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History of India
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गुप्तोत्तर काल एवं हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हर्षवर्धन के अधीन प्रशासनिक व्यवस्था मौर्य और गुप्त कालों की तुलना में अधिक विकेंद्रीकृत हो चुकी थी, जहाँ अधिकारियों और सामंतों को नगद वेतन देने के स्थान पर भूमि अनुदान (भू-दान) देने की प्रवृत्ति में अत्यधिक वृद्धि हुई थी।
  2. 2. हर्ष के काल में कन्नौज (जिसे 'कान्यकुब्ज' कहा जाता था) राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया था, और हर्ष ने बौद्ध धर्म की महायान शाखा को संरक्षण प्रदान करने के साथ-साथ कन्नौज में एक विशाल धार्मिक महासभा का आयोजन किया था, जिसकी अध्यक्षता चीनी यात्री ह्वेनसांग ने की थी।
  3. 3. इस काल में उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में रोमन साम्राज्य के साथ होने वाले प्रत्यक्ष समुद्री व्यापार के बने रहने के कारण सोने के सिक्कों की प्रचुरता थी, और हर्ष के समय सोने के सिक्के (दिनार) गुप्त सम्राटों से भी अधिक शुद्धता और संख्या में जारी किए गए थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

गुप्तोत्तर काल (विशेषकर हर्षवर्धन के शासनकाल) में भारतीय राजनीतिक संरचना में सामंती प्रवृत्तियाँ तेजी से उभरकर आईं। केंद्रीय नियंत्रण कमजोर हुआ और प्रशासनिक तथा सैन्य सेवाओं के बदले नगद वेतन के स्थान पर भूमि अनुदान देने की प्रथा व्यापक हो गई, जिससे कथन 1 सही है। हर्षवर्धन ने अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित की, जो उत्तर भारत की राजनीति का केंद्र बन गया। उसने बौद्ध धर्म की महायान शाखा को संरक्षण दिया और कन्नौज में ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य धार्मिक सभा बुलाई थी, जिससे कथन 2 सही है। इसके विपरीत, इस काल में रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार में भारी गिरावट और आंतरिक व्यापार के ह्रास के कारण मुद्रा अर्थव्यवस्था का पतन हो गया था; उत्तर गुप्त काल और हर्ष के समय सोने के सिक्कों की संख्या और शुद्धता में भारी कमी आई थी। अतः कथन 3 गलत है। विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 3 जून 1947 को घोषित 'माउंटबेटन योजना' (3rd June Plan) के तहत भारत के विभाजन और सत्ता के हस्तांतरण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी, जिसे ब्रिटिश संसद द्वारा 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' (Indian Independence Act 1947) के रूप में जुलाई 1947 में पारित किया गया था। 2. माउंटबेटन योजना के प्रावधानों के अंतर्गत पंजाब और बंगाल की विधानसभाओं में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों की अलग बैठकें आयोजित की गईं, जिसमें दोनों प्रांतों के विभाजन के पक्ष में मतदान किया गया, जबकि उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में जनमत संग्रह (Referendum) के माध्यम से भविष्य का निर्धारण किया गया। 3. भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निर्धारण और सीमांकन के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में 'सीमा आयोग' (Boundary Commission) का गठन किया गया था, जिसने बिना किसी प्रशासनिक त्रुटि और पूर्ण जनस्वीकृति के साथ 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही अपनी रिपोर्ट प्रकाशित कर दी थी। 4. पंजाब और बंगाल के विभाजन तथा भविष्य के सीमान्त क्षेत्रों के निर्धारण की इस पूरी प्रक्रिया में भारत के गवर्नर-जनरल के रूप में लॉर्ड माउंटबेटन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों के पूर्ण वैचारिक सहमति के साथ कार्य किया था, और किसी भी दल द्वारा इस प्रक्रिया की समय-सीमा पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में घटी घटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में 'एनफील्ड राइफल' (Enfield Rifle) को शामिल किया गया, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी धार्मिक असंतोष पैदा कर दिया, क्योंकि इसे उनकी जाति और धर्म भ्रष्ट करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र माना गया। 2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध कड़ा विरोध जताते हुए अपने यूरोपीय अधिकारी लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई। 3. मंगल पांडे को फांसी दिए जाने की घटना के तुरंत बाद बैरकपुर छावनी के समस्त सैनिकों ने अंग्रेजों के विरुद्ध खुला विद्रोह कर दिया और उसी दिन संपूर्ण दिल्ली पर अधिकार करने के लिए मार्च शुरू कर दिया था। 4. चर्बी वाले कारतूसों के कारखाने मुख्य रूप से दमदम, सियालकोट और अंबाला में स्थित थे, जहाँ सैनिकों को इन नए कारतूसों को इस्तेमाल करने से अनिवार्य रूप से छूट दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा बंगाल प्रेसीडेंसी में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्वामी बना दिया गया, जहाँ उन्हें कुल लगان का 10/11 भाग कंपनी को देना होता था और केवल 1/11 भाग अपने पास रखने का अधिकार था। 2. थॉमस मुनरो द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसानों (रयतों) के मध्य सीधा समझौता हुआ, तथा इसमें बिचौलियों का पूर्ण अभाव होने के कारण किसानों को कभी भी भू-राजस्व के भुगतान में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा। 3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा परिकल्पित 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत व्यक्तिगत किसानों से कर न वसूल कर पूरे गाँव या 'महाल' को राजस्व भुगतान की इकाई माना गया। 4. तीनों प्रणालियों में से 'रयतवारी व्यवस्था' ब्रिटिश भारत के कुल भू-भाग के सबसे बड़े हिस्से (लगभग 51%) पर लागू की गई थी, जबकि स्थाई बंदोबस्त लगभग 19% और महालवारी व्यवस्था लगभग 30% भू-भाग पर थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? विजयनगर काल में राजा के निजी सचिव को क्या कहा जाता था जो शाही आदेशों को लिखता था? बंगाल विभाजन (1905) और उसके परिणामस्वरूप उत्पन्न स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, और इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा करते हुए 'बॉयकॉट' (बहिष्कार) प्रस्ताव पारित किया गया था। 2. 16 अक्टूबर 1905 को जिस दिन बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, लोगों ने उपवास रखा, बंगाली गीतकार रबीन्द्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर 'मार्निंग सॉन्ग' के रूप में 'अमर सोनार बांग्ला' गाया गया तथा एक-दूसरे के हाथों पर राखी बांधकर 'राखी दिवस' मनाया गया। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (Constructive Programme) पर भी विशेष बल दिया गया, जिसके तहत पी.सी. रे (प्रफुल्ल चंद्र राय) ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' की तर्ज पर कलकत्ता नेशनल कॉलेज की स्थापना की और श्री अरविंदो घोष इसके पहले प्रधानाचार्य बने। 4. स्वदेशी आंदोलन के प्रसार के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में नेतृत्वकर्ताओं ने अलग-अलग मोर्चे संभाले, जैसे मद्रास प्रेसीडेंसी में वी. चिदंबरम पिल्लै ने स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी की शुरुआत की और तूतीकोरिन में मिल मजदूरों का नेतृत्व किया, जबकि आंध्र प्रदेश के डेल्टा क्षेत्रों में इस आंदोलन को 'वंदे मातरम् आंदोलन' के नाम से जाना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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