Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 19 times
भारत में चुनावी खर्च की सीमा, चुनावी बॉन्ड (Electoral Bonds) योजना और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77 के अंतर्गत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा लोकसभा और विधानसभा चुनावों में किए जाने वाले अधिकतम व्यय की सीमा का निर्धारण निर्वाचन आयोग द्वारा स्वयं अपनी शक्तियों के तहत किया जाता है, जिसके लिए केंद्र सरकार की अधिसूचना की आवश्यकता नहीं होती है।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'एडीएम जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला' वाद में दिए गए सिद्धांतों के अनुरूप, चुनावी बॉन्ड योजना को चुनौती देते हुए संविधान पीठ ने यह निर्णय दिया कि यह योजना नागरिकों के सूचना के अधिकार (Article 19(1)(a)) और काले धन पर अंकुश लगाने के उद्देश्यों के विपरीत है, जिसके कारण इसे असंवैधानिक घोषित किया गया।
- 3. वर्ष 1996 में चुनाव सुधारों से संबंधित तार्कुंडे समिति (Varkunde Committee) या दिनेश गोस्वामी समिति ने राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे (Donations) में पारदर्शिता लाने और सरकारी धन से चुनाव खर्च वहन करने (State Funding of Elections) की संभावनाओं पर विचार करने की सिफारिश की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) के तहत चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा का निर्धारण निर्वाचन आयोग द्वारा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार (विधि और न्याय मंत्रालय) द्वारा निर्वाचन आयोग के परामर्श से किया जाता है। कथन 2 सत्य है, सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने फरवरी 2024 के ऐतिहासिक निर्णय में चुनावी बॉन्ड योजना को सूचना के अधिकार और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विरुद्ध मानते हुए इसे असंवैधानिक घोषित किया था। कथन 3 सत्य है, दिनेश गोस्वामी समिति और तार्कुंडे समिति दोनों ने चुनाव सुधारों, चुनावी खर्चों में पारदर्शिता और सरकारी वित्तपोषण (State Funding) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी संस्तुतियाँ दी थीं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
अगला प्रश्न →
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4)…
← पिछला प्रश्न
भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा (Constituent…
Related Questions
→
भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केबिनेट मिशन योजना (1946) के तहत संविधान सभा के निर्वाचन में ब्रिटिश प्रांतों को आवंटित 292 सीटों के अतिरिक्त मुख्य आयुक्तों के 4 क्षेत्रों (दिल्ली, अजमेर-मारवाड़, कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान) से भी प्रतिनिधियों का चयन किया गया था, तथा देशी रियासतों को कुल 93 सीटें आवंटित की गईं जिनके सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा किया जाना था।
2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई, जिसमें मुस्लिम लीग ने हिस्सा नहीं लिया, और इस बैठक में फ्रांसिसी प्रथा का अनुसरण करते हुए सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया, जबकि डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष 11 दिसंबर 1946 को चुना गया।
3. संविधान सभा द्वारा संविधान निर्माण के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई समितियों का गठन किया गया था, जिनमें से संघ शक्ति समिति और संघीय संविधान समिति के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे, तथा प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के प्रावधानों और नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना या सीमा परिवर्तन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अधीन संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, जिसका प्रयोग मुख्य रूप से उन भू-भागों को भारतीय संघ में शामिल करने के लिए किया जाता है जो पहले से भारत संघ का हिस्सा नहीं थे।
2. अनुच्छेद 3 के तहत किसी नए राज्य के निर्माण या मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता, तथा राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास विधेयक भेजे जाने पर राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित समयावधि के भीतर व्यक्त किया गया मत संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होता है।
3. अनुच्छेद 4 के अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना या पुनर्गठन से संबंधित विधियों में संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए संशोधन किया हुआ माना जाएगा, जिसके लिए विशेष बहुमत और आधे राज्यों के अनुसमर्थन की अनिवार्यता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के विभिन्न प्रावधानों, राजभाषा, राजनीतिक दलों के विधिक नियमों तथा संविधान की अनुसूचियों और भागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संविधान संशोधनों के माध्यम से जोड़ा गया, तथा वर्तमान में इसमें कुल 22 भाषाएँ हैं, किंतु 'अंग्रेजी' और 'राजस्थानी' भाषाएँ इस अनुसूची में शामिल नहीं हैं।
2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों का पंजीकरण किया जाता है, किंतु किसी पंजीकृत दल को 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और साथ ही कम से कम चार राज्यों से लोकसभा में चार सांसद निर्वाचित करे।
3. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 में यह उपबंध किया गया है कि उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय की सभी कार्यवाहियाँ तथा संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित प्रत्येक अधिनियम का प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी भाषा में ही होगा, जब तक कि संसद विधि द्वारा कोई अन्य प्रावधान न करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के आधार से 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, तथा यह भी प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) का लिखित निर्णय उन्हें संसूचित किया जाए।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा यह उपबंध किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाएंगे, और आपातकाल की समाप्ति के बाद उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए संसद की पृथक् विधि की आवश्यकता होगी।
3. अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भाग-III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए किसी भी न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है, किंतु 44वें संशोधन अधिनियम के पश्चात अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने का आदेश किसी भी परिस्थिति में जारी नहीं किया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था।
2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो।
3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.