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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा के प्रावधानों, राजनीतिक दलों की मान्यता और संविधान की अनुसूचियों व भागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का उपबंध किया गया है, जिसके तहत अनुच्छेद 343(1) यह स्पष्ट करता है कि संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा इसके साथ ही संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह विधि द्वारा 15 वर्ष की अवधि (वर्ष 1965) के पश्चात भी शासकीय कार्यों के लिए अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को अधिकृत कर सकती है।
- 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) के प्रावधानों और निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत किसी राजनीतिक दल को 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और इसके साथ ही लोकसभा में कम से कम चार सीटें जीते।
- 3. भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें समय-समय पर संशोधनों द्वारा बढ़ाया गया; जैसे- 21वें संशोधन द्वारा सिंधी को, 71वें संशोधन द्वारा कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को, तथा 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को शामिल किया गया, जिससे वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ दर्ज हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। अनुच्छेद 343(1) के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। संसद ने राजभाषा अधिनियम, 1963 पारित करके 1965 के बाद भी अंग्रेजी के उपयोग को अनिश्चितकाल के लिए जारी रखने की अनुमति दी। कथन 2 गलत है: किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए निर्वाचन आयोग के नियमों (जैसे चुनाव प्रतीक आरक्षण आदेश, 1968) के अनुसार, उसे कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का 6% मत प्राप्त करना होगा और इसके अलावा चार अलग-अलग राज्यों से लोकसभा में कम से कम 4 सीटें जीतनी होंगी (या लोकसभा में कुल सीटों का 2% यानी कम से कम 3 राज्यों से 11 सीटें जीतनी होंगी)। केवल 4 राज्यों में 6% मत और 4 सीटें जीतना राष्ट्रीय दल की शर्त को पूरा नहीं करता जब तक कि लोकसभा सीटों का प्रावधान न जुड़ा हो। कथन 3 सही है: संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं। 1967 के 21वें संशोधन द्वारा सिंधी, 1992 के 71वें संशोधन द्वारा कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली, तथा 2003 के 92वें संशोधन द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली जोड़ी गईं, जिससे कुल संख्या 22 हो गई। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण' प्रदान किया गया है, जिसके दायरे में सर्वोच्च न्यायालय ने 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) को न्यायमूर्ति के. एस. पुट्टास्वामी (सेवानिवृत्त) बनाम भारत संघ वाद (2017) में नौ जजों की संविधान पीठ के सर्वसम्मत निर्णय द्वारा एक मौलिक अधिकार घोषित किया था।
2. अनुच्छेद 20(2) में वर्णित 'दोहरे खतरे' (Double Jeopardy) के सिद्धांत के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जा सकता है, और यह संवैधानिक संरक्षण विभागीय या प्रशासनिक (Departmental) कार्यवाहियों के साथ-साथ न्यायिक न्यायालयों दोनों पर समान रूप से लागू होता है।
3. अनुच्छेद 21A के माध्यम से 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा छह से चौदह वर्ष की आयु के सभी बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाया गया, जिसे प्रभावी बनाने के लिए संसद ने 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' (RTE Act) पारित किया था।
4. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय जाने के अधिकार को डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा 'संविधान की आत्मा और हृदय' कहा गया है, और यह स्वयं में एक मूल अधिकार है, जिसे राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी किसी भी परिस्थिति में निलंबित या प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction), प्रशासनिक नियंत्रण तथा अधीनस्थ न्यायपालिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत किसी राज्य के उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ 'किसी अन्य प्रयोजन' (अर्थात सामान्य विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर) के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और इस संदर्भ में उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का क्षेत्र सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अंतर्गत जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायिक सेवा के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श के बिना सीधे मंत्रिपरिषद की सलाह पर की जाती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 235 के अनुसार प्रत्येक राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी देना शामिल है, उच्च न्यायालय में निहित होता है, न कि राज्य सरकार के प्रशासनिक मंत्रालयों के पास।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अनुसार संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों को ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, जबकि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु अनुच्छेद 3 के तहत ऐसा कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता, और राष्ट्रपति इस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजते हैं, जिसके द्वारा दी गई प्रत्येक सलाह या सिफारिश को मानना संसद के लिए संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होता है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरुबारी यूनियन मामले' (1960) में यह प्रतिपादित किया गया था कि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को प्राप्त 'क्षेत्र में परिवर्तन करने की शक्ति' में किसी भारतीय राज्य के भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपना (Cession) भी शामिल है, और इसके लिए संसद द्वारा साधारण बहुमत से ही संविधान संशोधन किया जा सकता है।
3. 92वें संविधान संशोधन अधिनियम या अन्य संबंधित ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में, संसद द्वारा भारतीय भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपने के लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है, जैसा कि भारत और बांग्लादेश के बीच भूमि सीमा समझौते (Land Boundary Agreement, 2015) को लागू करने के लिए 100वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (राज्यसभा और लोकसभा) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा होता है, और इस निर्वाचक गण में संसद के मनोनीत सदस्य भी शामिल होते हैं, किंतु राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य इसमें भाग नहीं लेते हैं।
2. अनुच्छेद 75 (1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, और संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि प्रधानमंत्री या किसी भी मंत्री के लिए यह अनिवार्य है कि वह नियुक्ति के समय संसद के किसी भी सदन का सदस्य हो, अन्यथा छह महीने के भीतर उसे संसद के किसी सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होगी।
3. अनुच्छेद 75 (3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक निहितार्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है, तथा यदि प्रधानमंत्री अपने पद से त्यागपत्र दे देता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री कौन थे?
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