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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों और मुख्यमंत्री के संवैधानिक दायित्वों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल को किसी भी ऐसे विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, जिस विषय तक राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूर्णतः क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है, क्योंकि यह अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति के पास है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह राज्य کے प्रशासन के संचालन और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, तथा राज्यपाल द्वारा मांगे जाने पर ऐसी सूचना तुरंत उपलब्ध कराए।
  3. 3. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (During the Pleasure of the Governor) पद धारण करता है, और महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे किसी भी स्थिति में मतदान (Voting) करने का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्य के राज्यपाल को भी मृत्युदंड के मामलों में दंडादेश को निलंबित, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, और सैन्य न्यायालयों (Court Martial) के निर्णयों को छोड़कर राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति का विस्तार राज्य की कार्यकारी शक्ति के समतुल्य विषयों तक होता है (यद्यपि राज्यपाल मृत्युदंड को पूर्णतः माफ नहीं कर सकता, किंतु इसके प्रविलंबन या परिहार की शक्ति उसे प्राप्त है, तथापि यह कहना कि वह बिल्कुल क्षमा नहीं कर सकता, पूरी तरह सही नहीं है; मुख्य तकनीकी अंतर यह है कि राज्यपाल मृत्युदंड को 'क्षमा' नहीं कर सकता, लेकिन कथन में दी गई सामान्य समझ के अनुसार मृत्युदंड के मामले में राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों में मुख्य अंतर यह है कि राज्यपाल मृत्युदंड को पूरी तरह से माफ नहीं कर सकता)। हालांकि, अधिक स्पष्ट रूप से समझें तो कथन 1 में तकनीकी त्रुटि यह है कि राज्यपाल मृत्युदंड पर पूरी तरह 'क्षमा' (Pardon) नहीं दे सकता, लेकिन कथन 3 और 2 पूर्णतः सत्य हैं। यहाँ सही उत्तर केवल 2 और 3 (विकल्प b) है क्योंकि राज्यपाल के पास मृत्युदंड पर 'Pardon' (क्षमादान) की शक्ति नहीं होती, केवल राष्ट्रपति के पास होती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें। कथन 2 और 3 बिल्कुल सही हैं।
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