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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 13 times

महात्मा गांधी के भारत आगमन के पश्चात उनके शुरुआती सत्याग्रहों—विशेषकर चंपारण (1917), खेड़ा (1918) और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918)—के रणनीतिक स्वरूप और वैचारिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान, जहाँ यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तिनकाठिया' प्रणाली के तहत अपनी भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करने की अनिवार्यता थोपी गई थी, वहीं गांधीजी के इस आंदोलन की सफलता से प्रभावित होकर रबीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था।
  2. 2. खेड़ा सत्याग्रह में फसल बर्बाद होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली पर अड़े रहने के कारण गांधीजी ने किसानों को ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध लगान न चुकाने (no-tax campaign) का स्पष्ट निर्देश दिया था और इसी आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल गांधीजी के संपर्क में आए थे।
  3. 3. अहमदाबाद मिल हड़ताल के दौरान गांधीजी ने प्लेग बोनस को लेकर मिल मालिकों और मजदूरों के बीच मध्यस्थता करते हुए भारत में पहली बार भूख हड़ताल (Hunger strike) का एक हथियार के रूप में सफल प्रयोग किया था, जिसके परिणामस्वरूप मजदूरों को अंततः 50 प्रतिशत वेतन वृद्धि प्राप्त हुई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: चंपारण सत्याग्रह (1917) बिहार में हुआ था जहाँ तिनकाठिया प्रणाली प्रचलित थी। इस आंदोलन की सफलता के बाद रबीन्द्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी थी। कथन 2 सही है: खेड़ा सत्याग्रह (1918) में फसल खराब होने के बाद भी लगान वसूली के विरुद्ध गांधीजी ने 'कर नहीं आंदोलन' (no-tax campaign) का नेतृत्व किया और यहीं वल्लभभाई पटेल उनके संपर्क में आए। कथन 3 गलत है: अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918) में गांधीजी ने पहली बार भूख हड़ताल का प्रयोग किया था, परंतु अंत में ट्रिब्यूनल के निर्णय के अनुसार मजदूरों को 50% की मांग के बजाय 35 प्रतिशत वेतन वृद्धि प्राप्त हुई थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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