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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 17 times

मराठा साम्राज्य के उत्कर्ष और छत्रपति शिवाजी द्वारा स्थापित प्रशासनिक एवं राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. शिवाजी ने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में जागीरदारी प्रथा को पूर्णतः हतोत्साहित किया और उसके स्थान पर नगद वेतन देने की परंपरा को बढ़ावा दिया, हालांकि सेना के बड़े सरदारों को 'सरनौबत' के माध्यम से भूमि अनुदान (सरदेशमुखी के अधिकार सहित) दिए जाते थे।
  2. 2. 'चौथ' कर पड़ोसी मुगल क्षेत्रों या उन क्षेत्रों से वसूला जाता था जो मराठा आधिपत्य को स्वीकार करते थे, और यह कर उस क्षेत्र के कुल भू-राजस्व का एक-चौथाई हिस्सा होता था जिसके बदले मराठा शासक उस क्षेत्र की बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा (मुगल आक्रमणों से मुक्ति) की गारंटी देते थे।
  3. 3. 'सरदेशमुखी' एक प्रकार का अतिरिक्त कर (अधिशुलक) था जो कुल उपज का 10 प्रतिशत होता था, जिसे शिवाजी महाराष्ट्र के अपने स्वराज्य क्षेत्र के साथ-साथ उन क्षेत्रों से भी वसूल करते थे जिन पर वे अपने वंशानुगत देशमुखी अधिकारों का दावा करते थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि शिवाजी ने मराठा साम्राज्य में जागीरदारी प्रथा को कड़ाई से हतोत्साहित किया और अपने अधिकारियों तथा सैनिकों को भूमि अनुदान देने के बजाय नगद वेतन देने की प्रथा शुरू की थी; साथ ही, सरदारों को सरदेशमुखी या जागीर के रूप में मनमाने अधिकार नहीं दिए जाते थे, बल्कि 'सरनौबत' सेना का एक सैन्य पद (सेनापति) था। कथन 2 सही है, 'चौथ' पड़ोसी मुगल प्रांतों से वसूला जाने वाला कुल राजस्व का 25% (एक-चौथाई) कर था, जिसके बदले मराठा सेना उस क्षेत्र को अन्य आक्रमणकारियों से सुरक्षित रखती थी। कथन 3 सही है, 'सरदेशमुखी' लगभग 10 प्रतिशत (1/10 भाग) का एक अतिरिक्त कर था जिसे शिवाजी महाराष्ट्र के 'स्वराज्य' और अन्य क्षेत्रों से अपने पारंपरिक देशमुखी दाوों के आधार पर वसूलते थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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