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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था और इसके विशिष्ट पुरातात्विक स्थलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चान्हूदड़ो एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल था जहाँ किसी भी प्रकार का कोई दुर्ग (Citadel) नहीं पाया गया है, और यहाँ से मनके बनाने के कारखाने के साथ-साथ वक्रकार ईंटों के साक्ष्य भी मिले हैं।
  2. 2. लोथल से गोदीबाड़ा (Dockyard) के अवशेष मिले हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि यह एक प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र था, तथा यहाँ से चावल के साक्ष्य के साथ-साथ युगल शवाधान (Double burial) के भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
  3. 3. बनावलि से मिट्टी का बना हुआ हल (Terracotta plough) का प्रतिरूप प्राप्त हुआ है, और इस स्थल के निचले शहर तथा दुर्ग दोनों क्षेत्रों को सिंधु घाटी की अन्य बस्तियों की भांति अलग-अलग रक्षाप्राचीर से न घेरकर एक ही सामान्य रक्षाप्राचीर के अंतर्गत रखा गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। चान्हूदड़ो (Chanhudaro) एक ऐसा पुरास्थल है जहाँ कोई भी दुर्ग या गढ़ी (Citadel) के प्रमाण नहीं मिले हैं, और यह मनके, मुहरें और इंकपॉट निर्माण का एक प्रमुख केंद्र था। लोथल से एक विशाल गोदीबाड़ा (Dockyard) मिला है जो समुद्री व्यापार का साक्ष्य प्रस्तुत करता है, साथ ही यहाँ चावल और बाजरे के अवशेष तथा तीन युगल शवाधान भी मिले हैं। बनावलि से टेराकोटा का बना हल मिला है और कालीबंगा की भाँति यहाँ की बस्तियों की योजना में भी रक्षाप्राचीर से जुड़े विशिष्ट साक्ष्य मिलते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1857 के विद्रोह के दौरान विद्रोही नेताओं के पास आधुनिक सैन्य तकनीक, संचार माध्यमों और हथियारों का भारी अभाव था, तथा उनके पास भविष्य के भारतीय प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे का कोई स्पष्ट दूरदर्शी खाका नहीं था। 2. यद्यपि मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा भारत का सम्राट घोषित किया गया था, तथापि विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों के नेताओं जैसे नाना साहब, लक्ष्मीबाई और कुंवर सिंह के बीच प्रभावकारी केंद्रीय समन्वय और रणनीतिक एकता का पूर्ण अभाव था। 3. भारत के सभी शिक्षित मध्यम वर्ग, आधुनिक बुद्धिजीवियों और अधिकांश देशी रियासतों के शासकों (जैसे सिंधिया, होलकर और हैदराबाद के निजाम) ने इस राष्ट्रीय संघर्ष में खुलकर विद्रोहियों का साथ दिया और ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र सहायता प्रदान की। 4. विद्रोह का प्रसार मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत तक ही सीमित रहा, जबकि दक्षिण भारत, पंजाब का अधिकांश भाग और पश्चिमी भारत का क्षेत्र शांत बना रहा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे द्वारा संचालित सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज़ ने झांसी के किले को घेर लिया, जिसके उपरांत रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस के साथ किले की रक्षा की और पतन के समय तात्या टोपे की सेना की मदद से कालपी की ओर सुरक्षित प्रस्थान करने में सफल रहीं। 2. कालपी में ब्रिटिश सेना से पराजित होने के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया, जहाँ सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव सिंधिया ने उनका खुलकर स्वागत किया और ग्वालियर के किले पर अधिकार करने में अपनी संपूर्ण सेना उनके अधीन कर दी। 3. ग्वालियर पर अधिकार करने के उपरांत तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई ने संयुक्त रूप से ब्रिटिश सेना का सामना किया, और 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा-की-सराय में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। 4. रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे ने मध्य भारत के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध जारी रखा, किंतु उनके एक विश्वासघाती मित्र मानसिंह के धोखे के कारण वे अंग्रेजों द्वारा पकड़ लिए गए और अप्रैल 1859 में शिवपुरी में उन्हें फांसी दे दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद के क्षेत्रों में हुए विद्रोह और उनके दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'डंका शाह' भी कहा जाता था, और जिन्होंने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा प्रतिरोध करते हुए अंततः पुवायाँ के राजा के विश्वासघात के कारण वीरगति प्राप्त की। 2. बरेली में रोहिल्ला सेना के पूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व संभाला और अपनी एक स्वतंत्र सरकार की स्थापना की, किंतु अंततः ब्रिटिश जनरल कॉलिन कैंपबेल ने इस विद्रोह को कुचलकर बरेली पर पुनः अधिकार कर लिया। 3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जिन्होंने स्वतंत्रता की घोषणा करते हुए खुसरो बाग पर कब्जा कर लिया था, लेकिन कर्नल नील ने अत्यंत क्रूरता के साथ इस विद्रोह का दमन कर दिया। 4. फैजाबाद के विद्रोह के दमन के पश्चात ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज़ ने मौलवी अहमदुल्लाह शाह की वीरता से प्रभावित होकर उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा पश्चिमी और पूर्वी भारत में अपनी सत्ता के सुदृढ़ीकरण तथा मुंबई (बॉम्बे) और कलकत्ता की स्थापना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंबई (वर्तमान मुंबई) को वर्ष 1668 में ब्रिटिश सम्राट चार्ल्स द्वितीय ने पुर्तगाली राजकुमारी कैथरीन से विवाह में मिले दहेज के रूप में प्राप्त किया था, जिसे बाद में सम्राट ने मात्र दस पाउंड वार्षिक किराए पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया था। 2. जॉब चरनाक ने बंगाल में हुगली के स्थान पर सुतानुती, कलिकाता और गोविंदपुर नामक तीन गाँवों की जमींदारी प्राप्त कर आधुनिक कलकत्ता (कोलकाता) शहर की नींव रखी थी, जिसके चारों तरफ निर्मित फोर्ट विलियम किले की प्रथम प्रेसिडेंसी के रूप में स्थापना की गई थी। 3. वर्ष 1686 में ब्रिटिश कंपनी ने मुगल सम्राट औरंगजेब की नीतियों के विरुद्ध जाकर हुगली शहर पर बलपूर्वक अधिकार करने का असफल प्रयास किया था, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी के तत्कालीन गवर्नर सर जॉन चाइल्ड को मुगल बंदरगाहों की घेराबंदी करने के दुसाहस के कारण भारत से निष्कासित किए जाने का आदेश झेलना पड़ा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? विजयनगर के किस शासक ने पुर्तगाली गवर्नर अल्बुकर्क के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए थे?
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