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History of India
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के द्वितीय चरण और गांधी-इरविन समझौते के पश्चात वर्ष 1931 में आयोजित 'द्वितीय गोलमेज सम्मेलन' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया था, तथा कांग्रेस ने सांप्रदायिक अधિનिर्णय (Communal Award) और अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर ब्रिटिश सरकार के साथ पूर्ण सहमति व्यक्त की थी।
- 2. इस सम्मेलन में महात्मा गांधी ने भारत के लिए 'डोमिनियन स्टेटस' की मांग का पुरजोर समर्थन किया और ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड के समक्ष तुरंत पूर्ण स्वराज (Complete Independence) का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया था।
- 3. सम्मेलन के दौरान दलित वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. भीमराव अंबेडकर ने सभी दलित जातियों के लिए एक पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorate) की मांग की थी, जिसे महात्मा गांधी ने हिंदू समाज के विघटन का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1931 में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया था, किंतु सांप्रदायिक और अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर वहाँ तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ था, इसलिए कथन 1 गलत है। गांधीजी ने सम्मेलन में भारत की पूर्ण स्वतंत्रता (पूर्ण स्वराज) की मांग पर बल दिया था, न कि केवल डोमिनियन स्टेटस पर, इसलिए कथन 2 गलत है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की मांग की थी जिसका गांधीजी ने कड़ा विरोध किया था, अतः कथन 3 सही है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व, सैन्य रणनीतियों तथा संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा पर विजय प्राप्त करने के पश्चात वीर कुंवर सिंह ने उत्तर प्रदेश की ओर प्रस्थान किया और आजमगढ़ में कर्नल मिलमैन की सेना को पराजित करने के बाद, जगदीशपुर वापस लौटते समय अप्रैल 1858 में कैप्टन ली ग्रांड की सेना को पूरी तरह खदेड़ दिया था।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत उनके छोटे भाई अमर सिंह ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष को जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों को अपना सुरक्षित अड्डा बनाते हुए ब्रिटिश सेना के खिलाफ एक प्रभावी गोरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) का संचालन किया तथा समानांतर प्रशासन स्थापित किया था।
3. अमर सिंह द्वारा कैमूर की पहाड़ियों से संचालित इस प्रतिरोध को कुचलने के लिए ब्रिटिश जनरल डगलस और कमिश्नर सैमुअल्स ने व्यापक सैन्य अभियान चलाया था, जिसके पश्चात अमर सिंह अंग्रेजों के हाथ लग गए और उन्हें सार्वजनिक रूप से पटना में फांसी दे दी गई थी।
4. वीर कुंवर सिंह ने अपनी संपूर्ण सैन्य यात्रा के दौरान केवल पारंपरिक हथियारों पर ही निर्भर रहकर ब्रिटिश सेना से आधुनिक बंदूकों और गोला-बारूद का अधिग्रहण करने से हमेशा परहेज किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा वर्ष 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्वामी बना दिया गया और भू-राजस्व की दर को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया, जिससे किसानों की स्थिति मात्र किराएदार जैसी हो गई।
2. थॉमस मुनरो द्वारा मुख्य रूप से मद्रास प्रेसीडेंसी में लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें बीच के किसी भी बिचौलिए को मान्यता नहीं दी गई थी और किसानों को भूमि का मालिकाना हक प्रदान किया गया था।
