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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की नगर नियोजन प्रणाली, जल निकासी व्यवस्था और सामाजिक-आर्थिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगरों में मकानों के दरवाजे और खिड़कियाँ मुख्य सड़क की ओर खुलते थे, जो कि नगरीय वायुसंचार और प्रत्यक्ष प्रकाश व्यवस्था के प्रति उनकी अनूठी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
  2. 2. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नागार' (Great Bath) का उपयोग संभवतः किसी विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठान या सार्वजनिक स्नान के लिए किया जाता था, जिसके तल को जल-रोधी बनाने के लिए ईंटों के बीच बिटुमिन (तारकोल) की परत का उपयोग किया गया था।
  3. 3. इस सभ्यता की लिपि 'भावचित्रात्मक' (Pictographic) थी, जिसे दाईं से बाईं ओर (ब्यूस्ट्रोफेडन शैली के समान) लिखा जाता था, और अभी तक इस लिपि को पूरी तरह से पढ़ा नहीं जा सका है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता के लगभग सभी नगरों (लोथल को छोड़कर) में घरों के दरवाजे और खिड़कियाँ मुख्य सड़क की ओर न खुलकर पीछे की गलियों की ओर खुलते थे, ताकि धूल और शोरगुल से बचा जा सके। कथन 2 सत्य है; मोहनजोदड़ो का विशाल स्नागार यहाँ की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है जिसके जल-रोधी निर्माण के लिए ईंटों के संधालों में बिटुमिन का प्रयोग किया गया था। कथन 3 भी सत्य है, हड़प्पा सभ्यता की लिपि को 'ब्यूस्ट्रोफेडन' (जिधर से पहली पंक्ति दाईं से बाईं और दूसरी बाईं से दाईं) पद्धति में लिखा जाता था और यह भावचित्रात्मक थी। इस महान सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही सिपाहियों के आगमन और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के विद्रोही सिपाहियों ने 11 मई 1857 को दिल्ली पहुंचकर लाल किले पर कब्जा कर लिया और अनिच्छुक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहंशाह-ए-हिन्दुस्तान' घोषित कर इस विद्रोह का प्रतीकात्मक नेतृत्व स्वीकार करने के लिए विवश कर दिया था। 2. दिल्ली में वास्तविक सैन्य नेतृत्व और प्रशासन की बागडोर मुख्य रूप से जनरल बख्त खान के नेतृत्व में आई प्रशासनिक एवं सैन्य परिषद के हाथों में थी, जिसने सम्राट के नाम पर शासन चलाया और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा प्रतिरोध किया। 3. दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के लिए ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करने वाले जनरल जॉन निकलसन इस संघर्ष के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई, जबकि कर्नल हडसन ने राजकुमारों की हत्या कर सम्राट को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार किया था। 4. विद्रोह के दमन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने बहादुर शाह जफर पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया और उन्हें मृत्युदंड की सजा देकर दिल्ली की ही एक खुली अदालत में सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के खिलाफ विद्रोही सेना और स्थानीय तालुकेदारों का नेतृत्व किया था, तथा अंत में पराजय के बाद वे नेपाल चली गईं जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। 2. 'डंका शाह' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने फैजाबाद (अवर) से विद्रोह का नेतृत्व किया और चिनहट के युद्ध (इतिहास में 'इंचौली का युद्ध' भी कहा जाता है) में हेनरी लॉरेंस की ब्रिटिश सेना को बुरी तरह पराजित किया था। 3. मौलवी अहमदुल्लाह शाह की गतिविधियों से भयभीत होकर ब्रिटिश प्रशासन ने उन पर पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंत में पुवायाँ (रोहिलखंड) के राजा के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी। 4. लखनऊ में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजिमेंट और नेपाल के प्रधानमंत्री जंग बहादुर की सैन्य सहायता से रेजिडेंसी को मुक्त कराया था, किंतु बेगम हजरत महल ने कभी भी ब्रिटिश शर्तों के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके वैचारिक तथा संस्थागत विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पैतृक पुरोहितवाद का कड़ा विरोध करते हुए एकेश्वरवाद पर बल दिया, तथा देवेंद्रनाथ ठाकुर के नेतृत्व में इसे और अधिक संगठित रूप प्रदान करते हुए 'तत्वबोधिनी सभा' का इसमें विलय कर दिया गया। 2. प्रार्थना समाज (1867) की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने बॉम्बे में की थी, जिसे महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर जैसे विद्वानों का समर्थन प्राप्त हुआ, और इसने मुख्य रूप से अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह तथा महिला शिक्षा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया। 3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया तथा पाखंड खंडनी पताका के माध्यम से रूढ़िवादी हिंदू मान्यताओं का खंडन करते हुए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की, जिससे धर्मान्तरित हिंदुओं की स्वधर्म में वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ। 4. साधारण ब्रह्म समाज की स्थापना 1878 में आनंदमोहन बोस, शिवनाथ शास्त्री और द्विजनाथ गांगुली द्वारा केशव चंद्र सेन की अल्पायु पुत्री के कूचबिहार के राजा के साथ विवाह जैसे मुद्दों और ब्रह्म समाज में बढ़ती निरंकुशता के विरोधस्वरूप की गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास तथा नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष एवं कार्यपद्धतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (1885-1905) में नरमपंथी नेताओं का ब्रिटिश न्यायप्रियता में दृढ़ विश्वास था, जिसके कारण उन्होंने प्रशासनिक सुधारों और विधान परिषदों के विस्तार के लिए 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की पद्धति को अपनाया था। 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उत्पन्न राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, कांग्रेस के भीतर स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वराज्य के मुद्दों पर गरमपंथियों (लाल-बाल-पाल) और नरमपंथियों के बीच गहरा वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आया। 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमदल और गरमदल के बीच हुए ऐतिहासिक विभाजन के बाद गरमपंथी नेताओं ने कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लिया और अगले नौ वर्षों तक यानी 1916 के लखनऊ अधिवेशन तक कांग्रेस की कमान पूरी तरह उनके हाथों में रही। 4. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अपनी राजनीतिक रणनीति को स्पष्ट करते हुए यह उद्घोष किया था कि "स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा", जिसे गरमपंथी विचारधारा का मुख्य आधार माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? किस सुल्तान ने मुसलमान स्त्रियों को पीरों और संतों की मजार पर जाने से रोक दिया था?
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