त्वरित लिंक्स
History of India
5 views
गदर पार्टी और इसके संस्थापकों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. गदर पार्टी की स्थापना वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर के एस्टोरिया में लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना और केसर सिंह थठगढ़ के प्रयासों से की गई थी, जिसका केंद्रीय मुख्यालय 'युगांतर आश्रम' था।
- 2. इस पार्टी द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक समाचार पत्र 'ग़दर' मुख्य रूप से गुरुमुखी लिपि में ही प्रकाशित होता था ताकि पंजाब के अप्रवासी सैनिकों और किसानों तक उसकी पहुँच आसानी से हो सके, तथा इसके प्रत्येक अंक के पहले पृष्ठ पर 'अंग्रेज़ी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक से लेख छापे जाते थे।
- 3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर गदर पार्टी के अधिकांश नेताओं ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह (गदर) करने के लिए भारत लौटने का निर्णय लिया और 'कामागाटामारू' जैसी घटनाओं के बाद राष्ट्रव्यापी असंतोष का लाभ उठाकर तख्ता पलट की योजना बनाई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
गदर पार्टी की स्थापना 1 नवंबर 1913 को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 'पैसिफिक कॉस्ट हिंद एसोसिएशन' के रूप में की गई थी, जिसके संस्थापकों में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना प्रमुख थे। इसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को में 'युगांतर आश्रम' था। कथन (2) गलत है क्योंकि 'ग़दर' अखबार प्रारंभिक रूप से उर्दू में और बाद में गुरुमुखी, गुजराती तथा देवनागरी (मराठी) लिपियों में भी प्रकाशित होता था, न कि केवल गुरुमुखी में। कथन (3) बिल्कुल सही है; प्रथम विश्व युद्ध छिड़ने पर गदर पार्टी के सदस्यों ने भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति का आह्वान किया और देश लौटकर सैन्य छावनियों में विद्रोह भड़काने का प्रयास किया। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
मध्यकालीन भारत के सूफी संतों और उनके सिलसिलों (संप्रदायों) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी, और इस सिलसिले के संतों ने संगीत (समां) को ईश्वर की प्राप्ति का साधन माना तथा राजकीय संरक्षण और शाही दरबारों से दूरी बनाए रखी।
2. सुहरावर्दी सिलसिला मुख्य रूप से मुल्तान और सिंध के क्षेत्रों में अधिक प्रभावशाली था, और इस सिलसिले के संतों (जैसे बहाउद्दीन जकारिया) ने राज्य से किसी प्रकार का अनुदान या वित्तीय सहायता लेने से स्पष्ट इंकार कर दिया था तथा पूरी तरह वैराग्य जीवन अपनाया था।
3. कादिरिया सिलसिले की स्थापना भारत में शाह नेमतुल्लाह द्वारा की गई थी, और इस सिलसिले के सबसे प्रसिद्ध संत मियांदिर थे, जिन्हें मुगल राजकुमार दारा शिकोह का आध्यात्मिक गुरु माना जाता है।
4. नक्शबंदी सिलसिला रूढ़िवादी और कट्टरपंथी विचारधारा के लिए जाना जाता था, जिसके प्रमुख संत ख्वाजा बाकी بالله और शेख अहमद सरहिंदी थे, जिन्होंने अकबर की 'दीन-ए-इलाही' और धार्मिक उदारवादी नीतियों का पुरजोर विरोध किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा उनके वैचारिक एवं संस्थागत विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और बाद में ब्रह्म समाज का मुख्य उद्देश्य एकेश्वरवाद का प्रचार करना, मूर्तिपूजा का खंडन करना तथा ईसाई मिशनरियों की आक्रामक आलोचना के उत्तर में हिंदू धर्म की तार्किक रक्षा करना था।
2. वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा और दलितोद्धार जैसे सामाजिक सुधारों पर विशेष बल दिया, तथा इसके प्रमुख नेताओं में महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर शामिल थे।
3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा रचित 'सत्यार्थ प्रकाश' में आर्य समाज के सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया है, जिसमें उन्होंने न केवल इस्लाम और ईसाई धर्म की कटु आलोचना की, बल्कि पौराणिक हिंदू धर्म, बहुदेववाद, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था को भी पूरी तरह अस्वीकार कर दिया।
4. यंग बंगाल आंदोलन के प्रणेता हेनरी एलियन विवियन डेरोज़ियो ने अपने शिष्यों को पारंपरिक मान्यताओं और अंधविश्वासों के प्रति निष्ठावान रहने की शिक्षा दी, तथा ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की नीतियों की खुलकर प्रशंसा करते हुए किसी भी प्रकार की सामाजिक आलोचना से परहेज किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेशानुसार तुरंत गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था।
2. दानापुर छातीनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर जगदीशपुर के कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गए।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा में यूरोपीय अधिकारियों द्वारा स्थानीय जमींदारों और अफीम गोदाम के अधिकारियों के सहयोग से विद्रोह को तुरंत कुचल दिया गया, जिससे इन क्षेत्रों में सिपाहियों का कोई संगठित प्रतिरोध देखने को नहीं मिला।
4. आरा (शाहबाद) में बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में हुए विद्रोह की व्यापकता और सफलता से भयभीत होकर ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग ने व्यक्तिगत रूप से बिहार आकर इस विद्रोह का दमन करने की कमान संभाली थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
अकबर किस सूफी सिलसिले के प्रति अत्यधिक श्रद्धा रखता था?
→
सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' (आठ मंत्रियों का मंत्रिपरिषद) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान था, जिसमें 'पेशवा' (मुख्य प्रधान) प्रधानमंत्री का पद संभालता था, किंतु अष्टप्रधान के सभी सदस्य वंशानुगत होते थे और उन्हें राजा के सैनिक अभियानों में भाग लेना अनिवार्य था।
2. शिवाजी ने राजस्व सुधारों के तहत मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था को आधार बनाते हुए माप की प्रणाली ('काठी' और 'मान') को अपनाया, तथा राज्य की आय बढ़ाने के लिए पड़ोसी मुगल क्षेत्रों से 'चौथ' (कुल राजस्व का 25%) और 'सरदेशमुखी' (कुल राजस्व का 10% अतिरिक्त कर) नामक कर वसूल करने की प्रणाली विकसित की।
3. मराठा नौसेना (Navy) का सुदृढ़ीकरण शिवाजी की एक दूरदर्शी सैन्य नीति का हिस्सा था, जिसके तहत उन्होंने कोलाबा, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग जैसे तटीय किलों का निर्माण किया तथा पश्चिमी तट पर जंजीरा के सिद्दी और विदेशी ताकतों (पुर्तगालियों और अंग्रेजों) की नौसैनिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
4. शिवाजी के उत्तराधिकार के काल में वर्ष 1731 में 'वारणा की संधि' (Treaty of Warna) के द्वारा छत्रपति और पेशवा के अधिकारों का स्पष्ट विभाजन हो गया, जिसके तहत कोल्हापुर के छत्रपति (संभाजी द्वितीय) और सतारा के छत्रपति (शाहू प्रथम) के बीच मराठा राज्य की संप्रभुता का औपचारिक बंटवारा हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.