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History of India
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना, गुप्तचर व्यवस्था और आर्थिक नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार, मौर्य प्रशासन में 'गूढ़पुरुष' (गुप्तचर) संस्था (एक ही स्थान पर रहकर कार्य करने वाले) और संचारा (भ्रमण करने वाले) - इन दो प्रमुख श्रेणियों में विभक्त थे।
  2. 2. अशोक के काल में साम्राज्य के विभिन्न प्रांतों (चक्रों) में शासन संचालन के लिए राजवंशीय कुमार (आर्यपुत्र) नियुक्त किए जाते थे, जिन्हें प्रांतीय मामलों में स्वतंत्र नीतिगत निर्णय लेने की असीमित शक्ति प्राप्त थी और वे केंद्रीय सम्राट के प्रति उत्तरदायी नहीं थे।
  3. 3. मौर्य काल में राज्य द्वारा कृषि, व्यापार, खनन और कर-संग्रह जैसी आर्थिक गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रखा जाता था, जिसके लिए 'समाहर्ता' (राजस्व संग्रह का सर्वोच्च अधिकारी) और 'सन्निधाता' (कोषागार और राजकीय भंडारों का मुख्य अधिकारी) जैसे उच्च पदाधिकारी उत्तरदायी थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में गुप्तचर व्यवस्था का अत्यंत सूक्ष्म वर्णन मिलता है। गुप्तचरों को 'गूढ़पुरुष' कहा गया है जो दो रूपों में कार्य करते थे— संस्था (एक स्थान पर स्थायी रूप से रहकर कार्य करने वाले) और संचारा (एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करने वाले)। कथन 2 गलत है: मौर्य साम्राज्य के प्रांतों में राजकुमार या 'कुमार' (आर्यपुत्र) नियुक्त जरूर किए जाते थे, परंतु वे प्रांतीय मामलों में पूरी तरह स्वतंत्र नहीं थे; वे केंद्रीय सम्राट और पाटलिपुत्र के नियंत्रण के अधीन होते थे तथा नीतिगत मामलों में केंद्रीय आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य थे। कथन 3 सही है: मौर्य काल में अर्थव्यवस्था पर राज्य का कड़ा नियंत्रण था। 'अर्थशास्त्र' के अनुसार, 'समाहर्ता' राजस्व संग्रह विभाग का सर्वोच्च अधिकारी था, जबकि 'सन्निधाता' कोषागार और राजकीय भंडारों का मुख्य संरक्षक अधिकारी होता था। इस प्रशासनिक व्यवस्था की अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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