3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू की गई 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व के निर्धारण की इकाई व्यक्तिगत किसान को न बनाकर पूरे गाँव या 'महाल' को बनाया गया था, जिसमें संपूर्ण ग्राम समुदाय सामूहिक रूप से राजस्व भुगतान के लिए उत्तरदायी होता था।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि ब्रिटिश सरकार ने कभी भी अत्यधिक उच्च राजस्व दरों का निर्धारण नहीं किया और हमेशा किसानों की भुगतान क्षमता तथा फसल की वास्तविक पैदावार को सर्वोपरि रखा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, अशोक के शिलालेखों तथा उसकी नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के 'सप्तांग सिद्धांत' का प्रतिपादन किया गया है, जिसके अनुसार राजा (स्वामी) सर्वोच्च अंग है, तथा इसमें राज्य के सात अंगों — स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोश, बलय और मित्र का विस्तृत विवरण मिलता है।
2. अशोक के अधिकांश शिलालेखों और स्तंभ लेखों में प्राकृत भाषा तथा ब्राह्मी लिपि का प्रयोग किया गया है, किंतु उत्तर-पश्चिम भारत से प्राप्त शाहबाजगढ़ी और मानसेहरा के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में, तथा कंधार से प्राप्त द्विभाषी अभिलेख ग्रीक और अरामइक् लिपि में उत्कीर्ण हैं।
3. अशोक के 'धम्म महामात्र' नामक अधिकारियों की नियुक्ति उनके राज्याभिषेक के चौदहवें वर्ष में की गई थी, जिनका मुख्य कार्य विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच धार्मिक सहिष्णुता का प्रचार करना, कल्याणकारी कार्य करना और कैदियों के कल्याण की देखरेख करना था।
4. मौर्य प्रशासन में प्रांतीय शासन व्यवस्था के तहत अशोक के समय साम्राज्य पाँच प्रमुख प्रांतों में विभाजित था, जिनकी राजधानियाँ तक्षशिला, उज्जैन, तोसली, सुवर्णगिरि और पाटलिपुत्र थीं, तथा इन प्रांतों का प्रशासन 'कुमार' या 'आर्यपुत्र' नामक राजवंश के राजकुमारों द्वारा संचालित होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके उत्तराधिकारियों के सैन्य अभियानों तथा संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाबू कुंवर सिंह ने आरा पर नियंत्रण स्थापित करने के पश्चात ब्रिटिश सेनापति विंसेंट आयर की सेना को बीबीगंज के समीप पराजित किया था और बाद में गंगा नदी पार कर उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सफल सैन्य अभियान चलाते हुए लखनऊ और आजमगढ़ तक अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी थी।
2. बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु (अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष की बागडोर संभाली और कैमूर की पहाड़ियों (रोहतास क्षेत्र) को अपना मुख्य केंद्र बनाकर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध एक लंबी और प्रभावी छापामार (गुएरिला) युद्ध शैली जारी रखी थी।
3. अमर सिंह ने कैमूर के जंगलों से अंग्रेजी सेना के संचार और रसद मार्गों को पूरी तरह बाधित कर दिया था तथा ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा बार-बार भारी सैन्य अभियान भेजे जाने के बावजूद उन्होंने वर्ष 1858 के अंत तक ब्रिटिश प्रशासन को खुले मैदान में सीधी चुनौती देना जारी रखा था।
4. बाबू कुंवर सिंह और अमर सिंह के संपूर्ण परिवार को ब्रिटिश दमन चक्र के दौरान माफ कर दिया गया था और विद्रोह के शांत होने पर उनकी सभी जब्त जागीरें तथा रियासतें उन्हें ससम्मान वापस लौटा दी गई थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के अंतर्गत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी, जिसके विरुद्ध राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी ने चंपारण का दौरा किया था।
2. चंपारण जाँच समिति के समक्ष किसानों पर किए गए अवैध वित्तीय उत्पीड़न को सिद्ध करने के बाद, समिति ने सर्वसम्मति से बागान मालिकों द्वारा वसूले गए अवैध धन का 50 प्रतिशत हिस्सा किसानों को तत्काल वापस करने की सिफारिश की थी।
3. वर्ष 1920 में कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव चित्तरंजन दास (सी.आर. दास) द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसका उद्देश्य पंजाब और खिलाफत के अन्यायपूर्ण कृत्यों का निवारण करते हुए 'स्वराज' की प्राप्ति करना था।
4. असहयोग आंदोलन के दौरान चौरी-चौरा की हिंसक घटना (फरवरी 1922) के उपरांत बारदोली में हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में महात्मा गांधी ने इस आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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