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History of India
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महात्मा गांधी के भारत आगमन के पश्चात उनके शुरुआती सत्याग्रह आंदोलनों—विशेष रूप से चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन—की कार्यप्रणाली और उनके परिणामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान, जहाँ एक ओर राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधीजी ने यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकथा पद्धति' के विरुद्ध सफल संघर्ष किया, वहीं सरकार द्वारा नियुक्त 'चंपारण अग्रैरियन कमेटी' के दबाव में आकर अंततः इस शोषणकारी प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया।
  2. 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान जब फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली में कोई रियायत नहीं दी गई, तब गांधीजी ने किसानों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे स्वेच्छा से लगान देना बंद कर दें, और इस आंदोलन के परिणामस्वरूप सरकार ने केवल उन्हीं किसानों से लगान वसूलने का आदेश जारी किया जो भुगतान करने में सक्षम थे।
  3. 3. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में पहली बार गांधीजी द्वारा 'भूख हड़ताल' (Hunger Strike) का सफल प्रयोग किया गया, जिसका उद्देश्य मिल मालिकों और मजदूरों के बीच चल रहे प्लेग बोनस विवाद को सुलझाना था, और मध्यस्थता बोर्ड द्वारा मजदूरों को 35 प्रतिशत वेतन वृद्धि दिए जाने के निर्णय के साथ यह विवाद समाप्त हुआ।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1917 का चंपारण सत्याग्रह महात्मा गांधी का भारत में पहला सफल सविनय अवज्ञा प्रयोग था, जिसके परिणामस्वरूप 'चंपारण कृषि अधिनियम' (Champaran Agrarian Act) पारित कर 'तीनकथा पद्धति' को समाप्त कर दिया गया। वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में किसानों की असमर्थता को देखते हुए गांधीजी और सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में लगान न देने का सफल अभियान चलाया गया, और सरकार ने सक्षम किसानों से ही लगान वसूलने का रियायती आदेश दिया। इसके अतिरिक्त, 1918 के अहमदाबाद मिल मजदूर संघर्ष में गांधीजी ने अपनी पहली भूख हड़ताल का हथियार के रूप में प्रयोग किया, जिससे मिल मालिक झुकने को मजबूर हुए और अंततः न्यायाधिकरण ने 35% बोनस वृद्धि का फैसला सुनाया। इस संपूर्ण कालखंड और आंदोलनों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, भूमि व्यवस्था और प्रशासनिक शब्दावली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में 'भूमि अनुदान' (Land Grants) की प्रथा का विस्तार बड़े पैमाने पर हुआ, जिसके तहत ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थानों को दी जाने वाली कर-मुक्त भूमि को 'अग्रहार' कहा जाता था, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों को नगद वेतन के स्थान पर राजस्व अधिकारों से युक्त भूमि दी जाती थी। 2. इस काल में कृषि भूमि के वर्गीकरण के अंतर्गत 'क्षेत्र' (कृषि योग्य भूमि), 'वापस' या 'वाप्र' (बंजर भूमि), 'अपराधहत' (बिना जोती गई जंगली भूमि) तथा 'गोपथ' (चारागाह भूमि) जैसे विभिन्न प्रकारों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। 3. गुप्तकालीन राजस्व व्यवस्था में 'उद्रङ्ग' एक प्रकार का स्थायी भू-कर था जो किसानों से लिया जाता था, जबकि 'उपरिकर' एक अस्थायी कृषकों या बटाईदारों पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर था। 4. गुप्त सम्राटों ने इतिहास में सबसे बड़ी मात्रा में शुद्ध स्वर्ण मुद्राएं जारी की थीं, जिन्हें अभिलेखों में 'दीनार' कहा गया है, तथा इन स्वर्ण मुद्राओं में मिलावट का स्तर कुषाण काल की तुलना में अत्यंत न्यूनतम और उत्कृष्ट था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा चलाए गए संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वीर कुंवर सिंह ने आरा पर कब्जा करने के बाद ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कैप्टन डनबर के नेतृत्व में भेजी गई सेना को बुरी तरह पराजित किया था, तथा बाद में अपनी वृद्धावस्था के बावजूद गंगा नदी पार करते समय दाहिने हाथ में गोली लगने पर स्वयं तलवार से अपना हाथ काटकर गंगा में अर्पित कर दिया था। 2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों (रोहतास और शाहबाद क्षेत्र) से अंग्रेजों के विरुद्ध समानांतर सरकार चलाते हुए भीषण गोरिल्ला युद्ध का सफल संचालन जारी रखा था। 3. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस लंबे संघर्ष को कुचलने के लिए ब्रिटिश सेनापति मेजर जनरल डगलस को लंबी सैन्य कार्रवाइयां करनी पड़ी थीं, और अंततः नेपाल के जंगलों में शरण लेते समय अमर सिंह की मृत्यु हो गई थी। 4. वीर कुंवर सिंह ने मध्य भारत की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध सैन्य रणनीतियां बनाई थीं और ग्वालियर व बांदा के अभियानों में उनकी सेना का प्रभावी नेतृत्व किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सविनय अवज्ञा आंदोलन, प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930-31) और गांधी-इरविन समझौते (1931) के घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नवम्बर 1930 में लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, क्योंकि महात्मा गांधी समेत कांग्रेस के शीर्ष नेता सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण जेल में बंद थे और वायसराय लॉर्ड इरविन ने कांग्रेस की पूर्व शर्तों को मानने से इंकार कर दिया था। 2. मार्च 1931 में हुए 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत ब्रिटिश सरकार ने हिंसात्मक गतिविधियों में लिفت राजनीतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने और भारतीय को बिना किसी कर के निजी तथा घरेलू उपयोग हेतु समुद्र तट पर नमक बनाने का कानूनी अधिकार देने पर सहमति व्यक्त की थी। 3. गांधी-इरविन समझौते के तुरंत बाद आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते का सर्वसम्मति से बिना किसी विरोध के अनुमोदन किया गया था, और इसी अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू द्वारा 'मौलिक अधिकार एवं आर्थिक नीति' का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां के नेतृत्व एवं उनकी रणनीतिक भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए नाना साहब ने स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र के रूप में मराठा गौरव को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, तथा अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार और कूटनीतिक रणनीतिकार थे। 2. नाना साहब के सेनापति के रूप में तात्या टोपे ने कानपुर की रक्षा के लिए ब्रिटिश सेनापति जनरल सर ह्यू व्हीलर की सेना के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया, किंतु ब्रिटिश सेना द्वारा नगर पर पुनः अधिकार किए जाने के बाद तात्या टोपे ने बिठूर से अपनी गतिविधियों का संचालन किया। 3. कानपुर में ब्रिटिश आत्मसमर्पण के उपरांत घटी 'बीबीघर नरसंहार' की घटना के पश्चात ब्रिटिश कमांडर जनरल हैवलॉक और जेम्स आउट्राम की सेना ने कानपुर पर अधिकार कर लिया, जिसके बाद नाना साहब नेपाल की तराई की ओर प्रस्थान कर गए और उनका अंतिम जीवन रहस्यमय बना रहा। 4. अजीमुल्ला खां ने विद्रोह के वैचारिक और अंतरराष्ट्रीय समर्थन को जुटाने के लिए लंदन में ब्रिटिश संसद और तत्कालीन राजनीतिक हलकों में नाना साहब के दूत के रूप में पैरवी की थी और ब्रिटेन यात्रा के दौरान ही क्रीमिया युद्ध का प्रत्यक्ष अध्ययन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? तुगलक काल में "नायब-ए-वजीर" का पद किसके पास था जो फिरोज तुगलक का अत्यंत वफादार था?
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