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History of India
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दिल्ली सल्तनत के विभिन्न राजवंशों के प्रशासनिक विकास, सैन्य सुधारों और राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बलबन ने सल्तनत काल में सुल्तान के पद की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने के लिए फारसी दरबारी परंपराओं—'सिजदा' (घुटनों पर बैठकर सम्राट को प्रणाम करना) और 'पैबोस' (सम्राट के चरणों को चूमना)—की शुरुआत की, तथा गुप्तचर तंत्र को अत्यंत सुदृढ़ करते हुए 'बरीद-ए-मुमालिक' नामक उच्च अधिकारी के अधीन गुप्तचरों (बरीदों) की नियुक्ति की।
- 2. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी साम्राज्यवादी और सैन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नगद वेतन देने की प्रथा शुरू की, घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया (चेहरा) लिखने की वैज्ञानिक प्रणाली लागू की, तथा दोआब क्षेत्र में भू-राजस्व बढ़ाकर उपज का आधा (50 प्रतिशत) कर दिया।
- 3. मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के साथ-साथ सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) का प्रचलन किया, जिसके अंतर्गत उसने तांबे और कांसे के सिक्कों का मूल्य चांदी के टंके के बराबर घोषित कर दिया, किंतु जाली सिक्कों के बड़े पैमाने पर ढलने और अर्थव्यवस्था के चरमराने के कारण यह प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुआ।
- 4. सिकंदर लोदी ने अपनी राजधानी को दिल्ली से स्थानांतरित कर यमुना नदी के किनारे 'आगरा' नामक नए शहर की स्थापना की, कृषि और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए 'गज-ए-सिकंदरी' (32 इंच का पैमाना) की शुरुआत की, तथा सल्तनत काल में पहली बार हिंदुओं को जबरन इस्लाम स्वीकार कराने के लिए एक अलग धार्मिक विभाग की स्थापना की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। गियासद्दीन बलबन ने 'नियम-ए-खुदाई' (ईश्वर का प्रतिनिधि) का सिद्धांत प्रतिपादित किया और दरबारी अनुशासन के लिए सिजदा एवं पैबोस प्रथा चलाई तथा गुप्तचर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 'बरीद-ए-मुमालिक' की नियुक्ति की। अलाउद्दीन खिलजी ने नगद वेतन, हुलिया और दाग प्रथा के साथ-साथ दोआब क्षेत्र में कर 50 प्रतिशत किया। मुहम्मद बिन तुगलक ने 1329-30 ई. में सांकेतिक मुद्रा (तांबे/कांसे के सिक्के) चलाई जो विफल रही। किंतु कथन 4 आंशिक रूप से असत्य है क्योंकि सिकंदर लोदी ने आगरा शहर की स्थापना (1504) और 'गज-ए-सिकंदरी' का प्रचलन जरूर किया था, लेकिन उसने हिंदुओं को जबरन इस्लाम स्वीकार कराने के लिए कोई अलग धार्मिक विभाग स्थापित नहीं किया था। इस काल की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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उन्नीसवीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके संस्थापकों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. तत्त्वबोधिनी सभा — देवेंद्रनाथ टैगोर
2. परमहंस मंडली — आत्माराम पांडुरंग
3. सत्यशोधक समाज — ज्योतिराव फुले
4. देव समाज — शिवनारायण अग्निहोत्री
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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विजयनगर के तुलुव वंश की स्थापना किसने की थी?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (पल्लव, चालुक्य एवं राष्ट्रकूट) के राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक इतिहास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय को निर्णायक युद्ध में पराजित कर 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी और महाबलीपुरम में एक ही चट्टान को काटकर बनाए जाने वाले रथ मंदिरों (एकाश्म मंदिरों) का निर्माण आरंभ करवाया था।
2. राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक दंतीदुर्ग ने अपने पूर्ववर्ती चालुक्य शासक की शक्ति को समाप्त कर अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित की और एलोरा के प्रसिद्ध 'कलाश मंदिर' (रॉक-कट कैलाश मंदिर) का निर्माण कार्य उसी के शासनकाल में पूर्ण हुआ था।
3. वर्धन राजवंश के शासक हर्षवर्धन के शासनकाल में नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध शिक्षा का एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन चुका था, जिसके भरण-पोषण और रखरखाव के लिए हर्ष ने सौ गाँवों की आय दान में दी थी, जैसा कि चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत से स्पष्ट होता है।
4. दक्षिण भारत के चोल राजवंश की तरह पल्लव प्रशासन में भी ग्राम स्तर पर स्वायत्त संस्थाएँ थीं, जिनमें 'उर' और 'सभा' मुख्य रूप से क्रमशः व्यापारियों और ब्राह्मणों की सभाएँ होती थीं जो स्थानीय प्रशासन का संचालन करती थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रथा और नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत शुरू की गई 'मनसबदारी प्रथा' मुख्य रूप से मंगोलों की दशमलव प्रणाली पर आधारित थी, जिसमें मनसबदारों के पद दो श्रेणियों—'जात' (व्यक्तिगत पद और वेतन) और 'सवार' (घुड़सवार सैनिकों की संख्या)—में विभाजित थे, जिसे बाद में जहाँगीर ने 'दु-अस्मेह सिह-अस्मेह' प्रणाली के माध्यम से और अधिक लचीला बनाया था।
2. शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान मनसबदारी व्यवस्था में 'माहवार' (Month-scale) प्रणाली की शुरुआत हुई, जिसके तहत राजस्व वसूली के आधार पर मनसबदारों के वेतन महीनों में निर्धारित किए जाने लगे, क्योंकि साम्राज्य की जागीरों से होने वाली आय और कुल वेतन की मांग के बीच असंतुलन पैदा होने लगा था।
3. औरंगजेब के शासनकाल में दक्षिण भारत के अभियानों के दौरान मनसबदारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो गई, जिसके परिणामस्वरूप जागीरों की भारी कमी हो गई और इस संकट को 'जागीरदारी संकट' (Jagirdari Crisis) के रूप में जाना जाता है।
4. अकबर ने अपने शासनकाल में राजपूतों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने की नीति अपनाई, किंतु आमेर के कछवाहा वंश को छोड़कर किसी भी अन्य राजपूत राज्य ने मुगल सर्वोच्चता को स्वेच्छा से स्वीकार नहीं किया था और निरंतर armed struggle जारी रखा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन किए गए क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. कर्नल जेम्स नील — बनारस और इलाहाबाद (प्रयागराज) क्षेत्र में अत्यधिक क्रूरता के साथ विद्रोह को कुचला।
2. मेजर जनरल हैवलॉक — कानपुर और लखनऊ में विद्रोही ताकतों के विरुद्ध अभियान का नेतृत्व किया।
3. जॉन निकलसन — दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के लिए ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करते हुए कश्मीरी गेट पर वीरगति को प्राप्त हुए।
4. सर कॉलिन कैंपबेल — झाँसी और ग्वालियर क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई व तात्या टोपे की सेना को पराजित किया।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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