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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 17 times

सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक तंत्र, राजस्व संरचना और सैन्य संगठनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' नामक केंद्रीय मंत्रिपरिषद का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी होता था और यह कोई आधुनिक अर्थों में मंत्रिमंडल (Cabinet) न होकर विभिन्न प्रशासनिक विभागों के परामर्शदाताओं का एक समूह था, जहाँ 'पंडितराव' धार्मिक मामलों और दादानुसार दान-पुण्य का प्रभारी था।
  2. 2. शिवाजी ने अपने राज्य में जागीरदारी प्रथा को कड़ाई से हतोत्साहित किया और सैन्य अधिकारियों व सैनिकों को भूमि अनुदान (जागीर) देने के बजाय सीधे नगद वेतन देने की नीति को अपनाया, हालांकि कुछ विशेष मामलों में राजस्व संग्रह के अधिकार दिए गए थे जिन्हें बाद में पेशवा काल में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
  3. 3. मराठा सेना में घुड़सवार सेना के दो प्रमुख वर्ग थे—'पागा' और 'सिलाहदार'। पागा घुड़सवार वे सैनिक थे जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र सीधे उपलब्ध कराए जाते थे और वे राज्य के पूर्ण नियंत्रण में होते थे, जबकि सिलाहदार सैनिक अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर सेना में शामिल होते थे।
  4. 4. शिवाजी की राजस्व प्रणाली मुख्य रूप से मलिक अंबर द्वारा डेक्कन के सुल्तानों के अधीन विकसित भू-राजस्व व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके अंतर्गत भूमि की पैमाइश और उर्वरता के आकलन के बाद प्रारंभिक उपज का दो-तिहाई (66%) हिस्सा राज्य के कर के रूप में अनिवार्य रूप से वसूला जाता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि छत्रपति शिवाजी महाराज की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' में आठ मंत्रियों का समावेश था, जो केवल राजा को सलाह देते थे और 'पंडितराव' दान-दक्षिणा व धार्मिक मामलों का प्रमुख होता था। कथन 2 सही है क्योंकि शिवाजी ने जागीर प्रथा के दुष्परिणामों को समझते हुए सैनिकों और अधिकारियों को नगद वेतन देने पर जोर दिया ताकि केंद्रीय नियंत्रण मजबूत रहे। कथन 3 सही है; पागा घुड़सवारों को राज्य की ओर से घोड़े और अस्त्र-शस्त्र दिए जाते थे, जबकि सिलाहदार अपने संसाधनों (घोड़े व शस्त्र) के साथ सेना में सेवा देते थे। कथन 4 गलत है क्योंकि शिवाजी की व्यवस्था में राजस्व का हिस्सा प्रारंभिक उपज का दो-fifths (यानि लगभग 40%) निर्धारित किया गया था, न कि दो-तिहाई (66%)। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ गुप्त साम्राज्य और मौर्योत्तर काल की प्रशासनिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था तथा सिक्कों के प्रचलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन राजवंश द्वारा ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि या गाँवों के अनुदान देने की प्रथा को बड़े पैमाने पर आरंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य कृषि का विस्तार करना और धार्मिक पुण्य अर्जित करना था। 2. गुप्त काल में 'अग्रहार' और 'ब्रह्मदेय' प्रकार के भूमि अनुदानों के माध्यम से स्थानीय प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार भी अनुदान प्राप्तकर्ताओं को हस्तांतरित होने लगे, जिससे सामंती व्यवस्था के बीज अंकुरित होने लगे थे। 3. गुप्त सम्राटों के काल में सोने के सिक्कों (दीनार) की भारी संख्या में प्राप्ति यह दर्शाती है कि गुप्त काल में अंतरराष्ट्रीय और लंबी दूरी का व्यापार अपनी चरम सीमा पर था तथा रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार में अत्यधिक वृद्धि हुई थी। 4. गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था में तांबे के सिक्कों की संख्या कुषाण और सातवाहन कालों की तुलना में काफी कम मिलती है, जो यह संकेत करती है कि स्थानीय स्तर पर दैनिक विनिमय के लिए मुद्रा का प्रयोग घट गया था और अर्थव्यवस्था में ग्रामीणकरण की प्रवृत्तियाँ उभरने लगी थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल (Moderate) और गरम दल (Extremist) के वैचारिक संघर्ष तथा सूरत विभाजन (1907) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, कांग्रेस के भीतर स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखने या पूरे देश में फैलाने को लेकर गंभीर वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आए थे। 2. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस के भीतर आसन्न विभाजन टल गया था, क्योंकि उनके अध्यक्षीय भाषण में पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) शब्द का औपचारिक रूप से प्रस्ताव पारित कर उल्लेख किया गया था तथा नरमपंथियों और गरमपंथियों के मध्य समन्वय स्थापित किया गया था। 3. सूरत अधिवेशन (1907) में कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीखा गतिरोध उत्पन्न हुआ, जहाँ नरमपंथियों ने रास बिहारी घोष की उम्मीदवारी का समर्थन किया, जबकि गरमपंथियों की मांग लाला लाजपत राय को अध्यक्ष बनाने की थी। 4. सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी रुख अपनाते हुए गरमपंथी नेताओं का दमन किया, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर छह वर्ष के लिए मांडले (बर्मा) जेल भेज दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में हुए संघर्ष और उनके दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिन्हें ब्रिटिश सेना द्वारा 'डंका शाह' के रूप में भी जाना जाता था, और वे पुवायाँ के राजा की गद्दारी के कारण अंग्रेजों के विरुद्ध मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए थे। 2. बरेली में रोहिल्ला सेना का नेतृत्व करने वाले खान बहादुर खान ने ब्रिटिश शासन के पतन के बाद अपनी स्वतंत्र सरकार गठित की थी, जिसे मार्च 1858 में सर कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना ने पूरी तरह से कुचल दिया। 3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह की कमान संभाली थी, और इस महत्वपूर्ण सामरिक केंद्र पर पुनः नियंत्रण प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश अधिकारी कर्नल जेम्स नील ने अत्यधिक क्रूरता और दमनकारी नीतियों का सहारा लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की 34वीं रेजिमेंट के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में नई एनफील्ड राइफल में प्रयोग होने वाले चर्बीयुक्त कारतूसों के विरोध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर आक्रमण किया था। 2. मंगल पांडे की इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश प्रशासन ने किसी बड़े षड्यंत्र की आशंका से बचने के लिए एनफील्ड राइफलों का प्रयोग पूर्णतः बंद कर दिया और सेना में सभी भारतीय सिपाहियों को पुराने मस्कट हथियार वापस लौटा दिए। 3. मंगल पांडे को उनके इस कृत्य के लिए 8 अप्रैल 1857 को बैरकपुर में ही फांसी दे दी गई थी, जिससे भारतीय सिपाहियों में आक्रोश और अधिक तीव्र हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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