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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध' (अनुच्छेद 15) और 'लोक emplement के विषयों में अवसर की समता' (अनुच्छेद 16) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 15(5) के अनुसार, राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के वर्गों की उन्नति के लिए अथवा अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए शैक्षणिक संस्थानों (अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर) में प्रवेश से संबंधित कोई विशेष उपबंध करने की शक्ति प्राप्त है, और यह उपबंध निजी शिक्षण संस्थानों पर भी लागू होता है।
  2. 2. अनुच्छेद 16(4) के तहत राज्य को किसी भी पिछड़े वर्ग के पक्ष में नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिए उपबंध करने की शक्ति दी गई है, बशर्ते राज्य की राय में उस वर्ग का प्रतिनिधित्व राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त नहीं है, और यह आरक्षण का अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय एक मौलिक अधिकार के रूप में नागरिकों को स्वतः प्राप्त होता है।
  3. 3. अनुच्छेद 16(5) के तहत यह उपबंध किया गया है कि किसी ऐसे विधि के संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जो यह उपबंध करती है कि किसी धार्मिक या साम्प्रदायिक संस्था के मामलों से संबंधित पदाधिकार या उसका कोई सदस्य किसी विशिष्ट धर्म को मानने वाला या संप्रदाय से संबंधित होना चाहिए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 15(5) (जिसे 93वें संशोधन अधिनियम, 2005 द्वारा जोड़ा गया) के अनुसार, राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े नागरिकों के वर्गों, अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) की उन्नति के लिए शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के संबंध में विशेष प्रावधान करने की शक्ति है, जिसमें सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थान भी शामिल हैं, सिवाय अनुच्छेद 30(1) के तहत आने वाले अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के।

कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 16(4) राज्य को पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान करने की *शक्ति* देता है, किंतु यह नागरिकों का कोई मौलिक अधिकार नहीं है जिसके बल पर वे अनिवार्य रूप से आरक्षण की मांग कर सकें; यह राज्य का एक सक्षमकारी उपबंध (Enabling provision) है। इसके अलावा, आरक्षण का दावा न्यायालय में वाद योग्य (Justiciable right) नहीं है जब तक कि राज्य ने ऐसा कोई नियम न बनाया हो।

कथन 3 सही है: अनुच्छेद 16(5) यह स्पष्ट करता है कि लोक रोजगार से संबंधित समता का नियम किसी ऐसी विधि को प्रभावित नहीं करेगा जो यह प्रावधान करती है कि किसी धार्मिक या सांप्रदायिक संस्था (जैसे वक्फ बोर्ड या मंदिर ट्रस्ट) का पदाधिकारी या प्रशासक किसी विशेष धर्म या संप्रदाय से संबंधित होना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर जाएं।
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