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History of India
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वैदिक सभ्यता और उत्तर-वैदिक काल के सामाजिक, आर्थिक तथा दार्शनिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में समाज मूल रूप से कबीलाई और समतावादी था, जहाँ वर्ण व्यवस्था मुख्य रूप से जन्म के आधार पर न होकर कर्म और व्यवसाय पर आधारित थी, किंतु उत्तर-वैदिक काल तक आते-आते गोत्र प्रथा स्थापित हो गई और वर्ण व्यवस्था अत्यधिक कठोर हो गई।
- 2. शतपथ ब्राह्मण में कृषि के विस्तार और कर्मकांडों की जटिलताओं का विस्तृत विवरण मिलता है, जिसमें धान (व्रीहि) और गेहूँ (गोधूम) का उल्लेख कृषि अर्थव्यवस्था के मुख्य खाद्यान्न के रूप में किया गया है।
- 3. उपनिषदों में वैदिक कर्मकांडों और यज्ञीय विधानों की अंधाधुंध आलोचना की गई है, तथा इन्हें ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए एकमात्र साधन के रूप में स्थापित किया गया है।
- 4. वैदिक काल में राजा 'सम्राट्', 'राजन्' या 'गोपा' के रूप में जाना जाता था, जिसे सभा और समिति जैसी संस्थाएँ नियंत्रित करती थीं, और उत्तर-वैदिक काल में इन लोकप्रिय सभाओं का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ऋग्वैदिक समाज कबीलाई और लचीला था, जबकि उत्तर-वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित हो गई और गोत्र संस्था का उदय हुआ। कथन 2 सही है क्योंकि शतपथ ब्राह्मण में कृषि कर्म, हल जोतने के अनुष्ठानों तथा व्रीहि (धान) व गोधूम (गेहूँ) का विस्तृत विवरण मिलता है। कथन 3 गलत है क्योंकि उपनिषदों में कर्मकांडों और यज्ञीय विधानों की आलोचना की गई है और 'ज्ञान' (विद्या) को मोक्ष का साधन बताया गया है, न कि कर्मकांडों को एकमात्र साधन। कथन 4 सही है क्योंकि ऋग्वैदिक काल में सभा और समिति राजा की निरंकुशता पर अंकुश लगाती थीं, किंतु उत्तर-वैदिक काल में राजा की शक्ति बढ़ गई और इन संस्थाओं का प्रभाव क्षीण हो गया।
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राजधानी परिवर्तन का मुख्य कारण इतिहासकारों ने क्या माना है?
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1857 के महान विद्रोह के संदर्भ में प्रसिद्ध इतिहासकारों और उनके द्वारा दिए गए मतों या कथनों के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. सर जॉन लॉरेन्स और सी. सी. रीस - यह विद्रोह पूर्णतः देशभक्ति से रहित और स्वार्थी सैनिकों का एक ऐसा विद्रोह था जिसका कोई सुसंगत उद्देश्य नहीं था।
2. टी.आर. होम्स - यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता' के बीच का संघर्ष था।
3. वी.डी. सावरकर - यह सुनियोजित प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम था।
4. जे. आउट्राम और डब्ल्यू. टेलर - यह विद्रोह अंग्रेजों के विरुद्ध हिंदू-मुस्लिम षड्यंत्र का परिणाम था।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में घटी घटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में 'एनफील्ड राइफल' (Enfield Rifle) को शामिल किया गया, जिसके नए कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी धार्मिक असंतोष पैदा कर दिया, क्योंकि इसे उनकी जाति और धर्म को भ्रष्ट करने का एक सुनियोजित ब्रिटिश षड्यंत्र माना गया।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध कड़ा विरोध जताते हुए अपने यूरोपीय अधिकारी लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई।
3. मंगल पांडे को फांसी दिए जाने की घटना के तुरंत बाद बैरकपुर छावनी के समस्त सैनिकों ने अंग्रेजों के विरुद्ध खुला विद्रोह कर दिया और उसी दिन संपूर्ण दिल्ली पर अधिकार करने के लिए पैदल मार्च शुरू कर दिया था।
4. चर्बी वाले कारतूसों की जाँच और निर्माण के कारखाने मुख्य रूप से दमदम, सियालकोट और अंबाला में स्थित थे, जहाँ सैन्य अधिकारियों ने भारतीय सैनिकों को इन नए कारतूसों के इस्तेमाल से अनिवार्य रूप से छूट दे दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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उन्नीसवीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. तत्त्वबोधिनी सभा - देवेंद्रनाथ ठाकुर
2. साधारण ब्रह्म समाज - आनंद मोहन बोस और शिवनाथ शास्त्री
3. सेवा सदन - रामाबाई रानाडे
4. देव समाज - शिव नारायण अग्निहोत्री
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सुमेलित है/हैं?
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूफी संतों के सिलसिले मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित थे — बा-शरा (जो इस्लामिक शरिया कानून का सख्ती से पालन करते थे) और बे-शरा (जो शरिया कानून से पूरी तरह बंधे नहीं थे, जिन्हें 'कलंदर' भी कहा जाता था)।
2. भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा की गई थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण और शाही दरबारों में उच्च पदों को स्वीकार करने की नीति को अनिवार्य माना ताकि वे राजनीतिक शक्ति के माध्यम से समाज में सुधार कर सकें।
3. भक्ति आंदोलन के महान संत रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति के संदेश का व्यापक प्रसार किया, और उनके शिष्यों में कबीर (जुलाहा), रैदास (मोची), सेन (नाई) तथा पीपा (राजपूत शासक) जैसे विभिन्न जातियों और पृष्ठभूमियों के लोग शामिल थे।
4. वारकरी संप्रदाय महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र था, जिसके अनुयायी भगवान विठ्ठल (विठोबा) की पूजा करते थे और इस संप्रदाय के प्रसिद्ध संतों में ज्ञानेश्वर, नामदेव तथा तुकाराम का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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