भारत के अधिकांश शिक्षित वर्ग, व्यापारियों, बड़े जमींदारों और आधुनिक पश्चिमी शिक्षा प्राप्त मध्य वर्ग ने 1857 के विद्रोह में क्रांतिकारियों का सक्रिय समर्थन किया और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक व्यापक जन-क्रांति का सूत्रपात किया।
4. बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा औपचारिक रूप से भारत का सम्राट घोषित तो कर दिया गया था, किंतु वृद्धावस्था और कमजोर नेतृत्व क्षमता के कारण वे विभिन्न छावनियों से आने वाले विद्रोही सैनिकों और सेनापतियों के बीच प्रभावी सैन्य समन्वय स्थापित करने में असमर्थ रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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किस विद्वान ने मोहम्मद बिन तुगलक को "दुनिया का खान" कहा था?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने एकेश्वरवाद और उपनिषदों की शिक्षाओं पर विशेष बल देते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद तथा सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का पुरजोर विरोध किया, परंतु उन्होंने पाश्चात्य आधुनिक शिक्षा और विज्ञान के प्रसार का विरोध करते हुए केवल पारंपरिक संस्कृत शिक्षा का समर्थन किया था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को 'अपौरुषेय' तथा ज्ञान का अचूक भंडार मानते हुए जन्मजात जाति व्यवस्था और बहुदेववाद को अस्वीकार किया।
3. वर्ष 1867 में बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' (जिसके प्रमुख नेताओं में आत्माराम पांडुरंग और महादेव गोविंद रानाडे शामिल थे) का मुख्य उद्देश्य धार्मिक सुधारों के साथ-साथ अंतरजातीय विवाह, स्त्री शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और दलितोद्धार जैसे सामाजिक सुधारों को आगे बढ़ाना था।
4. स्वामी विवेकानंद द्वारा 1897 में स्थापित 'रामकृष्ण मिशन' ने केवल धार्मिक और दार्शनिक पुनरुत्थान पर ध्यान केंद्रित किया, और इसने मानव सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म मानते हुए आधुनिक सामाजिक सेवा, शिक्षा प्रसार और राहत कार्यों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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